SIR: देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली, मुंबई, पटना, भोपाल और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार नाराजगी देखी जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को बेंगलुरु स्थित फ्रीडम पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा एक ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ का आयोजन किया गया, जिसमें राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कई चर्चित हस्तियों ने शिरकत की।
इस आयोजन में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका के अलावा यूट्यूबर ध्रुव राठी और प्रसिद्ध अभिनेता प्रकाश राज भी शामिल हुए।
‘हमारे नाम गलत तरीके से काटे गए’ — कर्नाटक के कोने-कोने से पहुंचे लोग
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के अनुसार, पीपुल्स ट्रिब्यूनल का मुख्य उद्देश्य उन नागरिकों की आवाज को मंच देना था जिनके नाम मतदाता सूची से बिना किसी ठोस वजह के हटा दिए गए हैं। कार्यक्रम में कर्नाटक के अलग-अलग जिलों से आए कई लोगों ने अपनी आपबीती साझा की और दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान उन्हें उनके मताधिकार से बेदखल कर दिया गया।
‘चप्पल प्रदर्शन’ और महिला सुरक्षा का मुद्दा
कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण CJP का अनोखा ‘चप्पल प्रदर्शन’ रहा। पार्टी ने इसे महिला सुरक्षा और महिलाओं से एकजुटता जताने का एक तरीका बताया। हाल ही में दिल्ली में हुए एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए थे। ट्रिब्यूनल के दौरान इस घटना को लेकर भी पुरजोर तरीके से आवाज उठाई गई और पुलिसिया कार्रवाई की निंदा की गई।
अभिजीत दीपके का सीधा हमला: "यह लोकतंत्र की सीधी हत्या"
मंच संभालते ही अभिजीत दीपके ने कार्यकर्ताओं से "SIR रद्द करो" जैसे तीखे नारे लगवाए। अपने संबोधन में उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि SIR के नाम पर धांधली की जा रही है और जीवित नागरिकों को कागजों में 'मृत' घोषित करके उनके वोट का अधिकार छीना जा रहा है।
दीपके ने आरोप लगाया, "यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। सत्तारूढ़ दल 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का सिर्फ नाम लेता है, जबकि उसका असली मकसद देश को 'वन नेशन, वन पार्टी' की व्यवस्था में ढालना है।"
अभिनेता प्रकाश राज बोले: "अब हक बचाने के लिए अधिकारियों के आगे गिड़गिड़ाना पड़ रहा है"
अभिनेता प्रकाश राज ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस तरह का दौर आज देश देख रहा है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ।
प्रकाश राज ने कहा, "एक दौर था जब चुनाव अधिकारी नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए घर-घर जाया करते थे। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है; अब लोगों को अपना नाम कटने से बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और अधिकारियों के आगे गुहार लगानी पड़ रही है। जिन लोगों को कागजों पर मृत दिखाकर वोट देने से रोका जा रहा है, वे असल में जिंदा हैं और अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।"
सुगबुगाहट तेज:
फ्रीडम पार्क में हुए इस आयोजन के बाद SIR प्रक्रिया पर सवाल और गहरे हो गए हैं। विपक्षी समूहों और नागरिक अधिकार संगठनों का कहना है कि अगर चुनाव आयोग ने पारदर्शी रुख नहीं अपनाया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में और तेज हो सकता है।

