"आदिवासी परिवार" के लिए 16 परिणाम मिले
रायपुर
बदलाव : घर बैठे सुधरे जमीनी कागजात, 8 हजार से अधिक आदिवासी परिवारों को मिला हक
आंकड़ों में सफलता पिछले 4 वर्षों के लंबित मामलों को खंगालने पर कुल 17,405 मृतकों की सूची में से 8,651 मामले ऐसे मिले जहाँ नामांतरण होना बाकी था। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए रिकॉर्ड समय में 8,241 मामलों का पूरी तरह निराकरण कर दिया है
रायपुर संभाग
आबकारी विभाग : आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय का आरोप, आबकारी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
कबीरधाम में बैगा आदिवासी समाज ने आबकारी विभाग के दो अधिकारियों पर झूठे मामलों में फंसाने और कथित अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं। समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं आबकारी विभाग ने मामले की जांच कराने और तथ्यों के आधार पर आगे कदम उठाने की बात कही है।
अंबिकापुर (सरगुजा)
कब्जा : वन अधिकार पट्टा होने के बावजूद आदिवासी परिवार बेदखली के शिकार
सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के कुनिया गांव में माझी जनजाति परिवारों ने दबंगों पर उनकी वन अधिकार पट्टे वाली जमीन और गोचर भूमि पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ितों का कहना है कि वे पिछले दो वर्षों से लगातार जनदर्शन और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
अंबिकापुर (सरगुजा)
संघर्ष : मैनपाट में आदिवासी परिवार दूषित जल पीने को मजबूर, बीमारियों का खतरा बढ़ा
सरगुजा जिले के मैनपाट स्थित कुनिया ग्राम पंचायत के जंगल पारा में गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीणों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते वे मजबूरी में नाले के किनारे बने अस्थायी जल स्रोत का दूषित पानी पी रहे हैं। महिलाएं 20 फीट गहरी खाई उतरकर पानी लाने को मजबूर हैं और कई बार अंधेरे में भी पानी भरने जाती हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है।
राज्य सरकार
Chhattisgarh Farmers: कोरिया के जोबापारा में स्टॉपडेम ने बदली किसानों की किस्मत, 30 एकड़ खेतों में लहलहा रही धान की फसल
Chhattisgarh Farmers: कोरिया जिले के कदमनारा ग्राम पंचायत के जोबापारा गांव में नकटी नाले पर बने स्टॉपडेम ने किसानों की जिंदगी बदल दी है। मनरेगा के तहत 19 लाख रुपए से अधिक की लागत से बने इस स्टॉपडेम से करीब 30 एकड़ खेतों में सिंचाई सुविधा मिलने लगी है। पहले पानी की कमी से परेशान आदिवासी किसान अब धान के साथ सब्जी और गेहूं की खेती की योजना बना रहे हैं।
राज्य सरकार
धमतरी के भोथापारा में जल संरक्षण और मत्स्य पालन से ग्रामीण परिवार बने आत्मनिर्भर
धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के भोथापारा गांव में आजीविका डबरी योजना ने आदिवासी परिवारों को आर्थिक मजबूती दी है। वर्षा जल संचयन, सिंचाई सुविधा और मत्स्य पालन के जरिए परिवारों की आय बढ़ी और पलायन पर रोक लगी।
मुंगेली
खुलासा : आदिवासियों से धोखाधड़ी का आरोप, फर्जी पट्टे और AI दस्तावेजों की जांच के निर्देश
मुंगेली जिले के खुड़िया वनांचल क्षेत्र में आदिवासी परिवारों से पट्टा दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप लगा है। शिकायत में फर्जी पट्टे जारी करने और AI की मदद से दस्तावेज तैयार किए जाने की आशंका जताई गई है। मामले में कलेक्टर, SP और DFO से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। वन विभाग ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
बस्तर संभाग
गोंचा महापर्व : बस्तर की अनोखी परंपरा, बांस की तुपकी से भगवान जगन्नाथ को दी जाएगी सलामी
बस्तर के प्रसिद्ध गोंचा महापर्व में 600 साल पुरानी तुपकी परंपरा निभाई जाती है। बांस से बनी तुपकी से भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र को 21 तोपों की तर्ज पर सलामी दी जाती है। यह परंपरा बस्तर की संस्कृति के साथ ग्रामीणों के रोजगार का भी आधार बनी हुई है।
अंबिकापुर (सरगुजा)
पहाड़ हो रहे गायब : माफिया काटकर बेच रहे मुरम-पत्थर, कार्रवाई का इंतजार
अंबिकापुर के मानिकप्रकाशपुर और क्रांति प्रकाशपुर में वन अधिकार अधिनियम के तहत मिली जमीन की आड़ में पहाड़ियों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। आरोप है कि माफिया जेसीबी से पहाड़ काटकर मुरम और पत्थर निकाल रहे हैं, जबकि ग्रामीणों को पहाड़ समतल कर मकान बनाने का झांसा दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने पर्यावरण संरक्षण और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
राष्ट्रीय
मेहनत लाई रंग : किस्मत हो तो ऐसी दो साल पहले 93 लाख, अब फिर मिला 30 लाख का हीरा
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में एक आदिवासी परिवार की किस्मत दूसरी बार चमकी है। अहिरगवां की निजी हीरा खदान से 11.19 कैरेट का जेम्स क्वालिटी हीरा मिला है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये है। इससे पहले वर्ष 2024 में इसी परिवार को 19.22 कैरेट का हीरा मिला था, जिसकी नीलामी 93 लाख रुपये में हुई थी।
रायपुर
विकास : नक्सलमुक्त बस्तर अब आर्थिक और तकनीकी हब बनने को तैयार
नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सलमुक्त बस्तर के लिए व्यापक विकास रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी करने, डेयरी क्रांति लाने, 32 हजार हेक्टेयर में सिंचाई विस्तार, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और पर्यटन को रोजगार के बड़े स्रोत के रूप में विकसित करने की योजना साझा की।
राज्य सरकार
दुग्ध क्रांति : 156 दुग्ध समितियों से किसानों को मिल रहा लाभ
महासमुंद जिले में पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय ग्रामीणों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभर रहा है। जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय देवभोग दुग्ध महासंघ और निजी डेयरियों के माध्यम से किया जा रहा है।