Kainchi Dham: प्रसिद्ध तीर्थस्थल कैंची धाम में बाबा नीम करौली महाराज के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ रहा है कि पूरी व्यवस्था चरमराने लगी है। रोजाना औसतन 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं की आमद से मंदिर परिसर से लेकर सड़कों तक पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति को नियंत्रित करने और अव्यवस्था से बचने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने पड़े हैं। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर क्राउड मैनेजमेंट के लिए कई बड़े और सख्त फैसले लिए हैं।
हर दिन 50 हजार पार, अब केवल 25 हजार को ही मिलेगी अनुमति
कैंची धाम की भौगोलिक स्थिति और मंदिर परिसर की क्षमता को देखते हुए प्रशासन ने रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं की एक सीमा तय करने का मन बनाया है। नए प्लान के मुताबिक, अब प्रतिदिन केवल 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा, ताकि दर्शन सुचारू रूप से कराए जा सकें। इसके साथ ही, आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन व्यवस्था शुरू की जा रही है। कमिश्नर दीपक रावत के अनुसार, रजिस्ट्रेशन लागू होने से प्रशासन को पहले ही यह सटीक अनुमान मिल जाएगा कि किस दिन कितनी भीड़ पहुंचने वाली है। इससे ऐन मौके पर अफरा-तफरी का माहौल नहीं बनेगा।
एंट्री और एग्जिट के बदलेंगे नियम, शटल सेवा पर जोर
अब तक कैंची धाम मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए एक ही गेट का इस्तेमाल होता था, जिससे संकरे रास्ते पर भारी धक्का-मुक्की और जाम की स्थिति बन जाती थी। प्रशासन अब एक गेट को सिर्फ प्रवेश और दूसरे को केवल निकास (एग्जिट) के लिए तय करने जा रहा है। यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पार्किंग, शटल बस सेवा और ट्रैफिक मैनेजमेंट को और मजबूत किया जाएगा। शिप्रा नदी के आसपास के क्षेत्रों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
ओवरचार्जिंग और मनमानी की तो खैर नहीं
भीड़ का फायदा उठाकर श्रद्धालुओं से मनमाना किराया या सामान के दाम वसूलने वालों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र के होटल, होमस्टे, बाइक टैक्सी चालकों और स्थानीय दुकानदारों पर प्रशासन की पैनी नजर रहेगी। यदि कोई भी व्यापारी या वाहन चालक श्रद्धालुओं से तय दरों से अधिक वसूली करता पाया गया या दरों में मनमानी करता मिला, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का साफ संदेश है कि आस्था के नाम पर श्रद्धालुओं का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

