CG News: पंचायत जनप्रतिनिधि संघ ने प्रदेश में पंचों और सरपंचों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग उठाई है। संघ के प्रदेश संयोजक अनिल कुमार ने कहा कि वर्तमान में पंचों को प्रतिदिन के हिसाब से करीब 16 रुपए और सरपंचों को लगभग 133 रुपए मानदेय मिलता है। वहीं, मनरेगा मजदूरों को प्रतिदिन 300 रुपए दिए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पंचों का मानदेय मनरेगा मजदूरों के बराबर किया जाए, जबकि सरपंचों को प्रतिदिन एक हजार रुपए मानदेय दिया जाए। उनका कहना है कि इससे पंचायत प्रतिनिधि आर्थिक रूप से मजबूत होंगे और सम्मान के साथ अपने गांव के विकास कार्यों में योगदान दे सकेंगे।
पंचायत प्रतिनिधियों के लिए सुरक्षा कानून और 10 लाख के बीमा की मांग
प्रदेश संयोजक ने पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई जगह सरपंचों और पंचों के साथ मारपीट की घटनाएं होती हैं। सुरक्षा कानून नहीं होने के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा पंचायत प्रतिनिधियों के लिए बीमा की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में किसी हादसे या अनहोनी की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती।
50 लाख तक के निर्माण कार्य पंचायतों को सौंपने की मांग
पंचायत जनप्रतिनिधि संघ ने ग्राम पंचायतों को निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी देने की भी मांग की है। संघ के अध्यक्ष का कहना है कि ग्राम पंचायतों को निर्माण एजेंसी के रूप में जाना जाता है, लेकिन वर्तमान में अधिकांश निर्माण कार्य ठेके के माध्यम से कराए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि 50 लाख रुपए तक के निर्माण कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपे जाएं, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिल सके और पंचायतें अधिक सशक्त बन सकें।अपर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचेगी मांग
अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों ने अपर कलेक्टर अनिल सिदार को ज्ञापन सौंपा। अपर कलेक्टर ने बताया कि सरपंच संघ के प्रतिनिधि पंचायत सुरक्षा कानून लागू करने, प्रत्येक ग्राम पंचायत को विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रुपए का बजट देने और ग्राम सभा, हॉल व सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग लेकर पहुंचे थे। इसके साथ ही 50 लाख रुपए तक के निर्माण कार्यों के लिए ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाने, मानदेय बढ़ाने और बीमा सुरक्षा देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी
पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निर्णय लेने की अपील की है। अपर कलेक्टर अनिल सिदार ने बताया कि ज्ञापन को वरिष्ठ कार्यालय भेजा जाएगा। इन मांगों पर आगे नीतिगत स्तर पर फैसला लिया जाएगा। वहीं, पंचायत प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।







