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संकट का साया : क्या 1 मई से महंगी हो जाएगी रसोई गैस? सप्लाई चेन और नए नियमों पर बड़ी खबर

मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण LPG (रसोई गैस) की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 1 मई को दाम बढ़ सकते हैं, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। वैश्विक सप्लाई पर असर, खासकर Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण तेल-गैस मार्ग के कारण कीमतों पर दबाव बताया जा रहा है, भारत सरकार के अनुसार देश में LPG का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, कीमतों में बदलाव हर महीने समीक्षा के आधार पर हो सकता है, लेकिन अभी बढ़ोतरी निश्चित नहीं है

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
28 Apr 2026, 11:11 AM
नई दिल्ली

मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की कमर तोड़ दी है। फरवरी से भड़की जंग के शांत होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं, जिसका सीधा असर अब भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों और वितरण प्रणाली पर पड़ता दिख रहा है। 1 मई की तारीख गैस उपभोक्ताओं के लिए काफी अहम मानी जा रही है।

कीमतों में उछाल की आशंका: 1 मई पर टिकी निगाहें

आमतौर पर सरकारी तेल और गैस कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडरों के दामों की समीक्षा करती हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय से यह उतार-चढ़ाव मामूली रहा है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि 1 मई से घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़ सकते हैं।

इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:

  1. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट: यह वह समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया भर में तेल और गैस की सबसे अधिक सप्लाई होती है। इस रास्ते के बाधित होने से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।

  2. चुनावी समीकरण: माना जा रहा है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनावों के संपन्न होने के बाद कीमतों में जो स्थिरता बनी हुई थी, उसमें अब बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

सप्लाई पर सरकार का रुख और होर्मुज का संकट

मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गैस की कमी की चर्चा है, लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद, होर्मुज का रास्ता बंद होने से लागत में वृद्धि हुई है, जिसका भार कंपनियों को उठाना पड़ रहा है। यदि यह तनाव और खिंचता है, तो भविष्य में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

बुकिंग नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

सप्लाई को नियंत्रित करने और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार बुकिंग नियमों को और सख्त करने पर विचार कर रही है। वर्तमान में लागू 'रिफिल गैप' नियमों को कुछ और समय तक स्थायी रखा जा सकता है।

  • शहरी क्षेत्र: दो सिलेंडरों की बुकिंग के बीच 25 दिनों का अंतर अनिवार्य है।

  • ग्रामीण क्षेत्र: दो रिफिल के बीच 45 दिनों की समयसीमा तय की गई है।

महत्वपूर्ण नोट: इन नियमों का मुख्य उद्देश्य गैस की राशनिंग करना है ताकि सीमित संसाधनों में सभी उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंच सके। फिलहाल उपभोक्ताओं को नियमों में किसी बड़ी ढील की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

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