Wednesday, 23 Sep 2026 भारत
ब्रेकिंग
Nagar Nigam Team Attack: सब्जी बाजार हटाने गई निगम टीम से मारपीट, पुलिस जवान भी घायल Ganja Smuggling: भाठागांव बस स्टैंड पर गांजा के साथ युवक गिरफ्तार, 1.25 लाख का माल जब्त Kanker Road Accident: बस में लगी झपकी बनी आखिरी सफर की वजह, कांकेर में शिक्षक की सड़क हादसे में मौत Bhilai Cyber Crime: लालच पड़ा भारी, भिलाई में बीएसपी ठेकेदार से 2.37 लाख की ऑनलाइन ठगी Mand River: गणेश विसर्जन के बाद लापता युवक का नदी में मिला शव, जांच में जुटी पुलिस Jagdalpur Nursing College: मेस पर सवाल, छात्राओं ने खाने में कीड़े मिलने का लगाया आरोप Nagar Nigam Team Attack: सब्जी बाजार हटाने गई निगम टीम से मारपीट, पुलिस जवान भी घायल Ganja Smuggling: भाठागांव बस स्टैंड पर गांजा के साथ युवक गिरफ्तार, 1.25 लाख का माल जब्त Kanker Road Accident: बस में लगी झपकी बनी आखिरी सफर की वजह, कांकेर में शिक्षक की सड़क हादसे में मौत Bhilai Cyber Crime: लालच पड़ा भारी, भिलाई में बीएसपी ठेकेदार से 2.37 लाख की ऑनलाइन ठगी Mand River: गणेश विसर्जन के बाद लापता युवक का नदी में मिला शव, जांच में जुटी पुलिस Jagdalpur Nursing College: मेस पर सवाल, छात्राओं ने खाने में कीड़े मिलने का लगाया आरोप
W 𝕏 f
होम चुनाव Election Commission: चुनाव आयोग में अंदरूनी तकरार…
Symbolic image of the Election Commission building and the SIR campaign (Image Source: AI Photo)
Symbolic image of the Election Commission building and the SIR campaign (Image Source: AI Photo)
चुनाव Featured

Election Commission: चुनाव आयोग में अंदरूनी तकरार, 10 महीनों में 14 बार दर्ज हुई आपत्ति, फैसले और IT सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

Election Commission: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने कई फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताते हुए पारदर्शिता, Form-6 बदलाव और IT सिस्टम को लेकर सवाल उठाए हैं।

प्रकाशित: 23 Sep 2026, 01:54 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Election Commission: देशभर में मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) अभियान अब खुद विवादों के घेरे में आ गया है। एक तरफ जहां कई राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कई जगह जारी है, वहीं दूसरी तरफ आयोग के भीतर से ही कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर अभूतपूर्व मतभेद सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर गहरी असहमति बनी हुई है, जिसने संस्था की निर्णय प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिना जानकारी के सहमति दर्ज करने का आरोप 

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के भीतर आयोग के विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है। दोनों आयुक्तों का गंभीर आरोप है कि कई महत्वपूर्ण निर्णय उनकी जानकारी या अंतिम सहमति के बिना ही ले लिए गए। यानी कागजों पर उनकी सहमति दर्ज कर ली गई, जबकि उन्हें प्रक्रिया से दूर रखा गया था। इन आपत्तियों की लिखित जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थी। मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग का आधिकारिक बयान भी आया है। आयोग का कहना है कि किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था में काम के दौरान सहमति और असहमति होना एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।

किन मुद्दों पर बिगड़ी बात?

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने मुख्य रूप से चार बड़े क्षेत्रों में अपना विरोध दर्ज कराया:

Form-6 में बदलाव को बताया ‘गैरकानूनी’ 

विवाद का एक बड़ा कारण नए वोटर कार्ड के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किया गया बदलाव है। इस फॉर्म में SIR से जुड़ा एक नया सवाल जोड़ा गया था, जिसमें आवेदक से उसके माता-पिता या दादा-दादी के पुराने SIR वोटर लिस्ट में शामिल होने का ब्योरा मांगा जा रहा था। चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में ही इस पर रोक लगाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि नियमों में औपचारिक संशोधन किए बिना फॉर्म के प्रारूप में इस तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस रुख का समर्थन किया और अगस्त में दर्ज अपनी आपत्ति में इस बदलाव को "अनधिकृत और गैरकानूनी" करार देते हुए तुरंत हटाने की सिफारिश की।

केंद्रीय IT सिस्टम से अधिकारियों के अधिकार सीमित करने पर चिंता 

विवाद केवल फॉर्म तक सीमित नहीं है। राज्य स्तर के कुछ चुनाव अधिकारियों ने शिकायत की थी कि उन्हें मुख्य IT सिस्टम का पूरा एक्सेस नहीं दिया जा रहा है। इस पर संधू और जोशी ने आयोग के भीतर आवाज उठाई। उनका मानना था कि वोटर लिस्ट में संशोधन की कानूनी जिम्मेदारी जिन स्थानीय अधिकारियों (ERO) के पास है, उनके अधिकारों को किसी केंद्रीय IT व्यवस्था के जरिए सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

कैबिनेट सचिव तक पहुंचा मामला आयोग के भीतर मामला 

सुलझता न देख दोनों चुनाव आयुक्तों ने जुलाई में सीधे कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा। पत्रों में आयोग के IT ढांचे और काम के अनुचित बंटवारे को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई थी। इसके बाद, दोनों आयुक्तों ने एक ऐसे प्रस्तावित आदेश को निष्प्रभावी कर दिया, जिससे चुनाव आयोग के तकनीकी अधिकारों का अत्यधिक केंद्रीयकरण होने की आशंका थी।
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
इस लेख में कोई त्रुटि दिखी? हमारी सुधार नीति देखें
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग
दुर्ग संभाग
बिलासपुर संभाग
सरगुजा संभाग
बस्तर संभाग
देश
विदेश
सरकारी सूचना
राजनीति
खेल
मनोरंजन
कारोबार
कीर्तिमान विशेष
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें