Viral Video: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नियमों का पालन कराने और कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वे खुद सरेआम कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। अभनपुर के नायब तहसीलदार विपिन पटेल का बीच सड़क पर जन्मदिन मनाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
गाड़ी की डिक्की में केक और फिल्मी गानों पर जश्न
सामने आए वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक सरकारी पदनाम लिखी गाड़ी (नंबर CG 04 NY 1910) को बीच सड़क पर रोका गया है। गाड़ी की डिक्की खुलते ही अंदर सजा हुआ बर्थडे केक और बर्थडे टैग नजर आता है। इस दौरान बैकग्राउंड में सलमान खान की फिल्म का चर्चित गाना 'ओ ओ जाने जाना' बज रहा है, जिस पर अधिकारी महोदय रील बनाते दिख रहे हैं। इतना ही नहीं, वीडियो में एक अन्य युवक सड़क पर ही आतिशबाजी (फायरवर्क्स) की तैयारी करता हुआ भी साफ नजर आ रहा है। हालांकि, यह वीडियो किस सटीक स्थान और समय का है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इसके तेवरों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब रक्षक ही बन जाए भक्षक, तो आम जनता क्या सीखे?
राजस्व प्रशासन में नायब तहसीलदार का पद बेहद अहम और जिम्मेदारी वाला माना जाता है। ऐसे जिम्मेदार पद पर आसीन अधिकारी यदि मुख्य मार्ग पर वाहन रोककर इस तरह का हुड़दंग मचाएं, तो आम जनता के बीच बेहद गलत संदेश जाता है। मुख्य सड़क पर इस तरह के आयोजन से ट्रैफिक व्यवस्था बाधित होती है और वाहन चालकों तथा राहगीरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। वीडियो के आधार पर यातायात नियमों के उल्लंघन की यह तस्वीर प्रशासनिक आचरण पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
हाईकोर्ट की सख्ती और दोहरे मापदंड पर बहस
सड़क पर केक काटने और इस दौरान ट्रैफिक जाम करने की घटनाओं को लेकर न्यायपालिका पहले भी बेहद सख्त रुख अपना चुकी है। इस मामले पर जानकारों का कहना है कि हाईकोर्ट सार्वजनिक स्थलों पर इस तरह केक काटने के मामलों में स्वतः संज्ञान ले चुका है। पूर्व में चीफ जस्टिस ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़ने पर दोषियों के ड्राइविंग लाइसेंस तक रद्द किए जाएं। अब जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, आम लोग और सोशल मीडिया यूजर्स तीखे सवाल पूछ रहे हैं। जनता का साफ कहना है कि जब आम नागरिक द्वारा नियम टूटने पर तुरंत भारी-भरकम चालान काटे जाते हैं, तो फिर कानून लागू कराने वाले अधिकारियों के लिए मापदंड अलग क्यों होने चाहिए? इस वायरल क्लिप के बाद अब प्रशासनिक महकमे में विभागीय कार्रवाई को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है।







