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घरेलू हिंसा पर सख्त टिप्पणी को दर्शाता दृश्य
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जमानत याचिका खारिज : पत्नी से क्रूरता करने वाले पति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जमानत खार‍िज

सुप्रीम कोर्ट ने एक घरेलू हिंसा मामले की सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की और आरोपी पति को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि शादी किसी महिला के खिलाफ हिंसा करने का अधिकार नहीं देती और पत्नी की गरिमा, इच्छा और सम्मान का पूरी तरह सम्मान होना चाहिए। कोर्ट ने “जानवरों जैसा व्यवहार” करने की प्रवृत्ति को गंभीर अपराध बताते हुए ऐसी दलीलों को खारिज किया कि घटना केवल गुस्से या पारिवारिक विवाद का परिणाम थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा को सामान्य पारिवारिक विवाद की तरह नहीं देखा जा सकता, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
11 May 2026, 05:05 PM
दिल्ली

देश में आए दिन घरेलू हिंसा के सैकड़ों मामले सामने आते हैं। इन्हीं मामलों को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने पत्नी के साथ बेहद क्रूर व्यवहार करने वाले पति को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि शादी किसी महिला पर हिंसा करने का लाइसेंस नहीं हो सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पत्नी की इच्छा, सम्मान और गरिमा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उसके साथ “जानवरों जैसा व्यवहार” करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती। कोर्ट की टिप्पणी से साफ संकेत मिलता है कि भविष्य में ऐसे मामलों में आसानी से जमानत नहीं दी जाएगी।

क्या था पूरा मामला

यह मामला एक ऐसे पति से जुड़ा था जिस पर अपनी पत्नी के साथ लगातार मारपीट और हिंसक व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने अदालत से जमानत की मांग करते हुए कहा कि घटना गुस्से और पारिवारिक विवाद के दौरान हुई थी। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

समाज में जाएगा गलत संदेश

जमानत याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि किसी भी पति को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह पत्नी को अपनी संपत्ति समझे या उसकी इच्छा के खिलाफ हिंसा करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों को सामान्य पारिवारिक झगड़े की तरह नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में जमानत दी जाती है तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।

शादी में सम्मान और सहमति जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि विवाह का रिश्ता सम्मान, सहमति और बराबरी पर आधारित होना चाहिए। किसी महिला का विरोध करना, अलग रहने की इच्छा जताना या हिंसा का विरोध करना पति के लिए हमला करने का कारण नहीं बन सकता। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया और निचली अदालत को मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया।

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