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आर्टेमिस-2 मिशन : एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा के डार्क साइड पर इतिहास रचने के लिए तैयार NASA

नासा का आर्टेमिस-2 मिशन एक ऐतिहासिक कदम है, जिसमें चार एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा के दूर वाले हिस्से, यानी डार्क साइड, पर स्थित ओरिएंटेल बेसिन के विशाल गड्ढे को पहली बार अपनी आंखों से देखेंगे। यह गड्ढा 38 अरब साल पहले एक विशाल एस्टरॉयड के टकराने से बना था। आर्टेमिस-2 मिशन, जो 1 अप्रैल को लॉन्च हुआ, पृथ्वी से सबसे दूर इंसान को भेजने का रिकॉर्ड स्थापित करेगा और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करेगा। मिशन के दौरान, एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा की सतह के 30 जगहों की जानकारी और तस्वीरें लेंगे, जो भविष्य के मानव चंद्रमा मिशनों (आर्टेमिस-3) और मंगल ग्रह पर यात्रा की राह तैयार करेंगे।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 06 Apr 2026, 07:11 PM · अपडेट: 18 Sep 2026, 03:31 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
नासा का आर्टेमिस-2 मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने जा रहा है। इस मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा के डार्क साइड (दूर वाले हिस्से) पर स्थित ओरिएंटेल बेसिन के विशाल गड्ढे को अपनी आंखों से देखेंगे। यह गड्ढा लगभग 965 किलोमीटर चौड़ा है और 38 अरब साल पहले एक विशाल एस्टरॉयड के टकराने से बना था। इस गड्ढे का आकार और संरचना चंद्रमा पर सबसे बड़ा और सबसे अच्छे तरीके से बचा हुआ मल्टी-रिंग बेसिन है। पहले इसे केवल रोबोट स्पेसक्राफ्ट द्वारा ली गई तस्वीरों से देखा गया था, लेकिन अब आर्टेमिस-2 मिशन के एस्ट्रोनॉट्स इसे पूरी तरह से अपनी आंखों से देखेंगे, जो नासा के लिए एक ऐतिहासिक पल है।
मिशन की प्रमुख घटनाएं
आर्टेमिस-2 मिशन का उद्देश्य सिर्फ चंद्रमा की यात्रा करना नहीं है, बल्कि यह चंद्रमा पर भविष्य में इंसान की लैंडिंग (आर्टेमिस-3) और मंगल ग्रह पर यात्रा की राह तैयार करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस मिशन के दौरान, एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा के 30 स्थानों की जानकारी और तस्वीरें लेंगे, जो भविष्य में चंद्रमा और मंगल मिशनों के लिए आधार तैयार करेंगी।
मिशन की शुरुआत 1 अप्रैल को फ्लोरिडा से हुई थी, जब ओरियन स्पेसक्राफ्ट को लॉन्च किया गया। इसके बाद, एस्ट्रोनॉट्स ने पहले 25 घंटे पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाए और पृथ्वी की खूबसूरत तस्वीरें लीं। अब वे चंद्रमा की ओर बढ़ रहे हैं और 6 अप्रैल को चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। मिशन के दौरान, ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के बहुत करीब से गुजरेगा, लेकिन पूरा चक्कर नहीं लगाएगा। यह एक फ्लाई-बाय मिशन होगा, जिसमें एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा के डार्क साइड को देखेंगे और उसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र करेंगे।
मिशन का महत्व
आर्टेमिस-2 मिशन का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यह 1972 के अपोलो-17 मिशन के बाद इंसानों द्वारा किया गया सबसे दूर का अंतरिक्ष यात्रा होगा। यह मिशन पृथ्वी से लगभग 4 लाख किलोमीटर दूर तक जाएगा, जो इंसानों द्वारा सबसे अधिक दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा। इस मिशन के दौरान, एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा की सतह के पास से गुजरते हुए उसकी स्थिति, संरचना और विभिन्न स्थानों के बारे में जानकारी लेंगे। यह डेटा भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की लैंडिंग और मंगल ग्रह पर यात्रा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
ओरिएंटेल बेसिन
चंद्रमा का ओरिएंटेल बेसिन चंद्रमा के सबसे पुराने और सबसे बड़े बेसिनों में से एक है। यह गड्ढा 965 किलोमीटर चौड़ा है और तीन बड़े घेरे से बना हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 38 अरब साल पहले एक विशाल एस्टरॉयड चंद्रमा से टकराया था, जिससे लाखों क्यूबिक मील चट्टान पिघल गई और आकाश में उछल गई। इसके बाद यह सामग्री वापस गिरकर दो घंटे तक इधर-उधर हिलती रही और अंत में तीन घेरे बना दिए। यह गड्ढा चंद्रमा पर सबसे युवा बेसिनों में से एक है और पृथ्वी पर इतने बड़े और घेरों वाले गड्ढे का कोई उदाहरण नहीं मिलता।
भविष्य की तैयारियां
आर्टेमिस-2 मिशन केवल एक ऐतिहासिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की लैंडिंग और मंगल ग्रह पर यात्रा की तैयारी भी है। नासा ओरियन स्पेसक्राफ्ट का परीक्षण कर रहा है, ताकि यह समझ सके कि यह अंतरिक्ष यान लंबी यात्रा के दौरान कितना सुरक्षित और प्रभावी है। मिशन के एस्ट्रोनॉट्स – कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और कनाडाई एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसन – इस मिशन को सफलता से पूरा करने के लिए तत्पर हैं।
यह मिशन नासा के अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर मानवता के कदम रखने के सपने को साकार करने में मदद करेगा। आर्टेमिस-2 मिशन, केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि अंतरिक्ष के अनजाने हिस्सों की खोज और मानवता के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलने का एक प्रयास है।

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