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Dheewar’s family making Durga idols (Image Source: Keertiman Media)
Dheewar’s family making Durga idols (Image Source: Keertiman Media)
रायपुर संभाग

Arang News: 36 वर्षों की साधना और 12 हाथों का हुनर, 31 दुर्गा प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटा नारायण का परिवार

Arang News: आरंग के ग्राम नारा में मूर्तिकार नारायण धीवर अपने परिवार के 12 सदस्यों के साथ नवरात्रि के लिए 31 दुर्गा प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। 36 वर्षों के अनुभव के साथ उनका परिवार पारंपरिक मूर्तिकला को सहेजने में जुटा है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 10 Oct 2026, 08:28 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Arang News: शारदीय नवरात्रि नजदीक आते ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम तेज हो गया है। आरंग के समीप ग्राम नारा में मूर्तिकार नारायण धीवर और उनका परिवार इन दिनों दिन-रात मेहनत कर रहा है। 56 वर्षीय नारायण अपने परिवार के 12 सदस्यों के साथ 31 दुर्गा प्रतिमाओं को तैयार करने में जुटे हैं, जिन्हें नवरात्रि के दौरान अलग-अलग पूजा पंडालों में स्थापित किया जाएगा।

20 साल की उम्र में शुरू किया था मूर्तियां बनाने का काम 

नारायण धीवर ने महज 20 साल की उम्र में मूर्तिकला की शुरुआत की थी। पिछले 36 वर्षों से वे इस कला से जुड़े हुए हैं। इतने लंबे अनुभव के कारण प्रतिमाओं को आकार देने से लेकर उनके चेहरे की बारीकियों को उकेरने तक, उनके काम में खास निपुणता दिखाई देती है। उनके लिए मूर्तियां बनाना केवल रोजी-रोटी का जरिया नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ी साधना है। इस साल नवरात्रि से करीब एक महीने पहले उन्हें 31 दुर्गा प्रतिमाएं बनाने का काम मिला। तय समय पर सभी प्रतिमाओं को तैयार कर पूजा समितियों तक पहुंचाना बड़ी जिम्मेदारी थी। इसे पूरा करने के लिए उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को काम में लगाया।

परिवार के 12 सदस्य मिलकर कर रहे मेहनत 

नारायण धीवर के घर में इन दिनों सुबह से देर रात तक काम चल रहा है। परिवार के युवा सदस्य बांस और पुआल से प्रतिमाओं का ढांचा तैयार करने, मिट्टी गूंथने और उन्हें आकार देने में जुटे हैं। वहीं, महिलाएं प्रतिमाओं को वस्त्र पहनाने, मुकुट सजाने और गोटा-किनारी व आभूषण लगाने का काम संभाल रही हैं। नारायण खुद प्रतिमाओं के चेहरे को अंतिम रूप देने के साथ आंखें बनाने जैसे बारीक काम में लगे हुए हैं। मूर्तिकला में नेत्र निर्माण को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे प्रतिमा के चेहरे की अभिव्यक्ति और आकर्षण निखरकर सामने आता है। जैसे-जैसे नवरात्रि में स्थापना का समय करीब आ रहा है, प्रतिमाओं की सजावट भी पूरी होती जा रही है। आकर्षक वस्त्रों, मुकुट और अस्त्र-शस्त्रों से सजी दुर्गा प्रतिमाएं अब अपने अंतिम स्वरूप में नजर आने लगी हैं।

प्रतिमा की आंखें बनते ही दूर हो जाती है थकान 

नारायण धीवर के लिए सबसे संतोषजनक पल वह होता है, जब प्रतिमा का चेहरा पूरी तरह तैयार हो जाता है और आंखें बनाने का काम पूरा होता है। उनके मुताबिक, इस एक पल में महीने भर की मेहनत और शारीरिक थकान जैसे भूल जाती है। मां दुर्गा के प्रति उनकी आस्था ही परिवार के सभी सदस्यों को लगातार मेहनत करने की प्रेरणा देती है। 

पारंपरिक मूर्तिकला को सहेज रहा परिवार 

बाजार में अलग-अलग तरह की तैयार प्रतिमाओं के बीच नारायण धीवर का परिवार पारंपरिक तरीके से मिट्टी की प्रतिमाएं बनाने में जुटा है। प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक शिल्प को महत्व देते हुए परिवार अपनी कला और स्थानीय परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। नवरात्रि से पहले शनिवार की सुबह विभिन्न पूजा समितियों के प्रतिनिधियों के प्रतिमाएं लेने पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद ग्राम नारा में तैयार हुई मां दुर्गा की प्रतिमाएं आरंग क्षेत्र के अलग-अलग पंडालों में स्थापित की जाएंगी। नारायण धीवर और उनके परिवार की एक महीने की मेहनत इन प्रतिमाओं के जरिए श्रद्धालुओं की आस्था का हिस्सा बनेगी।
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