Chandrashekhar Azad: उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद की कानूनी मुश्किलें काफी बढ़ती नजर आ रही हैं। करीब आठ साल पुराने एक आपराधिक मामले में गाजियाबाद की विशेष MP-MLA अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद अदालत में हाजिर न होने पर कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने उनकी संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला साल 2018 का है, जब गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र में आयोजित एक शादी समारोह में चंद्रशेखर आजाद अपने कुछ समर्थकों के साथ पहुंचे थे। आरोप है कि उनके साथ आए लोग हथियारों से लैस थे। कार्यक्रम के दौरान जब एक स्थानीय युवक ने वहां खुलेआम हथियार ले जाने पर आपत्ति जताई, तो कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि सांसद और उनके साथियों ने उस युवक के साथ कथित तौर पर मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित किसी तरह अपनी जान बचाकर साहिबाबाद थाने पहुंचा और चंद्रशेखर आजाद तथा उनके 15 अन्य सहयोगियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई और कोर्ट का कड़ा रुख
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 (मारपीट) और 305 (जोखिम भरा व्यवहार/चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामला अदालत में पहुंचा, लेकिन चंद्रशेखर आजाद लगातार सुनवाइयों से अनुपस्थित रहे। मामले में पैरवी कर रहे पक्ष का कहना है कि यह पहला मौका नहीं है जब कोर्ट ने सांसद के खिलाफ वारंट निकाला हो। इससे पहले भी कई बार गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं, लेकिन वे अदालत में पेश नहीं हुए।
गैर-जमानती वारंट जारी
लगातार हो रही गैरहाजिरी और अदालत की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए, पीड़ित पक्ष ने कोर्ट से सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई थी। गाजियाबाद की MP-MLA कोर्ट ने दलीलों और रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए सांसद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया और कानूनी प्रक्रिया के तहत संपत्ति जब्त (कुर्की) करने का आदेश दिया। इस अदालती आदेश के बाद क्षेत्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अब देखना होगा कि सांसद पक्ष इस पर क्या कानूनी कदम उठाता है।

