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Gariaband medical store viral video case (Image Source: Keertiman Media)
Gariaband medical store viral video case (Image Source: Keertiman Media)
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Gariaband News: मेडिकल स्टोर बना क्लिनिक बिना डिग्री के इलाज का VIDEO वायरल

Gariaband News: गरियाबंद जिले के अमलीपदर थाना क्षेत्र से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने ग्रामीण इलाकों में चल रही स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक मेडिकल स्टोर संचालक मरीज को दवा देने के साथ-साथ इंजेक्शन लगाते हुए दिखाई दे रहा है।

कीर्तिमान डेस्क | रोशनी पटेल
13 Sep 2026, 03:06 PM
गरियाबंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Gariaband News: गरियाबंद जिले के अमलीपदर थाना क्षेत्र से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने ग्रामीण इलाकों में चल रही स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक मेडिकल स्टोर संचालक मरीज को दवा देने के साथ-साथ इंजेक्शन लगाते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने मामले की जांच की बात कही है। वहीं, मेडिकल और नर्सिंग एक्ट के नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। 
वायरल वीडियो में धनेश्वर मेडिकल नाम के एक मेडिकल स्टोर का दृश्य दिखाई दे रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति मोबाइल पर बातचीत करते हुए दवा निकालता नजर आ रहा है। इसके बाद वह इंजेक्शन लेकर मेडिकल स्टोर के पीछे बने एक कमरे में जाता है और वहां मरीज को इंजेक्शन लगाता दिखाई देता है।  

बिना डिग्री इलाज करने का आरोप 

स्थानीय लोगों का दावा है कि वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति के पास न तो फार्मेसी से जुड़ी कोई मान्यता प्राप्त डिग्री है और न ही नर्सिंग या इलाज करने के लिए जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों का उपचार करने का आरोप लगाया जा रहा है। दवा बेचने का अधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा सीधे इंजेक्शन लगाकर इलाज करना स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला माना जा रहा है।

जिले में करीब 300 मेडिकल स्टोर 

जानकारी के अनुसार, गरियाबंद जिले में करीब 300 मेडिकल स्टोर संचालित हैं। इनमें से लगभग 60 मेडिकल स्टोर देवभोग और मैनपुर क्षेत्र में हैं। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में कई जगह मेडिकल दुकानों की आड़ में बिना प्रशिक्षित लोगों द्वारा इलाज किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई मामलों में फार्मासिस्ट की मौजूदगी केवल कागजों तक सीमित होने के आरोप भी लगते हैं।

नियमों की अनदेखी से ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में दवा बेचने और इलाज करने के बीच का अंतर कई बार खत्म हो जाता है। कुछ मेडिकल संचालक बिना जरूरी योग्यता के मरीजों का उपचार करने लगते हैं। विभागीय जांच केवल औपचारिकता तक सीमित रहने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण ऐसी गतिविधियों पर समय रहते रोक नहीं लग पाती।  

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से बढ़ी समस्या

अमलीपदर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को बने चार साल से ज्यादा समय हो चुका है। इस स्वास्थ्य केंद्र पर करीब 70 गांवों की लगभग एक लाख आबादी निर्भर है। क्षेत्र में दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 34 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं, लेकिन यहां 40 से ज्यादा पद खाली होने की बात सामने आई है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए निजी विकल्पों पर निर्भर होना पड़ता है।

वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की जरूरत

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और विभागीय निगरानी में कमी के कारण झोलाछाप इलाज करने वालों को बढ़ावा मिल रहा है। अब वायरल वीडियो के बाद प्रशासन की जांच पर नजर है। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो ऐसे लोगों पर कार्रवाई के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी मजबूत करने की जरूरत होगी।

ड्रग इंस्पेक्टर बोले- बनाई जाएगी संयुक्त जांच टीम

मामले को लेकर ड्रग इंस्पेक्टर धर्मवीर ध्रुबे ने बताया कि वायरल वीडियो की जानकारी मिली है। मेडिकल स्टोर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि वीडियो में इलाज करते हुए भी व्यक्ति दिखाई दे रहा है, इसलिए यह मामला नर्सिंग एक्ट से भी जुड़ा हुआ है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को जानकारी देकर संयुक्त जांच कमेटी गठित की जाएगी। 
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