Korba News: आज के दौर में बच्चों और स्मार्टफोन का रिश्ता किसी पहेली से कम नहीं बनता जा रहा है। स्कूल परिसरों में मोबाइल के इस्तेमाल पर साफ पाबंदी है, इसके बावजूद विद्यार्थी नियमों को ताक पर रखकर इसे साथ ले जाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मार्मिक और झकझोर देने वाला मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से सामने आया है, जहां अजगरबहार क्षेत्र के एक हायर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्य की सामान्य सी डांट से नाराज होकर 11वीं कक्षा की एक छात्रा ने कथित तौर पर कीटनाशक गटक लिया। गनीमत यह रही कि परिवार की सतर्कता और समय पर अस्पताल पहुंच जाने के कारण उसकी जान बाल-बाल बच गई। फिलहाल जिला अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है और डॉक्टरों के मुताबिक उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर है।
क्या था पूरा घटनाक्रम?
जानकारी के मुताबिक, छात्रा रोज की तरह सामान्य दिनों की तरह ही स्कूल पहुँची थी, लेकिन अपनी आदत के मुताबिक वह इस बार भी चुपचाप अपना मोबाइल फोन साथ ले गई थी। जब स्कूल प्रबंधन को इस बात की भनक लगी कि छात्रा के पास फोन है, तो नियम का हवाला देते हुए प्राचार्य ने उसे अपने चैंबर में फटकार लगाई और अनुशासन का पाठ पढ़ाया। स्कूल की छुट्टी के बाद जब वह घर लौटी, तो डांट का यह गम उसके मन में इस कदर घर कर गया कि उसने गुस्से और आवेश में आकर घर में रखा कीटनाशक पी लिया। कुछ ही देर में जब उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और घरवालों की नजर उस पर पड़ी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना एक पल गंवाए स्वजन उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर भागे। डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए उसका फौरन इलाज शुरू किया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी। इस घटना के बाद जिला शिक्षा अधिकारी तामेश्वर उपाध्याय ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा है कि इस पूरे प्रकरण की पूरी जानकारी ली जा रही है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी दर्दनाक घटनाएं
कोरबा जिले में मोबाइल को लेकर बच्चों का यह अति-मोह और तनाव कोई पहला मामला नहीं है। कुछ समय पहले इसी जिले में एक और दिल दहला देने वाली घटना घटी थी, जहाँ एक 17 वर्षीय किशोरी का अपने 12 साल के छोटे भाई को ज्यादा देर तक मोबाइल देखने से रोकने को लेकर घर में विवाद हुआ था। बात इतनी बढ़ी कि मां ने तंग आकर मोबाइल ही छिपा दिया। इस बात से नाराज होकर किशोरी ने खौफनाक कदम उठाते हुए फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी। अब स्कूल में मोबाइल ले जाने पर रोक और प्राचार्य की एक अदद फटकार के बाद छात्रा द्वारा जहर निगलने की इस ताजा घटना ने शिक्षाविदों और अभिभावकों की नींद उड़ा दी है।
आखिर किधर जा रही है नई पीढ़ी?
ये दोनों ही घटनाएं समाज, अभिभावकों और स्कूलों के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। ये इस बात की साफ गवाही देती हैं कि बच्चों के हाथ में तकनीक थमाने के साथ-साथ उन्हें धैर्य रखना सिखाना, समझाना और उनके साथ खुला संवाद कायम करना कितना जरूरी हो गया है। आज के किशोरों में छोटी-छोटी बातों पर इस तरह का चरम कदम उठाना इस बात का संकेत है कि सिर्फ पाबंदियां लगाने से बात नहीं बनेगी, बल्कि हमें उनके मानसिक स्वास्थ्य और भावनाओं को समझने के लिए एक संवेदनशील नजरिए की भी सख्त जरूरत है।







