"ग्रामीण महिलाएं" के लिए 24 परिणाम मिले
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Bihan Yojana: रायगढ़ की रुकमणी ने सीमेंट से मंदिर बनाकर बदली किस्मत, अब कमा रहीं 45 हजार रुपए महीना
Bihan Yojana: रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड की रुकमणी कुंवर ने बिहान योजना से जुड़कर अपने हुनर को रोजगार का रूप दिया। स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर उन्होंने सीमेंट से मंदिर और सजावटी सामग्री बनाना शुरू किया। आज वह इस काम से हर महीने करीब 45 हजार रुपए तक की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। उनका सफर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
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Chhattisgarh Women Farmers: बिहान समूह की 35 महिलाओं ने कमाए 6 लाख रुपए, 600 क्विंटल उत्पादन कर रचा रिकॉर्ड
Chhattisgarh Women Farmers: सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के रिसोरा गांव की 35 महिला किसानों ने सामूहिक खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। बिहान योजना से जुड़े उजाला उत्पादक समूह ने आधुनिक तकनीक अपनाकर लौकी, करेला और खीरे की खेती की, जिससे 600 क्विंटल सब्जियों का उत्पादन हुआ और करीब 6 लाख रुपए की आय अर्जित की। महिलाओं ने बिचौलियों से दूरी बनाकर सीधे थोक बाजार से जुड़कर अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य हासिल किया।
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Mushroom Farming: सारंगढ़ की मिथिला ने दिखाई आत्मनिर्भरता की राह, अब हर माह कमा रही 50 हजार रूपए
Mushroom Farming: सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के खोरीगांव की मिथिला नायक ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर मशरूम उत्पादन शुरू किया। करीब 1.50 लाख रुपए की शुरुआती पूंजी से शुरू हुआ यह कारोबार अब उन्हें हर माह लगभग 50 हजार रुपए की आमदनी दे रहा है। उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बनी है।
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Lakhpati Didi : सरकारी सहयोग और मेहनत का कमाल, लखपति दीदी बनीं कमलेश यादव
Lakhpati Didi: मरवाही विकासखंड की कमलेश यादव ने महिला स्वसहायता समूह से जुड़कर चिकन स्टोर और सिलाई कार्य को आय का जरिया बनाया। समूह से मिले आर्थिक सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है।
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बिहान योजना ने खोली नई राह, मिट्टी के उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनी सावित्री
रायगढ़ जिले की ग्राम पंचायत सियारपाली की सावित्री राणा बिहान योजना से जुड़कर कुम्हारी के पारंपरिक हुनर को स्वरोजगार में बदल रही हैं। स्व-सहायता समूह, वित्तीय सहयोग और बैंक ऋण की मदद से उन्होंने कारोबार खड़ा किया और अब हर महीने करीब 8 से 9 हजार रुपये कमा रही हैं।
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बिहान से बदली जिंदगी: राखी बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं सरगुजा की महिलाएं
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के किशुन नगर की जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बिहान योजना से जुड़कर राखी निर्माण के जरिए आय अर्जित कर रही हैं। 12 महिलाओं का समूह स्थानीय और घरेलू सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कर बाजार व घर से बेच रहा है। सीजनल गतिविधियों से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल रहा है।
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राखियों के जरिए ग्रामीण महिलाओं को मिला स्वरोजगार का नया अवसर
गरियाबंद जिले में बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। राखियों की बिक्री से महिलाओं को अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का अवसर मिल रहा है। जिला प्रशासन द्वारा आकांक्षा हाट समेत विभिन्न स्थानों पर बिक्री स्टॉल लगाकर ग्रामीण महिला समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
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सफलता : नाव संचालन से आत्मनिर्भरता तक, महिलाओं ने रचा नया इतिहास
सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम पर मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की 10 महिलाओं ने बोटिंग गतिविधि शुरू कर आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों और कई चुनौतियों के बावजूद समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण लेकर नाव संचालन और पर्यटकों की सुविधाओं की जिम्मेदारी संभाली। इस पहल से अब तक लगभग 74 हजार रुपये की आय अर्जित हुई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और आत्मविश्वास बढ़ा है।
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मत्स्य पालन : ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव की कहानी, मछली पालन और खेती से उमा सिंह बनीं आत्मनिर्भर
उमा सिंह ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर खेती, मत्स्य पालन और छोटे व्यवसाय के माध्यम से आत्मनिर्भरता हासिल की। 85 हजार रुपये के सहयोग से शुरू किए गए कार्यों ने उन्हें “लखपति दीदी” की पहचान दिलाई। उनकी सफलता से ग्रामीण महिलाओं में स्वरोजगार के प्रति प्रेरणा और जागरूकता बढ़ी है।
रायपुर संभाग
वट सावित्री के बहाने नारी शक्ति का संदेश, चंपारण धाम में भाजपा नेत्री ललिता वर्मा ने निभाई परंपरा
चंपारण धाम में भाजपा के रायपुर जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भाजपा महामंत्री ललिता वर्मा ने वट सावित्री व्रत का निर्जला उपवास रखते हुए स्थानीय महिलाओं के साथ वट वृक्ष की पूजा की। उन्होंने महिलाओं को नारी शक्ति, परिवार और संस्कृति का प्रतीक बताते हुए पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण का संदेश भी दिया।
ग्रामीण महिलाओं की नई उड़ान : इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
बिलासपुर के कोनी स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर-सेटी) में ग्रामीण महिलाओं को पहली बार इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण दिया गया है। ‘बिहान’ योजना से जुड़ी 20 महिलाएं इस प्रशिक्षण के माध्यम से पुरुष-प्रधान माने जाने वाले तकनीकी क्षेत्र में कदम रखकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। प्रशिक्षण में उन्हें वायरिंग, घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत, सुरक्षा उपाय और तकनीकी ज्ञान सिखाया गया।
छत्तीसगढ़
स्व-सहायता समूह से बदली तकदीर: डेयरी और खेती से ‘लखपति दीदी’ बनीं माधुरी जंघेल
छत्तीसगढ़ की माधुरी जंघेल ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर डेयरी, खेती और पशु आहार व्यवसाय के जरिए सालाना 5.50 लाख रुपये की आय हासिल की और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं।