Durg Crime News: जिले में वर्षों से आतंक और आपराधिक गतिविधियों का पर्याय बने हरेराम प्रसाद कुशवाहा के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की है। लगातार अपराधों में लिप्त रहने और आम जनता के बीच खौफ फैलाने के कारण दुर्ग कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अभिजीत सिंह ने उसे 'जिला बदर' करने का फरमान जारी कर दिया है। कलेक्टर के इस कड़े आदेश के बाद अब हरेराम कुशवाहा को न सिर्फ दुर्ग जिला छोड़ना होगा, बल्कि वह अगले एक साल तक आसपास के 6 अन्य पड़ोसी जिलों में भी कदम नहीं रख सकेगा।
18 गंभीर मुकदमे, फिर भी नहीं सुधरे हालात
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, हरेराम कुशवाहा का आपराधिक इतिहास ढाई दशक पुराना है। उस पर वर्ष 1999 से लेकर अब तक मारपीट, बलवा, रास्ता रोककर जान से मारने की धमकी देने, हत्या के प्रयास, चोरी और जुआ जैसे करीब 18 गंभीर मामले दर्ज हो चुके हैं। समय-समय पर पुलिस ने उस पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की, लेकिन उसकी हरकतों में कोई सुधार नहीं आया। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, इलाके में हरेराम का इस कदर खौफ था कि आम नागरिक उसके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराने या अदालत में गवाही देने से भी कतराते थे। उसकी यही दबंगई और लगातार आपराधिक गतिविधियां क्षेत्र की शांति व कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनी हुई थीं।
बांग्लादेशी दंपती को पनाह देने का भी है आरोप
हरेराम का नाम केवल स्थानीय अपराधों तक ही सीमित नहीं रहा। वर्ष 2025 में सुपेला पुलिस ने उसे एक बांग्लादेशी दंपती को अवैध रूप से पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि हरेराम करीब 5 वर्षों से बांग्लादेशी नागरिक ज्योति और उसके पति रासेल शेख के संपर्क में था। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद 2020 में उसने दोनों को किराए का मकान दिलवाया और हर महीने उनसे 3,000 रुपये किराया वसूलता रहा। जिस मकान से दंपती की गिरफ्तारी हुई थी, वह भी हरेराम के ही कब्जे में था। इस मामले में सुपेला थाने में अपराध क्रमांक 571/2025 दर्ज किया गया था।
आदेश का उल्लंघन पड़ा भारी: 1 साल के लिए 7 जिलों की सीमाएं सील
पुलिस की विस्तृत रिपोर्ट, थानों के पुराने रिकॉर्ड्स, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों की गहन जांच के बाद कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अभिजीत सिंह ने 'छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम' की धारा 5 के तहत यह कड़ा फैसला सुनाया है।
आदेश की मुख्य बातें:
समय सीमा: आदेश जारी होने के 7 दिनों के भीतर हरेराम को दुर्ग जिले की सीमा छोड़नी होगी।
अवधि: 1 अक्टूबर 2026 से लेकर पूरे एक वर्ष तक यह प्रतिबंध लागू रहेगा।
प्रतिबंधित क्षेत्र: बिना जिला दंडाधिकारी की पूर्व अनुमति के हरेराम दुर्ग के अलावा रायपुर, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, बालोद और धमतरी जिलों में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
प्रशासन की इस बड़ी और सख्त कार्रवाई से क्षेत्र के असामाजिक तत्वों में हड़कंप मच गया है, वहीं आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है।

