"सामाजिक न्याय" के लिए 22 परिणाम मिले
रायपुर संभाग
डॉ. डहरिया ने उठाए सवाल : गरीबों के आशियाने उजाड़कर विधायक कॉलोनी बनाना गलत
डॉ. डहरिया ने कहा कि नकटी गांव के लोगों को वर्षों से बिजली कनेक्शन, पेयजल सुविधा, सड़क, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य कई सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता रहा। ऐसे में अब अचानक उसी बस्ती को अवैध घोषित कर लोगों को बेदखल करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
रायपुर
लिया संकल्प : नारायणपुर के पीडियाकोट में सिर्फ पेंशन नहीं, बंटी सामाजिक सुरक्षा
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला प्रशासन ने सुदूर वनांचल ग्राम पंचायत पीडियाकोट में एक विशेष पेंशन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य अंतिम छोर पर रहने वाले बुजुर्गों दिव्यांगों और कल्याणी बहनों को से (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) प्रणाली में लाना था
दुर्ग
बड़ी उपलब्धि : डॉ. अंबेडकर चेयर की मंजूरी, छत्तीसगढ़ में पहली शोध पीठ स्थापित होगी
दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार से डॉ. भीमराव अंबेडकर चेयर (शोध पीठ) स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। यह छत्तीसगढ़ का पहला विश्वविद्यालय होगा जहां यह प्रतिष्ठित शोध केंद्र स्थापित किया जाएगा। इस योजना के तहत विश्वविद्यालय को हर साल 75 लाख रुपये की वित्तीय सहायता और अतिरिक्त रिसर्च फंड भी मिलेगा।
कांग्रेस
ओबीसी गणना को लेकर कांग्रेस नेता अमरजीत चावला का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, जनगणना 2026 में अलग गणना की मांग
कांग्रेस नेता अमरजीत चावला ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि जनगणना 2026 में ओबीसी वर्ग की अलग से गणना नहीं की जा रही है, जिससे उनकी वास्तविक जनसंख्या और हिस्सेदारी सामने नहीं आ पाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक न्याय के मुद्दे को नजरअंदाज कर रही है और ओबीसी समाज के अधिकारों को कमजोर कर रही है। चावला ने मांग की कि जनगणना में ओबीसी की अलग गणना सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें उनके जनसंख्या अनुपात के अनुसार अधिकार और प्रतिनिधित्व मिल सके।
अन्य
द्रविड़ पॉलिटिक्स 2.0: साउथ कनेक्शन का नया अध्याय या राष्ट्रीय राजनीति की नई धुरी
तमिलनाडु में थलपति विजय की राजनीतिक एंट्री केवल क्षेत्रीय घटना नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में साउथ कनेक्शन के नए उभार का संकेत है। उनकी द्रविड़ पॉलिटिक्स 2.0 पारंपरिक द्रविड़ विचारधारा जिसकी जड़ें ईवी रामासामी पेरियार के सामाजिक न्याय आंदोलन में हैं, उनको आधुनिक और संतुलित रूप में प्रस्तुत करती है।
छत्तीसगढ़
शादी का झांसा : कृषि विस्तार अधिकारी को उम्रकैद, कोर्ट ने कहा- धोखा देकर शोषण अक्षम्य
छत्तीसगढ़ की एक विशेष अदालत ने देवनारायण साहू को अपनी कॉलेज सहेली के साथ दुष्कर्म और जातिगत उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने पाया कि आरोपी ने शुरू से ही शादी का झूठा वादा कर पीड़िता का शोषण किया और बाद में उसकी जाति के आधार पर उसे अपमानित कर संबंध से इनकार कर दिया। उसे भारतीय न्याय संहिता और SC/ST एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत सजा दी गई, जिसमें उम्रकैद, अन्य कारावास और जुर्माना शामिल है।
श्रमिकों के लिए खुला खजाना : बजट में 256 करोड़ का प्रावधान, आवास और ई-रिक्शा सहायता राशि में भारी बढ़ोतरी
छत्तीसगढ़ सरकार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में, श्रमिकों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है। पिछले 2 साल 4 माह में लगभग 800 करोड़ रुपये DBT के माध्यम से श्रमिकों के खातों में भेजे गए हैं। श्रमिक बच्चों की शिक्षा के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को अच्छे निजी स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। सरकार कई अन्य योजनाएं जैसे छात्रवृत्ति, औजार किट, मेधावी प्रोत्साहन और श्रम अन्न योजना भी चला रही है।
संसद
Women Reservation Bill : संसद में अटका महिला आरक्षण विधेयक, हेमा मालिनी और कंगना रनौत की तीखी प्रतिक्रिया, कहा- महिलाओं के लिए यह बड़ा झटका
महिला आरक्षण विधेयक का पारित न हो पाना केवल एक विधायी असफलता नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी की आकांक्षाओं से जुड़ा सवाल है। Hema Malini और Kangana Ranaut जैसी हस्तियों की प्रतिक्रिया इस बात को रेखांकित करती है कि यह मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर कितना संवेदनशील और महत्वपूर्ण है।
संसद
महिला आरक्षण कानून लागू: 33% सीटों पर महिलाओं का अधिकार, असर 2029 से
महिला आरक्षण अधिनियम-2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की जाएंगी। हालांकि कानून लागू हो चुका है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव जनगणना और परिसीमन के बाद, संभवतः 2029 के चुनाव से दिखाई देगा। यह कदम राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
अन्य
बिहार में आज बदलेगा ‘नीतीश मॉडल’ का सियासी स्वरूप
बिहार की राजनीति एक ऐसे संक्रमणकाल से गुजर रही है, जहां बदलाव नेतृत्व तक सीमित नहीं, पूरे राजनीतिक ढांचे और कार्यशैली को प्रभावित करने वाला है। पिछले दो दशकों में जिस संतुलनकारी राजनीति ने राज्य की सियासत को दिशा दी, आज वही मॉडल एक निर्णायक मोड़ पर दिखाई दे रहा है। बदलते समीकरण, नए शक्ति केंद्र और स्पष्ट होते वैचारिक विभाजन इस बात के संकेत हैं कि बिहार अब एक नए राजनीतिक दौर की ओर बढ़ रहा है, जहां निर्णय अधिक सीधे और मुकाबले अधिक स्पष्ट होंगे।