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रक्तदान महादान : एक यूनिट रक्त बचा सकती है कई जिंदगियां, लेकिन इन नियमों का रखें ध्यान
रक्तदान जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकता है, लेकिन इसे सुरक्षित तरीके से करना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 18 से 65 वर्ष आयु के स्वस्थ व्यक्ति ही रक्तदान करें, जबकि गर्भवती महिलाएं, कम हीमोग्लोबिन वाले लोग, संक्रमण या गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति रक्तदान से बचें। रक्तदान से पहले पर्याप्त भोजन, पानी और आराम जरूरी है, वहीं रक्तदान के बाद भी कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। सही तरीके से किया गया रक्तदान न केवल सुरक्षित है, बल्कि कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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हृदय रोग : बचाव के लिए कितनी जरूरी है एक्सरसाइज, फिटनेस लेवल बढ़ता है
नई रिसर्च के अनुसार सप्ताह में 560 से 610 मिनट तक एक्सरसाइज करने से हृदय रोगों का खतरा 30% तक कम हो सकता है। विशेषज्ञों ने इसे महत्वपूर्ण बताया, लेकिन 150 मिनट साप्ताहिक गतिविधि को अब भी जरूरी और लाभकारी माना है।
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कैंसर : भारत में बढ़े हेड एंड नेक कैंसर के मामले, देर से पहचान बन रही खतरा
भारत में हेड एंड नेक कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार लगातार गला दर्द, गर्दन में गांठ, मुंह के लंबे समय तक रहने वाले छाले और निगलने में परेशानी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने तंबाकू, गुटखा, शराब और खराब लाइफस्टाइल को बड़ा कारण बताते हुए समय पर जांच और जागरूकता पर जोर दिया है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन : ब्लड प्रेशर ,कमजोर इम्यूनिटी तक, जानिए कौन सी चीजें पहुंचाती हैं नुकसान
World Health Organization यानी WHO के अनुसार ज्यादा नमक, चीनी, जंक फूड, धूम्रपान, शराब, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। ये तत्व हाई ब्लड प्रेशर, कमजोर हड्डियां, कम इम्यूनिटी, मोटापा और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों ने संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दी है।
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वायु प्रदूषण : बना साइलेंट किलर, बच्चों के फेफड़ों पर सबसे ज्यादा असर
देश में बढ़ते वायु प्रदूषण और PM2.5 के ऊंचे स्तर के कारण अस्थमा (Asthma) और COPD जैसी फेफड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अब सिर्फ धूम्रपान करने वाले ही नहीं, बल्कि बच्चे और नॉन-स्मोकर्स भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जहरीले प्रदूषण कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर सांस संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा कर रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन सकता है।
सेहत
याददाश्त : कमजोर होने के पीछे क्या हैं कारण? जानिए बचाव के तरीके
भारत में भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया और अल्जाइमर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में लाखों बुजुर्ग इससे प्रभावित हैं। बढ़ती उम्र, तनाव, खराब जीवनशैली, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और नींद की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, नियमित व्यायाम, मानसिक गतिविधियां और संतुलित आहार से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बादाम, अखरोट, हरी सब्जियां, फल, दूध, मछली और ओमेगा-3 युक्त भोजन दिमाग को स्वस्थ रखने में मददगार माना जाता है।
सही दवा, शुद्ध आहार : ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू नियंत्रण अभियान, स्कूलों के 100 गज दायरे में जांच
छत्तीसगढ़ शासन के “सही दवा, शुद्ध आहार – यही छत्तीसगढ़ का आधार” अभियान के तहत महासमुंद जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन, राजस्व और पुलिस विभाग के संयुक्त प्रयास से खाद्य एवं औषधि प्रकोष्ठ का गठन कर लगातार जागरूकता एवं प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। कोटपा एक्ट 2003 के तहत बागबाहरा और महासमुंद ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर स्कूलों के 100 गज के दायरे में दुकानों का निरीक्षण किया गया। नियम उल्लंघन पर 30 चालान काटे गए तथा तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर सख्त रोक, नाबालिगों को बिक्री न करने और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान से बचाव के निर्देश दिए गए।
सेहत
मीठी ड्रिंक्स : साइलेंट किलर, तेजी से बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा
स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि ज्यादा चीनी, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और जंक फूड का लगातार सेवन फैटी लीवर का खतरा तेजी से बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में अतिरिक्त शुगर फैट बनकर लिवर में जमा होने लगती है, जिससे लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, शराब और खराब लाइफस्टाइल भी इसके बड़े कारण हैं। पेट में भारीपन, थकान, कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याएं इसके सामान्य लक्षण हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बचाव के लिए हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम, मीठी ड्रिंक्स से दूरी और बेहतर लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दी है।
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मांसपेशियों की कमजोरी : पैरों में दर्द को न करें नजर अंदाज, हो सकता है डायबिटीज न्यूरोपेथी
डायबिटीज न्यूरोपेथी एक ऐसी स्थिति है जो लंबे समय तक डायबिटीज नियंत्रित न रहने पर होती है, जिसमें पैरों की नसें प्रभावित हो जाती हैं। इसके लक्षणों में पैरों का सुन्न होना, झनझनाहट, दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी शामिल है। इससे बचाव के लिए ब्लड शुगर नियंत्रण, सही खानपान, नियमित व्यायाम और पैरों की देखभाल जरूरी है।
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तंबाकू पर सख्ती : तेंदुकोना में कोटपा एक्ट के तहत 14 चालान
तेंदुकोना क्षेत्र में तंबाकू नियंत्रण अभियान के तहत संयुक्त टीम ने सख्त कार्रवाई करते हुए 14 चालान काटे। शैक्षणिक संस्थानों के आसपास नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है और आगे भी अभियान जारी रखने की बात कही है।
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सेहत : 40 के बाद हड्डियों को मजबूत रखने के लिए अपनाएं ये आसान देसी उपाय
बढ़ती उम्र के साथ हड्डियां कमजोर होना सामान्य है, लेकिन सही खान-पान और लाइफस्टाइल से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर आहार जैसे दूध, दही, हरी सब्जियां, दालें और ड्राई फ्रूट्स हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। साथ ही सुबह की धूप, नियमित हल्की एक्सरसाइज और संतुलित आहार हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी हैं। गलत खान-पान, धूप की कमी, शारीरिक गतिविधि की कमी और बीमारियां जैसे ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों को कमजोर कर सकती हैं, इसलिए समय रहते सही आदतें अपनाना जरूरी है।
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स्वास्थ्य संकट : जंक फूड और तनाव का असर, बढ़ती बीमारियों की सच्चाई
भारत में अब संक्रमण वाली बीमारियों की तुलना में लाइफस्टाइल और क्रॉनिक बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, मोटापा, फैटी लिवर और थायरॉइड प्रमुख हैं। इसकी मुख्य वजहें गलत खानपान, जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और नींद की कमी हैं। ये समस्याएँ अब युवाओं में भी तेजी से दिख रही हैं। शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर हेल्थ चेकअप से इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।