"सरकारी योजना" के लिए 187 परिणाम मिले
छत्तीसगढ़
आजीविका डबरी बनी वरदान : बिसाहिन ने मछली पालन से बदली किस्मत, दोगुनी हुई आय
छत्तीसगढ़ के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम पहरनादादर की किसान बिसाहिन पहले वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थीं, जिससे उनकी आय सीमित थी। वर्ष 2025 में सरकारी योजना के तहत उनके खेत में लगभग 20×20 मीटर की आजीविका डबरी (कृषि तालाब) का निर्माण किया गया, जिसकी जल भंडारण क्षमता करीब 894 घन मीटर है। तालाब बनने के बाद उन्होंने मछली पालन शुरू किया और साथ ही रबी फसल व सब्जी उत्पादन भी करने लगीं। इससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उन्हें खेती के साथ अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत मिला।
छत्तीसगढ़
सुशासन तिहार: 30 अप्रैल तक लंबित प्रकरणों के त्वरित निपटारे के निर्देश, 1 मई से 10 जून तक लगेंगे जनसमस्या निवारण शिविर
छत्तीसगढ़ में “सुशासन तिहार 2026” के तहत आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। कलेक्टर ने अधिकारियों को 30 अप्रैल 2026 तक सभी लंबित मामलों—जैसे भूमि विवाद, मनरेगा भुगतान, प्रमाण पत्र, बिजली व पेयजल समस्याएं तथा विभिन्न योजनाओं के लाभ—का प्राथमिकता से निपटारा करने के निर्देश दिए हैं। 1 मई से 10 जून 2026 तक पंचायत और वार्ड स्तर पर जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित होंगे, जहां आवेदन लिए जाएंगे और अधिकतम एक माह में उनका समाधान किया जाएगा। अभियान के दौरान सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर विशेष जोर रहेगा तथा वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि शिविरों का निरीक्षण करेंगे।
छत्तीसगढ़
कमार जनजाति के 940 परिवारों का डिजिटल सर्वे अभियान तेज, 30 अप्रैल 2026 तक लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश
जिले में कमार विशेष पिछड़ी जनजाति के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए डिजिटल सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 76 PVTG गांवों में निवासरत 940 परिवारों (कुल 3306 जनसंख्या) का शत-प्रतिशत ऑनलाइन दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों तक सरकारी योजनाओं का सही लाभ पहुंचाना और स्वास्थ्य, शिक्षा व बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का आकलन करना है।
छत्तीसगढ़
ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से किसान बना मिसाल, कम जमीन में बड़ा मुनाफा
मुंगेली जिले के किसान बसदेव राजपूत ने 1 एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर आधुनिक तकनीकों (ड्रिप इरिगेशन व मल्चिंग) की मदद से करीब 1.95 लाख रुपये की आय अर्जित की। लगभग 62 हजार की लागत के बाद उन्हें 1.33 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। सरकारी अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन से उनकी खेती सफल रही, जिससे आसपास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।
महासमुंद कलेक्टर ने शासकीय योजनाओं की समय-सीमा समीक्षा बैठक में दिए कड़े निर्देश
कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने जिले में शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों की समय-सीमा में समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों को कार्य योजना, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में यूरिया बिक्री, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बाल पोषण, शिक्षा, जल संरक्षण और अन्य सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। सभी लंबित प्रकरणों का शीघ्र और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया।
बेहाल गौवंश : भीषण गर्मी में बिना चारा-पानी भटकते मवेशी, प्लास्टिक मिश्रित डस्ट बना सहारा; स्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा
महासमुंद के NH-353 क्षेत्र में चारे की कमी के चलते गौवंश राइस मिल की हानिकारक डस्ट खाने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी में पानी और छाया के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल चारा, पानी और संरक्षण की व्यवस्था की मांग की है।
छत्तीसगढ़
स्व-सहायता समूह से बदली तकदीर: डेयरी और खेती से ‘लखपति दीदी’ बनीं माधुरी जंघेल
छत्तीसगढ़ की माधुरी जंघेल ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर डेयरी, खेती और पशु आहार व्यवसाय के जरिए सालाना 5.50 लाख रुपये की आय हासिल की और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं।