Ishaan Khatter: किसी लड़के को बचपन से कहा जाता है कि रोना मत, डरना मत और हर हाल में मजबूत बने रहना। अगर वो रो दे, तो उसे चुप करा दिया जाता है और अगर वो अपनी परेशानी बताए, तो कई बार उसे कमजोर समझ लिया जाता है। धीरे-धीरे वो अपनी भावनाएं छिपाना सीख जाता है। लेकिन क्या सच में एक अच्छा मर्द बनने के लिए अपने आंसू रोकना और दिल की बात दबाना जरूरी है।
बचपन से ही भावनाएं छिपाना सीख जाते हैं लड़के
बचपन में कई लड़कों को रोने, डरने या अपनी परेशानी जाहिर करने पर चुप करा दिया जाता है। उन्हें मजबूत बने रहने की सलाह तो मिलती है, लेकिन अपनी भावनाओं को समझने और व्यक्त करने का मौका कम मिलता है। धीरे-धीरे वे अपनी तकलीफ दूसरों से साझा करने से बचने लगते हैं। इसका असर बड़े होने के बाद भी दिखाई दे सकता है।
परवरिश से मिला महिलाओं का नजरिया समझने का मौका
इशान खट्टर ने बताया कि उनकी परवरिश उनकी मां ने की है। ऐसे में महिलाओं के साथ उनका अनुभव और उनके नजरिए को समझना उनकी सोच का अहम हिस्सा रहा है। परिवार बच्चों के व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चे घर में अपने बड़ों के व्यवहार को देखकर सीखते हैं कि दूसरों के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए।रिश्तों में बहस से ज्यादा जरूरी है पार्टनर की बात सुनना
किसी रिश्ते में कई बार ऐसी स्थिति आती है, जब एक साथी किसी बात से दुखी होता है, लेकिन दूसरे को उसकी परेशानी बड़ी नहीं लगती। ऐसे समय में उसकी भावनाओं को नजरअंदाज करना या उसे गलत साबित करने की कोशिश करना दूरी बढ़ा सकता है। बेहतर तरीका यह है कि पहले उसकी बात सुनी जाए और यह समझने की कोशिश की जाए कि वह किस वजह से परेशान है।
भावनाओं को समझना भी है बेहतर इंसान बनने की पहचान
इशान खट्टर की यह बात लड़कों की परवरिश से आगे बढ़कर प्यार, शादी और आपसी रिश्तों में समझदारी की अहमियत को सामने लाती है। मजबूत होने का मतलब हमेशा अपनी भावनाओं को छिपाना नहीं होता। अपनी बात खुलकर कहना, दूसरों की परेशानी को समझना और जरूरत पड़ने पर अपनी गलती स्वीकार करना भी व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।







