UPI Payment Charges: UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहकों के लिए आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी Merchant Discount Rate लागू करने की तैयारी की खबरों के बीच एक नए सर्वे ने इसके संभावित असर को लेकर तस्वीर सामने रखी है। प्रस्तावित व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने की बात कही जा रही है। इस चार्ज की जिम्मेदारी सीधे तौर पर व्यापारी या दुकानदार की होगी। हालांकि, अगर व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को सरचार्ज या सामान की कीमत बढ़ाकर ग्राहकों से वसूलते हैं, तो पेमेंट का तरीका बदलने की संभावना है।
LocalCircles के सर्वे में देश के 291 जिलों के 67,000 से ज्यादा UPI यूजर्स ने हिस्सा लिया। सर्वे का मुख्य सवाल यह था कि अगर ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर दुकानदार अतिरिक्त शुल्क लेने लगे, तो ग्राहक किस दूसरे पेमेंट विकल्प का इस्तेमाल करेंगे। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि अतिरिक्त शुल्क लगने की स्थिति में UPI की जगह दूसरे माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ सकता है।
फीस लगने पर ग्राहक क्या करेंगे?
सर्वे के मुताबिक, 14 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे UPI से ही भुगतान करते रहेंगे और अतिरिक्त फीस भी देने को तैयार होंगे। वहीं 27 प्रतिशत ग्राहक कैश को प्राथमिकता देंगे।इसके अलावा 26 प्रतिशत लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने की बात कह रहे हैं, जबकि 14 प्रतिशत डेबिट कार्ड पर जाने का विकल्प चुनेंगे।
UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू में 10% तक गिरावट का अनुमान
LocalCircles ने अनुमान जताया है कि यदि 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत MDR लागू होता है, तो पहले पूरे महीने में UPI ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू में करीब 10 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। सर्वे के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन संख्या के लिहाज से कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शन का 5 प्रतिशत से भी कम हैं। लेकिन रकम के लिहाज से इनका हिस्सा काफी बड़ा है।व्यापारी भी MDR का खर्च उठाने को तैयार नहीं
सिर्फ ग्राहकों की राय ही नहीं, सर्वे में व्यापारियों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। LocalCircles ने 242 जिलों के 32,000 से ज्यादा व्यापारियों से भी इस मुद्दे पर राय ली। सर्वे में केवल 17 प्रतिशत व्यापारियों ने कहा कि वे ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR देने को तैयार हैं। इसके विपरीत 41 प्रतिशत व्यापारी किसी भी तरह का MDR देने के पक्ष में नहीं हैं।
ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 4% गिरावट की आशंका
LocalCircles का अनुमान है कि प्रस्तावित MDR व्यवस्था के बाद UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इसमें लगभग 1 प्रतिशत पॉइंट की गिरावट सीधे MSME व्यापारियों से जुड़ी हो सकती है, जबकि बाकी 3 प्रतिशत पॉइंट का असर नेटवर्क इफेक्ट के कारण आने का अनुमान है। यानी अगर ग्राहकों को कुछ दुकानों पर UPI इस्तेमाल करने के लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़े, तो वे अन्य व्यापारियों के यहां भी UPI का इस्तेमाल कम कर सकते हैं।ग्राहक पर पड़ सकता है अतिरिक्त खर्च का असर
अगर ज्यादातर व्यापारी 0.4 प्रतिशत MDR का खर्च खुद वहन नहीं करना चाहते, तो इसकी भरपाई के लिए वे अलग-अलग तरीके अपना सकते हैं। इसमें ग्राहक से सरचार्ज लेना, उत्पादों की कीमत बढ़ाना या दूसरे पेमेंट विकल्पों को बढ़ावा देना शामिल हो सकता है। ऐसी स्थिति में ग्राहक के लिए पेमेंट का तरीका चुनना सिर्फ सुविधा का मामला नहीं रहेगा, बल्कि अतिरिक्त खर्च भी एक महत्वपूर्ण वजह बन सकता है।
UPI के लिए बड़ी रकम वाले पेमेंट सबसे बड़ी चुनौती
₹2,000 से अधिक के भुगतान संख्या में भले ही कम हों, लेकिन इनकी कुल वैल्यू काफी अधिक है। इसलिए इस श्रेणी के ट्रांजैक्शन में बदलाव UPI के कुल पेमेंट वैल्यू पर बड़ा असर डाल सकता है। अगर ग्राहक क्रेडिट कार्ड, कैश और बैंक ट्रांसफर जैसे विकल्पों पर तेजी से शिफ्ट होते हैं और व्यापारी भी MDR का खर्च ग्राहकों पर डालते हैं, तो बड़े मूल्य वाले डिजिटल पेमेंट का मौजूदा पैटर्न बदल सकता है।

