GST Fraud Case: रायपुर में फर्जी दस्तावेजों और दूसरे लोगों के नाम का इस्तेमाल कर फर्में बनाकर करोड़ों रुपए का कारोबार दिखाने का मामला सामने आया है। राज्य जीएसटी विभाग की जांच के बाद मेसर्स अगस्त्य इंटरप्राइजेस के प्रोपराइटर अमन कुमार अग्रवाल के खिलाफ तेलीबांधा थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जीएसटी विभाग के अनुसार, जांच में सामने आया कि करीब 10 ऐसी फर्में बनाई गईं, जिनमें से कई का मौके पर कोई वास्तविक कारोबार नहीं मिला। वहीं, जिन लोगों के नाम पर फर्में दर्ज थीं, उन्होंने कारोबार से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया। विभाग का आरोप है कि इन फर्मों के जरिए खरीदारी दिखाकर अगस्त्य इंटरप्राइजेस में करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया गया।
जांच में कई फर्में मौके पर नहीं मिलीं
जीएसटी अधिकारियों ने संबंधित फर्मों के बताए गए पतों पर पहुंचकर जांच की। कई स्थानों पर फर्मों का कोई अस्तित्व नहीं मिला। पूछताछ में कई लोगों ने बताया कि उनके नाम का इस्तेमाल बिना जानकारी के किया गया है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन में दर्ज बैंक खाते उनके नहीं हैं। इसके बाद विभाग ने दस्तावेजों की जांच शुरू की और अनियमितताओं की जानकारी पुलिस को दी। जांच में हुसैनी इंटरप्राइजेस का मामला भी सामने आया। यह फर्म गरियाबंद में पंजीकृत थी। विभाग के मुताबिक, फर्म के किरायानामे में मकान मालिक के रूप में फूल सिंह का नाम दर्ज था, जबकि उनकी मृत्यु वर्ष 2010 में हो चुकी थी। इसके बावजूद 21 मार्च 2025 का किरायानामा प्रस्तुत किया गया। फर्म के प्रोपराइटर मोहम्मद इस्लाम ने भी कारोबार और बैंक खाते की जानकारी होने से इनकार किया। इस फर्म के माध्यम से अगस्त्य इंटरप्राइजेस को करीब 16.61 करोड़ रुपये का कारोबार और 2.99 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट दिखाया गया।
इलेक्ट्रिशियन और नौकरीपेशा लोगों के नाम पर करोड़ों का कारोबार
जांच में यूनिक इंटरप्राइजेस का नाम भी सामने आया। इस फर्म के जरिए 11.61 करोड़ रुपए का कारोबार और 2.08 करोड़ रुपए का ITC दर्शाया गया। इसके प्रोपराइटर मजहर खान ने बताया कि वह इलेक्ट्रिशियन हैं और इस कारोबार से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसी तरह अंसारी ट्रेडर्स के नाम पर 30.71 करोड़ रुपए का कारोबार और 5.52 करोड़ रुपए का ITC दिखाया गया। इसके प्रोपराइटर एफजल अंसारी ने बताया कि वह पार्किंग में नौकरी करते हैं और अमन अग्रवाल को नहीं जानते। अगस्त इंटरप्राइजेस नाम से बनाई गई फर्म के मामले में विभाग ने बताया कि इसमें 22.47 करोड़ रुपए का कारोबार और 4.04 करोड़ रुपए का ITC दिखाया गया। फर्म से जुड़े विकास यदु ने पूछताछ में बताया कि वह पहले चाय का ठेला लगाते थे और इस तरह के कारोबार की जानकारी उन्हें नहीं थी। वहीं, ललित ट्रेड लिंक के जरिए 29.72 करोड़ रुपए का कारोबार और 5.17 करोड़ रुपए का ITC दिखाया गया। इसके प्रोपराइटर ललित सोनी ने बताया कि वह पिछले तीन साल से नौकरी कर रहे हैं।दिहाड़ी मजदूर और सफाईकर्मी के नाम पर भी फर्म
जांच में विनायक वेंचर्स और महावीर इंटरप्राइजेस के मामले भी सामने आए। विभाग के अनुसार, विनायक वेंचर्स से 17.95 करोड़ रुपए का कारोबार और 1.36 करोड़ रुपए का ITC दिखाया गया। इसके प्रोपराइटर प्रताप सिंह वर्मा ने खुद को दिहाड़ी मजदूर बताया। वहीं, महावीर इंटरप्राइजेस के नाम पर 12.67 करोड़ रुपए का कारोबार और 2.27 करोड़ रुपए का ITC दिखाया गया। इसके प्रोपराइटर महेश फकीरा सोनी ने बताया कि वह सफाईकर्मी हैं। जीएसटी विभाग का कहना है कि जांच के दौरान कई फर्मों के पते, किरायानामे और बैंक खातों में गड़बड़ियां मिलीं। कुछ दस्तावेजों में हस्ताक्षर को लेकर भी संदेह जताया गया है। विभाग ने आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए कारोबार दिखाकर टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया। इस मामले में तेलीबांधा पुलिस ने अमन कुमार अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

