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ED action in Chhattisgarh DMF scam(Image Source: social media)
ED action in Chhattisgarh DMF scam(Image Source: social media)
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DMF Scam: घोटाले पर ED का शिकंजा, सतपाल चाबड़ा समेत 17 आरोपी जांच के घेरे में

DMF Scam: ED ने 31.70 करोड़ की संपत्तियां अटैच की हैं। जांच एजेंसी ने सतपाल सिंह चाबड़ा और मंदीप चावला समेत 17 आरोपियों के खिलाफ रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 31 Oct 2026, 07:33 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
DMF Scam: छत्तीसगढ़ में (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने करीब 31.70 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इसके साथ ही मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ रायपुर स्थित विशेष PMLA न्यायालय में पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है।
ED के रायपुर जोनल कार्यालय की ओर से 29 अक्टूबर 2026 को संपत्ति अटैच करने का प्रोविजनल ऑर्डर जारी किया गया था। इसके अगले दिन यानी 30 अक्टूबर को विशेष न्यायालय में पूरक अभियोजन शिकायत पेश की गई। इसमें सतपाल सिंह चाबड़ामंदीप चावला सहित 15 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। 

DMF की राशि से खरीद में गड़बड़ी का आरोप

ED की जांच में DMF फंड के इस्तेमाल को लेकर कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। यह राशि मूल रूप से खनन प्रभावित इलाकों के विकास और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण पर खर्च की जानी थी। लेकिन जांच एजेंसी के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों, एजेंटों और बिचौलियों के एक संगठित नेटवर्क ने इस फंड का तौर पर दुरुपयोग किया। जांच में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से की गई खरीदी को भी जांच के दायरे में लिया गया है। 

खरीद आदेशों पर 25 से 50 फीसदी तक कमीशन ED के अनुसार

इस पूरे नेटवर्क में कमीशन का खेल बड़े स्तर पर चल रहा था। रेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम पाने वाली कंपनियों से जारी खरीद आदेशों की मूल राशि पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूले जाने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि कमीशन की रकम का बड़ा हिस्सा उन लोगों तक पहुंचाया जाता था। जिनकी भूमिका फंड आवंटन, खरीद आदेश जारी करने और भुगतान की प्रक्रिया में थी। इस रकम को नकद और बैंक खातों के जरिए इकट्ठा किया जाता था। बाद में अलग-अलग कंपनियों और बैंक खातों के माध्यम से इसका लेन-देन कर पैसों के वास्तविक स्रोत को छिपाने की कोशिश की जाती थी। ED को जांच के दौरान यह भी पता चला कि कमीशन वसूली का तरीका केवल DMF फंड तक सीमित नहीं था। 
 जांच में सतपाल सिंह चाबड़ा को इस सिंडिकेट की अहम कड़ी बताया गया है। ED के मुताबिक, वह बिचौलिये के साथ-साथ वित्तीय समन्वयक की भूमिका निभा रहा था। चुनिंदा कंपनियों को काम दिलाने, खरीद आदेश जारी करवाने, भुगतान सुनिश्चित कराने और कमीशन की रकम एकत्र कर उसे आगे पहुंचाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होने का आरोप है। इसी मामले में ED ने सतपाल सिंह चाबड़ा को 1 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था।

अब तक करीब 50 करोड़ की संपत्तियां अटैच

ED के मुताबिक, जांच में आरोपियों से जुड़ी करीब 35 करोड़ की अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का पता चला है। इसी के मद्देनजर ताजा कार्रवाई में 31.70 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। एजेंसी का कहना है कि इस मामले में अब तक IAS अधिकारी रानू साहू समेत चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं, विभिन्न कार्रवाइयों के दौरान लगभग 50 करोड़ की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं।

सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका की जांच जारी

DMF घोटाले में ED की जांच अभी खत्म नहीं हुई है। एजेंसी सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। खास तौर पर फंड आवंटन से लेकर खरीद आदेश जारी करने, भुगतान कराने और कमीशन की रकम के लेन-देन तक की कड़ियों को खंगाला जा रहा है। ED के अनुसार, अपराध से अर्जित धन को इधर-उधर स्थानांतरित कर वैध दिखाने में शामिल लोगों की पहचान भी की जा रही है।
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