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बेमेतरा
स्वास्थ्य संकट : डॉक्टरों की भारी कमी से बेमेतरा जिला अस्पताल बेहाल, मरीजों को लंबा इंतजार
बेमेतरा जिला अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट में हैं। करीब 50 स्वीकृत डॉक्टर पदों में सिर्फ 5 डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि 99 नर्सिंग पदों में से 44 नर्सें ही सेवाएं दे रही हैं। प्रतिदिन 600 से 800 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है।
राज्य सरकार
अलर्ट : जनस्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरा पहुंचाने वालों पर सख्ती, राज्यभर में होगी निगरानी
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने राज्य में अवैध रूप से स्क्रैप और प्रयुक्त बैटरियों के संग्रहण, भंडारण, परिवहन तथा व्यापार पर सख्ती बरतने की चेतावनी दी है। मंडल ने बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 के तहत सभी कारोबारियों को पंजीयन और वैधानिक प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार
समीक्षा : टीबी, मातृत्व और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर मुख्य सचिव ने दिए अहम निर्देश
मुख्य सचिव विकासशील ने मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत टीबी मुक्त भारत अभियान, बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की समीक्षा की। उन्होंने राज्यभर में टीबी जांच शिविर लगाने, मरीजों की शीघ्र पहचान व उपचार, पोषण सहायता की समय पर उपलब्धता तथा गर्भवती महिलाओं और बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बीजापुर
विशेष सत्र : डीआरजी जवानों को दिया गया मेडिटेशन और स्वास्थ्य का प्रशिक्षण
जिला मुख्यालय में ब्रह्मकुमारी आश्रम द्वारा डीआरजी जवानों के लिए मेडिटेशन एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रशिक्षकों ने जवानों को ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराते हुए मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक सोच के महत्व की जानकारी दी। साथ ही तनाव प्रबंधन, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के सुझाव भी दिए गए।
राष्ट्रीय
बिक्री पर सख्त रोक : अब बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं मिलेगी कफ सिरप दवा, स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा फैसला
केंद्र सरकार ने कफ सिरप और अन्य सिरप-आधारित दवाओं की ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने का नया नियम लागू किया है। अब इन दवाओं को केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही खरीदा जा सकेगा। इसका उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल, नशे की लत और स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना है।
राज्य सरकार
बड़ा अभियान : 13.85 लाख की आबादी तक पहुंचेगी स्वास्थ्य टीम, कुष्ठ रोग की होगी जांच
जिले में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 15 जून से 15 जुलाई 2026 तक सघन कुष्ठ खोज अभियान (एलसीडीसी) शुरू किया गया है। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लगभग 13.85 लाख लोगों की जांच करेंगी और संभावित मरीजों की पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराएंगी। सर्वे कार्य के लिए दो सदस्यीय दल गठित किए गए हैं, जिन्हें प्रशिक्षण एवं माइक्रोप्लान के तहत कार्य सौंपा गया है।
राज्य सरकार
स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण : सीईओ ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के दिए निर्देश
जिला पंचायत सीईओ हेमंत रमेश नंदनवार ने सरायपाली एवं बसना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी, टीकाकरण अभियान, टीबी मुक्त ग्राम पंचायत कार्यक्रम और मानसून पूर्व महामारी नियंत्रण की तैयारियों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
सेहत
फैटी लिवर : शरीर में पोषक तत्वों की कमी और कई स्वास्थ्य समस्याओं की बन सकती है वजह
मोटापा और बदलती जीवनशैली के कारण फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह समस्या केवल लीवर को ही नहीं, बल्कि शरीर में विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों के संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
सेहत
जल प्रदूषण की चुनौती : माइक्रोप्लास्टिक और फॉरएवर केमिकल्स से मानव स्वास्थ्य पर खतरा
माइक्रोप्लास्टिक, दवाओं के अवशेष और PFAS जैसे फॉरएवर केमिकल्स अब नदियों, भूजल और पेयजल स्रोतों में तेजी से पाए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये प्रदूषक मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए दीर्घकालिक खतरा बनते जा रहे हैं।
सारंगढ़-बिलाईगढ़
स्वास्थ्य विभाग : मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव, जिला प्रशासन ने कसी कमर
जिला स्वास्थ्य विभाग ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नई कार्ययोजना लागू की है। इसके तहत उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की समयपूर्व पहचान, शत-प्रतिशत पंजीयन, नियमित एएनसी जांच और ईडीडी ट्रैकिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों की रोकथाम हेतु अभियान चलाया जा रहा है और सभी स्वास्थ्य संस्थानों में जांच, दवा वितरण व रेफरल व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
महासमुंद
स्वास्थ्य संकट : ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, झलप PHC में डॉक्टर गायब
महासमुंद जिले के झलप स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो गई हैं। 80 गांवों की निर्भरता वाले इस 20 बिस्तरों के अस्पताल में वर्तमान में न डॉक्टर हैं और न ही आरएमए, जिससे मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार के बाद अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है।
राज्य सरकार
अभियान : उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित
महासमुंद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूरे होने पर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। इस अवसर पर गोसइया सम्मेलन में महिलाओं और उनके परिवारजनों को सुरक्षित मातृत्व, उच्च जोखिम गर्भावस्था और मातृ मृत्यु दर घटाने के उपायों के बारे में जागरूक किया गया।