राजनांदगांव जिला अस्पताल में सामने आए लापरवाही के एक गंभीर मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रसव के दौरान हुई देरी और गर्भ में शिशु की मौत के मामले में कलेक्टर जितेंद्र यादव के निर्देश पर अस्पताल के सिविल सर्जन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मामला शहर से लगे टोलागांव का है। यहां रहने वाली कविता मांडवी को सोमवार रात करीब ढाई बजे प्रसव पीड़ा होने पर राजनांदगांव जिला अस्पताल लाया गया था। महिला को मातृ-शिशु अस्पताल में भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा था।
ऑपरेशन में देरी से बिगड़ी स्थिति
परिजनों को बताया गया था कि जांच रिपोर्ट सुबह करीब 10 बजे तक मिल जाएगी। लेकिन जब परिजन रिपोर्ट लेने पहुंचे तो उन्हें रिपोर्ट तैयार नहीं होने की जानकारी दी गई। इस दौरान महिला की हालत बिगड़ती चली गई। परिजनों के अनुसार, प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद उन्होंने डॉक्टरों से जल्द ऑपरेशन करने की मांग की थी, लेकिन रिपोर्ट आने का इंतजार करने की बात कहते हुए ऑपरेशन नहीं किया गया। कुछ समय बाद महिला की स्थिति गंभीर होने पर उसे आनन-फानन में ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। ऑपरेशन के दौरान नवजात की मौत हो गई।परिजनों ने की कार्रवाई की मांग
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन से पहले तक बच्चे की हार्टबीट सामान्य थी। उनका आरोप है कि इलाज में हुई देरी के कारण यह दुखद स्थिति बनी। उन्होंने मामले में जिम्मेदार डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर जितेंद्र यादव ने कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद सिविल सर्जन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
