DAVV: कॉलेजों की संबद्धता बदलने और प्रशासनिक व्यवस्था के फेर में एक बार फिर छात्रों का भविष्य उलझ गया है। स्नातक (UG) की पढ़ाई पूरी करने का सपना देख रहे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) के करीब एक हजार से ज्यादा विद्यार्थियों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन छात्रों की आगामी परीक्षाएं कराने में हाथ खड़े कर दिए हैं। अब इन सभी विद्यार्थियों का एडमिशन खरगोन स्थित 'क्रांतिवीर टंट्या भील विश्वविद्यालय' में ट्रांसफर किया जा रहा है। डीएवीवी ने इसके लिए एनओसी (NOC) जारी करने के साथ ही ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
आखिर क्यों फंसा मामला? पूरा मामला
साल 2022 से 2024 के बीच बीए, बीकॉम और बीएससी प्रथम वर्ष में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों से जुड़ा है। जब इन छात्रों ने प्रवेश लिया था, तब उनके कॉलेज डीएवीवी से संबद्ध (Affiliated) थे। इनमें से कुछ छात्र प्रथम वर्ष में अनुत्तीर्ण (फेल) हो गए थे, तो कुछ द्वितीय वर्ष की परीक्षा क्लियर नहीं कर पाए। विश्वविद्यालय ने नियम के मुताबिक पूरक परीक्षाएं भी आयोजित कीं, लेकिन इन छात्रों को शुरुआती दो साल पास करने में ही दो साल से ज्यादा का वक्त लग गया। अब जब इनकी अंतिम या अगली परीक्षा की बारी आई, तो विश्वविद्यालय के सामने तकनीकी और नीतिगत ढांचा आड़े आ गया।
यूनिवर्सिटी के बंटवारे से बदले समीकरण
दरअसल, वर्ष 2024 में खरगोन में क्रांतिवीर टंट्या भील विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। इसके बाद डीएवीवी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 5 प्रमुख जिलों—झाबुआ, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा और खरगोन—को डीएवीवी से अलग कर नए विश्वविद्यालय में शामिल कर दिया गया। सत्र 2024-25 से इन जिलों के सभी कॉलेज खरगोन यूनिवर्सिटी के अधीन आ गए। अब खरगोन विश्वविद्यालय को बने लगभग एक साल पूरा हो चुका है और वह वर्ष 2027 में पहली बार स्नातक तृतीय वर्ष (Final Year) की परीक्षाएं आयोजित करेगा। इसी को आधार बनाते हुए डीएवीवी प्रशासन ने इन विद्यार्थियों की बची हुई परीक्षाएं भी खरगोन से ही कराने का फैसला लिया है।
डीएवीवी के सामने व्यावहारिक चुनौतियां
परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशेष तिवारी के मुताबिक, जिन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया जा सकता था, वे अब डीएवीवी के प्रशासनिक दायरे में ही नहीं आते। ऐसे में इतने कम छात्रों के लिए अलग से प्रश्नपत्र तैयार कराना, उन्हें केंद्रों तक पहुंचाना, उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन और रिजल्ट जारी करने का पूरा सिस्टम काफी जटिल और कठिन हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि अब तक एक हजार से ज्यादा छात्र अपनी इस समस्या को लेकर विश्वविद्यालय पहुंच चुके हैं, जिन्हें स्थिति स्पष्ट करते हुए खरगोन यूनिवर्सिटी ट्रांसफर की प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है।

