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Chhattisgarh school books crisis (Image Source: Keertiman Media)
Chhattisgarh school books crisis (Image Source: Keertiman Media)
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CG Education News: स्कूलों में 92 हजार किताबों की कमी, तिमाही परीक्षा के बीच छात्र परेशान

CG Education News: जिले के स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के कई महीने बाद भी सभी विद्यार्थियों तक पाठ्य पुस्तकें नहीं पहुंच पाई हैं। स्थिति यह है कि अब तक स्कूलों में 92 हजार से अधिक किताबों की कमी बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक की तिमाही परीक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं। ऐसे समय में छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा की तैयारी को लेकर खड़ी हो गई है।

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प्रकाशित: 26 Sep 2026, 02:25 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
CG Education News: जिले के स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के कई महीने बाद भी सभी विद्यार्थियों तक पाठ्य पुस्तकें नहीं पहुंच पाई हैं। स्थिति यह है कि अब तक स्कूलों में 92 हजार से अधिक किताबों की कमी बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक की तिमाही परीक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं। ऐसे समय में छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा की तैयारी को लेकर खड़ी हो गई है। कई विद्यार्थी जरूरी किताबों के अभाव में अधूरी सामग्री के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी पढ़ाई की गुणवत्ता और परीक्षा परिणाम पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति में देरी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर दिखाई दे रहा है। जिन विद्यार्थियों को नई किताबें नहीं मिल पाई हैं, वे पुराने सत्र की पुस्तकों से पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं कई छात्र अपने सहपाठियों से किताबें लेकर नोट्स तैयार कर रहे हैं या फिर जरूरी अध्यायों की फोटोकॉपी करवाकर पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।  

डिपो पास होने के बावजूद स्कूलों तक पहुंचने में लग रहा समय

सबसे हैरानी की बात यह है कि बिलासपुर शहर से करीब 14 किलोमीटर दूर गतौरी में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम का डिपो मौजूद है। इसके बावजूद स्कूलों तक किताबों की सप्लाई की रफ्तार धीमी बनी हुई है। जानकारी के अनुसार डिपो से किताबें निकलने के बाद उन्हें स्कूलों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में दो से तीन सप्ताह तक का समय लग रहा है। इस देरी के कारण कई स्कूलों में अभी भी विद्यार्थियों को पूरी किताबें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में किताबें पहुंचने के बाद भी उन्हें छात्रों तक वितरित करने और सभी कक्षाओं के अनुसार व्यवस्था करने में समय लगता है।  

तिमाही परीक्षा शुरू होने के बाद व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

स्कूलों में तिमाही परीक्षाओं का आयोजन शुरू हो चुका है। ऐसे में बिना पूरी किताबों के छात्रों की तैयारी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा से पहले सभी विषयों की पुस्तकें उपलब्ध होनी चाहिए थीं, ताकि बच्चे बेहतर तरीके से तैयारी कर सकें। शिक्षाविदों का मानना है कि पाठ्य पुस्तकों की समय पर उपलब्धता शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है। किताबें नहीं होने से छात्रों को विषय समझने, अभ्यास करने और दोहराव करने में परेशानी होती है। ऐसे में जल्द से जल्द सभी स्कूलों में किताबों की कमी दूर करना जरूरी है।

मुंगेली और सक्ती से मंगाई गईं अतिरिक्त किताबें, फिर भी बनी हुई है कमी

पाठ्य पुस्तकों की कमी को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने दूसरे जिलों से भी किताबों की व्यवस्था करने की कोशिश की। इसके तहत मुंगेली और सक्ती जिलों से अतिरिक्त पुस्तकों को मंगाया गया, ताकि जिन स्कूलों में कमी है वहां छात्रों को किताबें उपलब्ध कराई जा सकें। हालांकि, जरूरत के मुकाबले उपलब्ध किताबों की संख्या कम होने के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। कई स्कूलों में अभी भी कुछ विषयों की किताबें उपलब्ध नहीं हैं। खासकर उन कक्षाओं में परेशानी ज्यादा सामने आ रही है जहां विषयों की संख्या अधिक है और छात्रों को अलग-अलग पुस्तकों की आवश्यकता होती है। 

शिक्षा विभाग ने जल्द आपूर्ति पूरी करने का दिया भरोसा

वहीं शिक्षा विभाग का कहना है कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूलों में उपलब्ध बुक बैंक की किताबों का उपयोग कराया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार तिमाही परीक्षाओं पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा और जिन स्कूलों में किताबों की कमी है, वहां जल्द ही आपूर्ति पूरी कर दी जाएगी। विभाग ने बताया कि किताबों की मांग और उपलब्धता की लगातार समीक्षा की जा रही है।  
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