"जल संरक्षण" के लिए 106 परिणाम मिले
राज्य सरकार
वन विभाग का हरित प्रयास : सीड बॉल अभियान से बदलेगी जंगलों की तस्वीर, बारिश के साथ धरती पर लौटेगी हरियाली
छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा सीड बॉल अभियान के माध्यम से हरियाली बढ़ाने और वनीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। मिट्टी, जैविक खाद और बीजों से तैयार सीड बॉल बारिश के बाद अंकुरित होकर नए पौधों का रूप लेते हैं। इस अभियान में स्कूल, कॉलेज, स्वयंसेवी संस्थाएं और ग्रामीणों की भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य सरकार
लाभकारी खेती की ओर बढ़े कदम : धान की जगह मूंगफली पर बढ़ा भरोसा, किसानों को होगा ज्यादा लाभ
महासमुंद जिले में खरीफ सीजन के दौरान धान के स्थान पर मूंगफली जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विभाग के प्रोत्साहन से जिले में करीब 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती हो रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
बालोद
जनआंदोलन : बालोद के 29 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने जल बचाने का दिया संदेश, घर-घर लिखे पत्र
बालोद जिले में ‘जल संचय-जनभागीदारी 2.0’ और ‘कैच द रैन 2026’ अभियान के तहत 1048 विद्यालयों में एक साथ पत्र लेखन गतिविधि आयोजित की गई। इसमें 29,367 विद्यार्थियों ने जल संरक्षण का संदेश देते हुए अपने परिजनों और नागरिकों को जागरूक किया। अभियान में कुल 37,497 लोगों ने भाग लेकर वर्षा जल संचयन और जल बचाने का संकल्प लिया।
राज्य सरकार
नई उड़ान : स्कूली बच्चों की वैज्ञानिक प्रतिभा को मिलेगा मंच, बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की तैयारियां तेज
छत्तीसगढ़ में 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में 33 जिलों के जिला समन्वयकों और रिसोर्स शिक्षकों को वैज्ञानिक परियोजना निर्माण, अनुसंधान पद्धति और मूल्यांकन प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इस पहल का उद्देश्य स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और शोध क्षमता को बढ़ावा देना है।
राज्य सरकार
बड़ी कामयाबी : मोर गांव-मोर पानी अभियान ने बदली गांवों की तस्वीर, जल संचयन से बढ़ेगी किसानों खुशहाली
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान जल संरक्षण का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। जनभागीदारी से 2.85 लाख जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया, जिससे 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित हुई। इस पहल से भूजल स्तर सुधार, किसानों को सिंचाई सुविधा और ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
राज्य सरकार
छोटी डबरी, बड़ा बदलाव : किसान को मिली सिंचाई, मछली पालन और रोजगार का नया सहारा
बस्तर के खोटलापाल गांव में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन के तहत बनी डबरी ने किसान सोनधर की जिंदगी बदल दी है। जल संरक्षण से सिंचाई सुविधा बढ़ी, मछली पालन से अतिरिक्त आय मिली और गांव में भूजल स्तर भी सुधरा।
राज्य सरकार
पर्यावरण संरक्षण की मिसाल : सारंगढ़ की महिलाओं का हरियाली संकल्प, 30 हजार सीड बॉल से होगा पौधारोपण
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम पंचायत गोड़म में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने वीबी जी राम जी अभियान के तहत करीब 30 हजार सीड बॉल तैयार किए। मानव श्रृंखला बनाकर बीज रोपण उत्सव मनाया गया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
खेल
NGT की सख्ती : रायपुर समेत तीन क्रिकेट स्टेडियमों में खेल गतिविधियों पर लगी रोक
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने जल संरक्षण से जुड़े मामले में सख्त कदम उठाते हुए देश के तीन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों में खेल गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। भूजल के उपयोग और जल प्रबंधन व्यवस्था को लेकर जारी नोटिस का जवाब नहीं देने पर यह कार्रवाई की गई है।
राज्य सरकार
वन संरक्षण पर जोर : खल्लारी में सामुदायिक वन संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान
महासमुंद के ग्राम खल्लारी में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति के सदस्यों को वन संरक्षण, मृदा एवं जल संरक्षण, वृक्षारोपण और संसाधनों के सतत प्रबंधन की जानकारी दी गई। चयनित ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधनों के विकास के लिए 50 हजार रुपए की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।
रायपुर संभाग
पेयजल समस्या का समाधान : रीवा में बनेगा 4 करोड़ का स्टॉपडेम, पेयजल संकट से मिलेगी राहत
आरंग जनपद के ग्राम रीवा की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 4 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉपडेम निर्माण की घोषणा की है। यह पहल जनपद पंचायत सभापति कृष्णा महेश साहू द्वारा सुशासन शिविर में उठाई गई मांग के बाद संभव हुई। स्टॉपडेम बनने से जल संरक्षण, भू-जल स्तर में सुधार और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार
आत्मनिर्भर : महासमुंद के किसानों को मिले उन्नत बीज, वैज्ञानिकों ने सिखाए खेती के नए तरीके
कृषि विज्ञान केन्द्र महासमुंद ने आत्मनिर्भर दलहन मिशन योजना के तहत किसानों को अरहर, उड़द और मूंगफली के उन्नत बीज वितरित किए। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने फसल विविधीकरण, बीज उपचार, मृदा परीक्षण, जैव उर्वरक और आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी देकर किसानों को आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
राज्य सरकार
पानी अभियान : 551 ग्राम पंचायतों में भू-जल संवर्धन एवं प्राकृतिक संसाधन कार्यों को प्राथमिकता दी गई
महासमुंद जिले में मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0 और मनरेगा के तहत एक वित्तीय वर्ष में रिकॉर्ड स्तर पर जल संरक्षण कार्य किए गए। जिले की 551 ग्राम पंचायतों में 31 करोड़ लीटर पानी भंडारण क्षमता विकसित हुई है। पहली बारिश में सभी संरचनाएं भरने से भू-जल पुनर्भरण और जल उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।