Arang News: शारदीय नवरात्रि नजदीक आते ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम तेज हो गया है। आरंग के समीप ग्राम नारा में मूर्तिकार नारायण धीवर और उनका परिवार इन दिनों दिन-रात मेहनत कर रहा है। 56 वर्षीय नारायण अपने परिवार के 12 सदस्यों के साथ 31 दुर्गा प्रतिमाओं को तैयार करने में जुटे हैं, जिन्हें नवरात्रि के दौरान अलग-अलग पूजा पंडालों में स्थापित किया जाएगा।
20 साल की उम्र में शुरू किया था मूर्तियां बनाने का काम
नारायण धीवर ने महज 20 साल की उम्र में मूर्तिकला की शुरुआत की थी। पिछले 36 वर्षों से वे इस कला से जुड़े हुए हैं। इतने लंबे अनुभव के कारण प्रतिमाओं को आकार देने से लेकर उनके चेहरे की बारीकियों को उकेरने तक, उनके काम में खास निपुणता दिखाई देती है। उनके लिए मूर्तियां बनाना केवल रोजी-रोटी का जरिया नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ी साधना है। इस साल नवरात्रि से करीब एक महीने पहले उन्हें 31 दुर्गा प्रतिमाएं बनाने का काम मिला। तय समय पर सभी प्रतिमाओं को तैयार कर पूजा समितियों तक पहुंचाना बड़ी जिम्मेदारी थी। इसे पूरा करने के लिए उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को काम में लगाया।
परिवार के 12 सदस्य मिलकर कर रहे मेहनत
नारायण धीवर के घर में इन दिनों सुबह से देर रात तक काम चल रहा है। परिवार के युवा सदस्य बांस और पुआल से प्रतिमाओं का ढांचा तैयार करने, मिट्टी गूंथने और उन्हें आकार देने में जुटे हैं। वहीं, महिलाएं प्रतिमाओं को वस्त्र पहनाने, मुकुट सजाने और गोटा-किनारी व आभूषण लगाने का काम संभाल रही हैं। नारायण खुद प्रतिमाओं के चेहरे को अंतिम रूप देने के साथ आंखें बनाने जैसे बारीक काम में लगे हुए हैं। मूर्तिकला में नेत्र निर्माण को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे प्रतिमा के चेहरे की अभिव्यक्ति और आकर्षण निखरकर सामने आता है। जैसे-जैसे नवरात्रि में स्थापना का समय करीब आ रहा है, प्रतिमाओं की सजावट भी पूरी होती जा रही है। आकर्षक वस्त्रों, मुकुट और अस्त्र-शस्त्रों से सजी दुर्गा प्रतिमाएं अब अपने अंतिम स्वरूप में नजर आने लगी हैं।प्रतिमा की आंखें बनते ही दूर हो जाती है थकान
नारायण धीवर के लिए सबसे संतोषजनक पल वह होता है, जब प्रतिमा का चेहरा पूरी तरह तैयार हो जाता है और आंखें बनाने का काम पूरा होता है। उनके मुताबिक, इस एक पल में महीने भर की मेहनत और शारीरिक थकान जैसे भूल जाती है। मां दुर्गा के प्रति उनकी आस्था ही परिवार के सभी सदस्यों को लगातार मेहनत करने की प्रेरणा देती है।







