"वित्त वर्ष 2026-27" के लिए 17 परिणाम मिले
शेयर बाजार
वेलोरा इम्पैक्ट की बड़ी छलांग, पहली तिमाही में 141.92 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और मुनाफे में वापसी
वेलोरा इम्पैक्ट लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू बढ़कर 141.92 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह सिर्फ 1.17 करोड़ रुपये था। कंपनी घाटे से बाहर निकलकर 7.90 करोड़ रुपये के नेट प्रॉफिट में आ गई है। मजबूत बिजनेस ग्रोथ, बेहतर ऑपरेशनल क्षमता और रणनीतिक बदलावों के चलते कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में बड़ा सुधार देखने को मिला है।
कारोबार
कमाई में उछाल : बेहतर टैक्स कलेक्शन से पहली तिमाही में 64,945 करोड़ रुपये का राजस्व
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में तमिलनाडु सरकार की कुल आय 64,944.97 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1,189.27 करोड़ रुपये अधिक है। बेहतर टैक्स कलेक्शन ने केंद्र से मिले कम अनुदान की भरपाई की, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रही।
शेयर बाजार
जीएसटी से सरकार की कमाई बढ़ी : जून में रिकॉर्ड 1.94 लाख करोड़ का संग्रह
नई दिल्ली में देश के आर्थिक विकास की रफ्तार को दिखाने वाली एक बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। सरकार ने सालाना गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी जीएसटी कलेक्शन की नई रिपोर्ट जारी कर दी है। इस बार देश का कुल जीएसटी कलेक्शन तेरह दशमलव नौ प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ एक लाख चौरानवे हजार आठ सौ बारह करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
अर्थव्यवस्था
बढ़ेगी टेंशन : अवेंडस की रिपोर्ट में दावा—कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बिगाड़ सकती हैं भारत की ग्रोथ और महंगाई का गणित
अवेंडस वेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत वित्त वर्ष 2026-27 में औसतन 90 डॉलर प्रति बैरल तक के कच्चे तेल की कीमतों का सामना कर सकता है। हालांकि यदि ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक इस स्तर से ऊपर बना रहता है, तो GDP ग्रोथ घट सकती है, महंगाई बढ़ सकती है और चालू खाता घाटा (CAD) तेजी से बढ़ सकता है। रिपोर्ट में होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की भारी ऊर्जा निर्भरता को भी बड़ा जोखिम बताया गया है।
कारोबार
आर्थिक इतिहास में नया कीर्तिमान : अप्रैल में ₹2.43 लाख करोड़ के पार पहुंचा GST कलेक्शन
अप्रैल 2026 में भारत का GST कलेक्शन ₹2.43 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया गया है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 8.7% अधिक है। इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान आयात (imports) का रहा, जिसमें 25.8% की तेज बढ़ोतरी देखी गई, जबकि घरेलू GST ग्रोथ अपेक्षाकृत धीमी (4.3%) रही। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक अस्थिरता ने आयात बिल बढ़ाया, जिससे टैक्स कलेक्शन में उछाल आया। हालांकि कुल आंकड़े मजबूत दिखते हैं, लेकिन विशेषज्ञ संकेत देते हैं कि घरेलू खपत की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है और वृद्धि का बड़ा हिस्सा कीमतों व आयात-आधारित प्रभाव से आया है।