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धर्म
Shani Dosh Relief: हनुमान जी को मंगलवार और शनिवार क्यों हैं प्रिय, जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता
Shani Dosh Relief: मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मंगलवार को बजरंगबली की आराधना साहस, शक्ति और आत्मविश्वास से जुड़ी है, जबकि शनिवार को शनि के प्रतिकूल प्रभावों से राहत पाने के लिए उनकी पूजा की जाती है। जानिए दोनों दिनों की मान्यताएं और पूजा के नियम।
यात्रा
बादलों से ऊपर महादेव : रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं के साथ शुरू हुई तुंगनाथ यात्रा, आस्था, एडवेंचर और हिमालय का अद्भुत संगम
उत्तराखंड का तुंगनाथ धाम, जो दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है, वर्ष 2026 में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। कपाट खुलने के शुरुआती 35 दिनों में ही करीब 47,000 भक्त दर्शन कर चुके हैं। चोपता से तुंगनाथ और चंद्रशिला तक का ट्रेक धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और एडवेंचर का अनूठा अनुभव प्रदान करता है।
धर्म
पद्मिनी एकादशी : हजारों वर्षों की तपस्या के बाद पूरी हुई मनोकामना
पद्मिनी एकादशी की पौराणिक कथा के अनुसार राजा कृतवीर्य और रानी पद्मिनी ने संतान प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की। माता अनुसूया की सलाह पर रानी ने पद्मिनी एकादशी व्रत रखा, जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पराक्रमी पुत्र कार्तवीर्य अर्जुन का वरदान दिया।
धर्म
अधिक मास : आध्यात्मिक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का पर्व है पद्मिनी एकादशी
पद्मिनी एकादशी को भगवान विष्णु और भगवान पुरुषोत्तम को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में आने वाली इस एकादशी पर विधि-विधान से पूजा, उपवास, दीपदान और मंत्र जाप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक संकट दूर होते हैं।
यात्रा
तुंगनाथ धाम : बादलों के बीच बसा वह दिव्य स्थान जहाँ प्रकट हुई थीं महादेव की भुजाएं
Tungnath Temple उत्तराखंड के हिमालय में स्थित भगवान शिव का एक अत्यंत पवित्र और ऊँचाई पर स्थित मंदिर है, जो लगभग 3,680 मीटर की ऊँचाई पर है। इसे पंच केदार में तीसरा केदार माना जाता है और यह विश्व के सबसे ऊँचे शिव मंदिरों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की खोज की थी। शिवजी ने बैल का रूप धारण किया और उनके शरीर के विभिन्न भाग पाँच स्थानों पर प्रकट हुए, जिनमें तुंगनाथ में उनकी भुजाएँ (हाथ) प्रकट हुई थीं। इसके साथ ही इस स्थान का संबंध रामायण काल की मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है और पास स्थित Chandrashila को भगवान राम के ध्यान स्थल के रूप में भी माना जाता है।