जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल ट्रकों से करोड़ों रुपए की गैस गायब होने के मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस का दावा है कि जब्त किए गए गैस कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की प्रक्रिया की आड़ में गैस निकालने और उसकी अवैध बिक्री की पूरी योजना तैयार की गई थी। मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में एलपीजी गैस से भरे छह कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया गया था। इन ट्रकों में बड़ी मात्रा में एलपीजी भरी हुई थी। बाद में भीषण गर्मी और सुरक्षा कारणों को देखते हुए कलेक्टर कार्यालय की ओर से खाद्य विभाग को इन वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए गए।
LPG से भरे 6 कैप्सूल ट्रक
पुलिस जांच में दावा किया गया है कि इसी प्रक्रिया के दौरान गैस के गबन की योजना तैयार की गई। जब्त वाहनों को दूसरी जगह ले जाने की प्रशासनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल गैस निकालने और बाद में उसकी बिक्री के लिए किए जाने की बात जांच में सामने आई है। जांच के दौरान पुलिस को 23 मार्च 2026 को आरंग स्थित एक ढाबे में हुई बैठक की जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक, इस बैठक में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर समेत अन्य लोग शामिल हुए थे। आरोप है कि इसी बैठक के बाद जब्त कैप्सूल ट्रकों में मौजूद एलपीजी को लेकर आगे की योजना बनाई गई। इसके तीन दिन बाद 26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर सिंघोड़ा थाना पहुंचे, जहां कैप्सूल ट्रकों में भरी गैस की मात्रा का आकलन किया गया।
102 से 105 मीट्रिक टन LPG
पुलिस इस घटनाक्रम को पूरे मामले की अहम कड़ी मान रही है। पुलिस जांच के मुताबिक, छह कैप्सूल ट्रकों में लगभग 102 से 105 मीट्रिक टन एलपीजी गैस मौजूद थी। आरोप है कि गैस की मात्रा का आकलन किए जाने के बाद उसी रात रायपुर की विभिन्न एजेंसियों से संपर्क किया गया। इसके बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ करीब 80 लाख रुपए में सौदा तय होने की बात पुलिस जांच में सामने आई। पुलिस अब इस सौदे से जुड़े वित्तीय लेन-देन, संबंधित लोगों के बीच हुई बातचीत और गैस की आगे की सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।अभनपुर प्लांट पहुंचे अधिकारी
पुलिस के अनुसार, 30 मार्च को खाद्य विभाग के अधिकारी अविनाश दुबे, हरिश सोनेश्वरी और मनीष यादव, ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स संचालक संतोष ठाकुर को साथ लेकर सिंघोड़ा थाना पहुंचे। यहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद छह गैस कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामे पर लिया गया और उन्हें अभनपुर स्थित प्लांट ले जाया गया। जांच में पुलिस इस बात पर विशेष ध्यान दे रही है कि ट्रकों को सिंघोड़ा से अभनपुर ले जाते समय उनमें मौजूद गैस का तत्काल वजन क्यों नहीं कराया गया और इस प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
रास्ते में 15 से ज्यादा धर्मकांटे
पुलिस जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल कैप्सूल ट्रकों की समय पर तौल नहीं कराए जाने को लेकर उठा है। पुलिस के मुताबिक, सिंघोड़ा से अभनपुर के बीच करीब 200 किलोमीटर के रास्ते में 15 से अधिक धर्मकांटे मौजूद थे, इसके बावजूद किसी भी स्थान पर इन वाहनों का वजन नहीं कराया गया। पुलिस का आरोप है कि ऐसा जानबूझकर किया गया, ताकि पहले गैस निकाली जा सके और उसके बाद ट्रकों की तौल कराई जाए। यही तथ्य जांच में कथित गबन की योजना को समझने में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आया है।
प्लांट से 200 मीटर दूर खड़े थे कैप्सूल ट्रक
पुलिस के अनुसार, अभनपुर पहुंचने के बाद छह कैप्सूल ट्रकों को प्लांट से करीब 200 मीटर दूर पार्किंग क्षेत्र में खड़ा किया गया था। इसके बाद तत्काल वजन कराने के बजाय कई दिनों का अंतर रखा गया। जांच में सामने आया कि पांच कैप्सूल ट्रकों का वजन 6 अप्रैल को कराया गया, जबकि अंतिम ट्रक की तौल 8 अप्रैल को हुई। पुलिस का दावा है कि तब तक ट्रकों से अधिकांश गैस निकाली जा चुकी थी। तौल में हुई इस देरी और उस दौरान कैप्सूल ट्रकों की गतिविधियों को लेकर पुलिस ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए हैं।47 टन गैस खरीदी
दस्तावेजों की जांच में एलपीजी की कालाबाजारी से जुड़ा एक और बड़ा अंतर सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, रिकॉर्ड में अप्रैल माह के दौरान ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स द्वारा केवल 47 टन एलपीजी की वैध खरीदी दर्ज मिली, जबकि इसी अवधि में करीब 107 टन गैस की बिक्री दर्शाई गई। इस हिसाब से करीब 60 टन एलपीजी की ऐसी बिक्री सामने आई, जिसके मुकाबले वैध खरीदी का रिकॉर्ड नहीं मिला। पुलिस इस अंतर को मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य मान रही है और खरीद-बिक्री के पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।