India China Border: भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर पर बर्फ पिघलने के संकेत अब जमीनी धरातल पर भी दिखने लगे हैं। रक्षा मंत्रालय की हालिया वार्षिक रिपोर्ट (वित्त वर्ष 2025-26) से खुलासा हुआ है कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपने सैनिकों की मौजूदगी में काफी कटौती की है। यह रिपोर्ट ऐसे अहम मोड़ पर सामने आई है, जब ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के सिलसिले में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत दौरे पर पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत हुई।
दिल्ली में करीब 24 घंटे के प्रवास के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी और सीमा पर स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट: 5 प्रमुख बातें
सैनिकों की संख्या में गिरावट: रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में उत्तरी सीमाओं के पार चीनी सेना की तैनाती में स्पष्ट कमी दर्ज की गई है।
LAC पर मौजूदा स्थिति: लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैली पूरी सीमा पर चीन ने करीब 10 'कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड' तैनात रखी हैं। इसका सीधा अर्थ है कि सीमावर्ती इलाकों में फिलहाल 45,000 से 50,000 चीनी सैनिक मौजूद हैं।
ट्रेनिंग इलाकों की हलचल: सीमा के अग्रिम मोर्चों के अलावा चीन के पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में भी 10 अतिरिक्त ब्रिगेड (लगभग 50,000 सैनिक) की मौजूदगी दर्ज की गई है।
2020 के मुकाबले राहत: साल 2020 में गलवान और लद्दाख में उपजे भीषण तनाव के समय केवल लद्दाख सेक्टर में ही 60,000 से अधिक चीनी सैनिक डटे हुए थे। उस मुकाबले वर्तमान आंकड़े तनाव कम होने का संकेत देते हैं।
भारतीय सेना अलर्ट मोर्चे पर: हालांकि रिपोर्ट में भारतीय सैनिकों की सटीक संख्या का विवरण नहीं है, लेकिन यह साफ किया गया है कि LAC के सभी सेक्टरों में भारतीय थलसेना पूरी तरह मजबूत, संतुलित और किसी भी स्थिति का माकूल जवाब देने के लिए मुस्तैद है।
अरुणाचल में हालिया हलचल और बातचीत का सिलसिला
यह रक्षा रिपोर्ट अरुणाचल प्रदेश में हाल में हुई छिटपुट तनातनी से ठीक पहले तैयार की गई थी। रिपोर्ट तैयार होने के बाद के महीनों में अरुणाचल के दो क्षेत्रों में तनाव की खबरें आई थीं, जिसके बाद ऐहतियातन अग्रिम चौकियों पर अतिरिक्त बल भेजे गए।
सीमा पर स्थायी शांति के लिए दोनों देशों के बीच स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव (SR) स्तर की वार्ता के बाद कोर कमांडर स्तर की बैठकें भी आयोजित की गई हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, जमीनी स्तर पर स्थानीय कमांडरों के बीच 'बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स' (BPM) सौहार्दपूर्ण माहौल में लगातार जारी हैं, ताकि किसी भी गलतफहमी को तुरंत दूर किया जा सके।
'ऑपरेशन सिंदूर': पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर करारा प्रहार
वार्षिक रिपोर्ट में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' का भी विशेष उल्लेख है। इसके तहत भारतीय सेना ने सीमा पार पाकिस्तान में संचालित आतंकी बुनियादी ढांचे पर सटीक प्रहार कर उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया, जिससे पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को भी भारी नुकसान पहुंचा।
ड्रोन क्षमता पर आत्ममंथन: इस सैन्य कार्रवाई के विश्लेषण में रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहलू को रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान स्वदेशी उद्योगों द्वारा ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों की आपूर्ति में कुछ व्यावहारिक सीमाएं देखी गईं। हालांकि, सरकार और रक्षा उद्योग अब इन कमियों को दूर करने और घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता को तेजी से विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं।

