Balrampur News: उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ धान लेकर आ रहे एक व्यापारी का वाहन छोड़ने के बदले एक लाख रुपए रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। मामला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर का है, जहां एसडीएम तुलसी राम मरकाम और तहसीलदार अश्विनी चंद्रा की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
व्यापारी हरिओम गुप्ता ने दोनों अधिकारियों पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। अपने दावों के समर्थन में उसने लेनदेन का वीडियो और अधिकारियों के साथ बातचीत का ऑडियो भी सार्वजनिक किया है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। कलेक्टर संजय चंदन त्रिपाठी ने प्रकरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश से धान लेकर आ रहा था व्यापारी
व्यापारी हरिओम गुप्ता के अनुसार, वह उत्तर प्रदेश के बभनी से अपने पिकअप वाहन में धान लोड कर छत्तीसगढ़ आ रहा था। इसी दौरान प्रदेश की सीमा पर मंडी बोर्ड के बैरियर में उससे शुल्क के नाम पर 1,200 रुपए लिए गए। इसके बाद वाहन आरटीओ चेकपोस्ट पहुंचा, जहां 53 हजार रुपए की मांग की गई।
व्यापारी का कहना है कि उसने 50 हजार रुपए देने की बात कही और नकदी लेने के लिए बभनी चला गया। जब वह रकम लेकर वापस लौटा, तब तक चेकपोस्ट से मामले की जानकारी तहसीलदार तक पहुंच चुकी थी। आरोप है कि इसके बाद तहसीलदार के कर्मचारी धुर्वे के माध्यम से 50 हजार रुपए लिए गए, हालांकि कुछ समय बाद यह रकम वापस कर दी गई।
वाहन छोड़ने के लिए मांगे एक लाख रुपए
हरिओम गुप्ता का आरोप है कि अगले दिन सुबह एसडीएम और तहसीलदार के बीच इस मामले को लेकर बातचीत हुई। इसके बाद पिकअप वाहन छोड़ने के एवज में एक लाख रुपए की मांग की गई। व्यापारी के मुताबिक, उसने यह रकम राजेश यादव नाम के व्यक्ति के माध्यम से दी। उसे आश्वासन दिया गया था कि पैसे मिलने के बाद वाहन छोड़ दिया जाएगा। हालांकि, व्यापारी का दावा है कि रकम देने के बावजूद उसकी गाड़ी थाने में खड़ी करा दी गई।
बाइक की डिक्की में रखवाई गई रिश्वत की रकम
इस मामले में व्यापारी की ओर से जारी किया गया एक वीडियो भी चर्चा में है। इसमें नकदी सीधे हाथ में लेने के बजाय बाइक की डिक्की में रखवाई जाती दिखाई दे रही है। व्यापारी का दावा है कि वीडियो में दिखाई गई रकम एक लाख रुपए है। इसके अलावा उसने एसडीएम के साथ हुई बातचीत का ऑडियो और वीडियो भी मीडिया के सामने रखा है। व्यापारी का कहना है कि बातचीत के दौरान वाहन छोड़ने का भरोसा दिया गया था, लेकिन चार से पांच दिन बीतने के बाद भी पिकअप वापस नहीं मिला। मामले में राजेश यादव का नाम भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि वह एसडीएम के गांव के आसपास का रहने वाला है और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। वह पूर्व में जिला पंचायत सदस्य भी रह चुका है।कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
मामले की शिकायत और वीडियो-ऑडियो सामने आने के बाद बलरामपुर कलेक्टर संजय चंदन त्रिपाठी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल एसडीएम तुलसी राम मरकाम, तहसीलदार अश्विनी चंद्रा और राजेश यादव पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच में वीडियो और ऑडियो की प्रमाणिकता, लेनदेन तथा धान से लदे वाहन को जब्त करने की प्रक्रिया की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। प्रशासनिक जांच के नतीजों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही है।







