CG Education: प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया अभियान के तहत स्कूली बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और ही नजर आ रही है। जिले में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से चार सरकारी स्कूलों में तैयार किए गए डिजिटल क्लासरूम अब तक अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाए हैं। जिला खनिज न्यास (DMF) मद से इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था तो कर दी गई, लेकिन उनके नियमित संचालन के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए गए।
चार सरकारी स्कूलों में स्थापित किए गए स्मार्ट क्लासरूम
जिले के चार हायर सेकेंडरी स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम स्थापित किए गए हैं। इनमें ग्राम भर्रीटोला, दनगढ़, गोटाटोला और कौड़ीकसा के सरकारी स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को तकनीक आधारित पढ़ाई उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टीवी स्क्रीन, डिजिटल उपकरण और अन्य जरूरी सुविधाएं जुटाई गई थीं।
डिजिटल पढ़ाई की उम्मीद लगाए बैठे विद्यार्थियों को निराशा
भर्रीटोला स्कूल में डिजिटल क्लासरूम बनाए जाने से विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि अब उन्हें भी आधुनिक तकनीक के माध्यम से पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। लेकिन व्यवस्था शुरू नहीं होने के कारण उनकी यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। स्कूल में स्मार्ट क्लास के लिए संसाधन मौजूद होने के बावजूद उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।दनगढ़ और गोटाटोला में इंटरनेट की समस्या
भर्रीटोला के अलावा दनगढ़ और गोटाटोला के हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी डिजिटल क्लासरूम के संचालन में कई तरह की परेशानियां सामने आई हैं। इन दोनों स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन की व्यवस्था तो की गई है, लेकिन शिक्षकों को डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल और उनके माध्यम से पढ़ाने का कोई व्यवस्थित प्रशिक्षण नहीं दिया गया।
कौड़ीकसा में एक घंटे की ट्रेनिंग के भरोसे स्मार्ट क्लास
चारों स्कूलों में कौड़ीकसा हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थिति कुछ बेहतर जरूर है। यहां डिजिटल क्लासरूम के उपकरण लगाने वाली कंपनी ने शिक्षकों को करीब एक घंटे का प्रशिक्षण दिया था। इसके बाद स्थानीय शिक्षक उपलब्ध संसाधनों के जरिए विद्यार्थियों को पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।शिक्षा समिति सभापति ने उठाए सवाल
डिजिटल क्लासरूम की बदहाल स्थिति को लेकर मानपुर जनपद पंचायत की शिक्षा समिति के सभापति देवानंद कौशिक ने भी नाराजगी जताई है। उन्होंने भर्रीटोला स्कूल में बिना उपयोग के पड़े उपकरणों को डीएमएफ फंड का दुरुपयोग बताते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब डिजिटल शिक्षा के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च की गई है तो उसके संचालन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।







