"भारतमाला परियोजना" के लिए 10 परिणाम मिले
रायपुर
Bharatmala Project Chhattisgarh: जशपुर से रायपुर का सफर अब होगा बेहद आसान, बदलेगी तस्वीर, घटेगा यात्रा का समय
Bharatmala Project Chhattisgarh: जशपुर जिले में भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण से कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। करीब 707 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर में लगभग 104 किलोमीटर हिस्सा जशपुर जिले से गुजरने की बात कही गई है। परियोजना पूरी होने पर रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और झारखंड तक आवागमन आसान हो सकता है। इससे व्यापार, कृषि, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
राज्य सरकार
Road Connectivity: जशपुर से रायपुर अब 6 घंटे में, भारतमाला कॉरिडोर से मिलेगी बड़ी राहत
Road Connectivity: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से गुजरने वाले भारतमाला परियोजना के रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण से सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। करीब 707 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का लगभग 104 किलोमीटर हिस्सा जशपुर जिले से होकर गुजरेगा।
राज्य सरकार
Jashpur News: पत्थलगांव-कुनकुरी NH निर्माण को मिली रफ्तार, 125 करोड़ से बनेगी 64 किमी सड़क
Jashpur News: जशपुर जिले की लंबे समय से अधूरी पत्थलगांव-कुनकुरी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को अब गति मिल गई है। करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से 64 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शुरू हो चुका है, जिसे 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नई निविदा प्रक्रिया के बाद निर्माण की जिम्मेदारी मेसर्स विनोद जैन कंस्ट्रक्शन कंपनी को दी गई है।
रायपुर
विवाद : एक्सप्रेस-वे की तस्वीरों पर बवाल, गुणवत्ता को लेकर घमासान
करीब 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे रायपुर–विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे पर उद्घाटन से पहले कथित दरारों की तस्वीरें सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर NHAI की कार्यशैली और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
धमतरी
ED का एक्शन : भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाले में अब धमतरी के बड़े ठेकेदार दीपेश गांधी के घर दबिश, खंगाले जा रहे हैं दस्तावेज़
छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए धमतरी के ठेकेदार दीपेश गांधी के आवास पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई बहुचर्चित भारतमाला परियोजना से जुड़े ₹43 करोड़ से अधिक के जमीन मुआवजा घोटाले की जांच का हिस्सा बताई जा रही है।
जांजगीर-चांपा
पुलिस का बड़ा एक्शन : 96 वाहन चालकों पर कार्रवाई, लाइसेंस निलंबन की तैयारी
जांजगीर-चांपा पुलिस ने निर्माणाधीन भारतमाला मार्ग पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 96 वाहन चालकों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडे के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान में नियम तोड़ने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
रायपुर
जमीन घोटाला : जेल में बंद रिटायर्ड IAS जेके ध्रुव के निवास समेत 3 ठिकानों पर ED की बड़ी दबिश
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारतमाला परियोजना के तहत कथित मुआवजा घोटाले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए रिटायर्ड IAS अधिकारी जेके ध्रुव के भिलाई स्थित आवास समेत तीन ठिकानों पर छापा मारा। जांच एजेंसी करोड़ों रुपये के भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले, डिजिटल साक्ष्यों और मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
राज्य सरकार
समीक्षा बैठक : 2027 तक सभी LWE सड़क परियोजनाएं पूर्ण करने के निर्देश
लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने नवा रायपुर स्थित निर्माण भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी स्वीकृत कार्यों की निविदा 30 जून तक और कार्यादेश 31 जुलाई तक जारी करने के निर्देश दिए, ताकि वर्षा ऋतु के बाद निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो सकें।
छत्तीसगढ़
भारतमाला प्रोजेक्ट : जमीन मुआवजा घोटाले में ईडी का बड़ा एक्शन, कारोबारी गोपाल गांधी के ठिकानों पर छापेमारी
ईडी ने भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित 500 करोड़ रुपये के जमीन मुआवजा घोटाले में जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनके करीबियों के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच में आरोप है कि रायपुर–विशाखापत्तनम कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान कुछ अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से कृषि जमीनों को पुरानी तारीखों में गैर-कृषि दिखाकर ज्यादा मुआवजा लिया गया। साथ ही, जमीनों को छोटे टुकड़ों में बांटकर फर्जी तरीके से भुगतान लेने के भी आरोप हैं।
छत्तीसगढ़
बस्तर के लिए खुलेगा वैश्विक द्वार : 4 घंटे में समुद्र तक, बदलेगी विकास की तस्वीर
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD) बस्तर के लिए विकास की नई राह खोलने जा रहा है। इस 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जगदलपुर से विशाखापट्टनम की दूरी घटकर मात्र 3.5 से 4 घंटे रह जाएगी। इससे बस्तर सीधे समुद्री बंदरगाह और वैश्विक व्यापार नेटवर्क से जुड़ जाएगा। परियोजना के जरिए परिवहन लागत में कमी आएगी और बस्तर की कॉफी, इमली, महुआ उत्पाद व ढोकरा शिल्प जैसे स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर दाम मिलेंगे।