भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली ख्यातिप्राप्त सितार वादक और राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति प्रो. लवली शर्मा ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। दिल्ली आकाशवाणी ने उन्हें सितार वादन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, वर्षों की साधना और भारतीय संगीत परंपरा के संरक्षण में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रतिष्ठित ‘टॉप ग्रेड आर्टिस्ट’ का दर्जा प्रदान किया है। यह सम्मान भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है और चुनिंदा कलाकारों को ही उनकी असाधारण प्रतिभा और योगदान के आधार पर दिया जाता है।
आगरा की पहली कलाकार बनीं
प्रो. लवली शर्मा इस सम्मान को प्राप्त करने वाली आगरा की पहली कलाकार बन गई हैं। यह उपलब्धि उनके दशको लंबे संगीत सफर, निरंतर अभ्यास और भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति समर्पण का परिणाम मानी जा रही है। आकाशवाणी का ‘टॉप ग्रेड आर्टिस्ट’ दर्जा केवल उन कलाकारों को दिया जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता स्थापित की हो और जिनका योगदान राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया गया हो। उनकी इस सफलता पर विश्वविद्यालय परिवार, संगीत जगत, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया से लेकर शैक्षणिक संस्थानों तक उनकी उपलब्धि की व्यापक चर्चा हो रही है।
सितार वादन में बनाई राष्ट्रीय पहचान
प्रो. लवली शर्मा भारतीय शास्त्रीय संगीत की अग्रणी सितार वादकों में गिनी जाती हैं। उन्होंने वर्षों की कठिन साधना और अनुशासित अभ्यास के बल पर सितार वादन में विशिष्ट पहचान बनाई है। वे सितार विषय में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाली पहली महिला वादिका भी हैं, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने संगीत को केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे शिक्षा, शोध और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनाया। देशभर में आयोजित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगीत समारोहों में उनकी प्रस्तुतियों को सराहा गया है, जिससे भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।विश्वविद्यालय को दी नई शैक्षणिक दिशा
राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति का दायित्व संभालने के बाद प्रो. लवली शर्मा ने विश्वविद्यालय के समग्र विकास को प्राथमिकता दी। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, शोध गतिविधियों को मजबूत करने और विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय में अकादमिक अनुशासन, पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार की दिशा में लगातार कार्य किया गया। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों से शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया।
सांस्कृतिक गतिविधियों को नई पहचान
प्रो. शर्मा के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियों का दायरा काफी विस्तृत हुआ। तीन वर्षों के अंतराल के बाद खैरागढ़ महोत्सव का सफल आयोजन हुआ, जिसने देशभर के कलाकारों और संगीत प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। इसके अलावा ‘श्रुति मंडल’ की स्थापना, राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन, पुस्तक मेले, नाट्य महोत्सव, नि:शुल्क ग्रीष्मकालीन कला शिविर, जनजातीय गौरव कार्यक्रम तथा समाज से जुड़ी विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों ने विश्वविद्यालय को नई ऊर्जा प्रदान की। इन आयोजनों ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का व्यापक मंच दिया।अंतरराष्ट्रीय पहचान में वृद्धि
प्रो. शर्मा के कार्यकाल में विश्वविद्यालय की अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए 55 सीटर वातानुकूलित बस उपलब्ध कराई गई, नई एम्बुलेंस की स्वीकृति मिली और शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। विश्वविद्यालय में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 32 तक पहुंचना इसकी अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का प्रमाण माना जा रहा है। इसी दौरान विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय’ किए जाने की प्रक्रिया भी पूरी हुई, जिससे संस्थान की ऐतिहासिक पहचान और अधिक सशक्त हुई।