Mahasamund Food Department: कांपा गांव के हितग्राहियों ने शिकायत की कि उन्हें अगस्त महीने का राशन नहीं दिया गया, जबकि उनसे पहले ही फिंगरप्रिंट ले लिया गया था। इससे ऑनलाइन रिकॉर्ड में राशन वितरण पूरा दिखाए जाने की आशंका सामने आई। मामले की जानकारी मिलने पर सरपंच ने जिला खाद्य अधिकारी को इसकी सूचना दी। इसके बाद खाद्य अधिकारी पंचायत पहुंचे और ग्रामीणों तथा उचित मूल्य दुकान संचालक से बात कर स्थिति की जानकारी ली। जांच के दौरान दुकान संचालक की लापरवाही सामने आई है।
राशन नहीं मिला, लेकिन ले लिया गया फिंगरप्रिंट
कांपा गांव के हितग्राहियों की शिकायत के अनुसार, अगस्त महीने का राशन उन्हें नहीं मिला था। इसके बावजूद उनसे फिंगरप्रिंट ले लिए गए थे। राशन वितरण की इस प्रक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि राशन दिए बिना ही हितग्राहियों के फिंगरप्रिंट दर्ज किए गए, तो ऑनलाइन रिकॉर्ड में वितरण की स्थिति क्या दर्ज हुई और वास्तविकता में कितना राशन बांटा गया, इसकी जांच जरूरी है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से मिलने वाला राशन जरूरतमंद परिवारों के खाद्य सुरक्षा का प्रमुख आधार है। ऐसे में रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के बीच अंतर होने पर हितग्राहियों को अपने हक के राशन से वंचित होना पड़ सकता है।
सरपंच की सूचना पर गांव पहुंचा खाद्य विभाग
मामले की शिकायत सरपंच तक पहुंचने के बाद उन्होंने जिला खाद्य अधिकारी को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलने पर खाद्य अधिकारी पंचायत पहुंचे। उन्होंने पहले ग्रामीणों से उनकी समस्याएं सुनीं और फिर दुकान संचालक से बातचीत कर राशन वितरण तथा स्टॉक की स्थिति के बारे में जानकारी ली। जांच के दौरान दुकान संचालक की लापरवाही पाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद अगस्त महीने के राशन का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर
कांपा की उचित मूल्य दुकान में स्टॉक की उपलब्धता और ऑनलाइन रिकॉर्ड के बीच अंतर का मामला भी सामने आया है। दुकान संचालक का कहना है कि यह समस्या तकनीकी गड़बड़ी के कारण हो रही है। उनके मुताबिक, ऑनलाइन रिकॉर्ड में जितना राशन उपलब्ध दिखाया जा रहा है, उतना राशन वास्तव में दुकान तक नहीं पहुंच रहा है। वहीं, राशन वितरण के बाद भी रिकॉर्ड में बचा हुआ स्टॉक अधिक दिखाई देता है। हालांकि, संचालक की ओर से तकनीकी समस्या का हवाला दिए जाने के बावजूद रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के अंतर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि तथा उसकी वजह स्पष्ट होना जरूरी है। इसके लिए आवंटन, दुकान तक हुई आपूर्ति, वितरण रजिस्टर, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और भौतिक स्टॉक का मिलान महत्वपूर्ण होगा।
मार्च 2025 की ऑडिट में भी मिली थी असमानता
कांपा में राशन वितरण और स्टॉक से जुड़ी अनियमितता का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले मार्च 2025 में हुई ऑडिट के दौरान भी स्टॉक और रिकॉर्ड के बीच असमानता सामने आई थी। ऐसे में मौजूदा शिकायत ने एक बार फिर दुकान के रिकॉर्ड और वास्तविक राशन उपलब्धता की जांच की जरूरत को सामने ला दिया है। यह भी देखना होगा कि पिछली ऑडिट में सामने आई गड़बड़ी पर क्या कार्रवाई हुई थी और उसके बाद व्यवस्था में सुधार हुआ या नहीं।
15 दिन में राशन बांटने का निर्देश
फिलहाल खाद्य अधिकारी ने दुकान संचालक को अगस्त महीने का लंबित राशन वितरित करने के निर्देश दिए हैं। संचालक से स्पष्ट कहा गया है कि वे आवश्यक चावल की व्यवस्था कर हितग्राहियों को राशन उपलब्ध कराएं। इसके लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है। यदि दुकान संचालक निर्धारित समय में राशन वितरण करने में असमर्थ रहते हैं, तो आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित अवधि में सभी प्रभावित हितग्राहियों को उनका राशन मिल पाता है या नहीं।
जिले की कई दुकानों से राशन वितरण में समस्याओं की शिकायतें
बिरकोनी की उचित मूल्य दुकान को लेकर खबर सामने आने के बाद अन्य गांवों से भी राशन वितरण में समस्याओं की शिकायतें मिली है। इन शिकायतों में राशन समय पर नहीं मिलने, दुकानों के सीमित समय तक खुलने और चावल के साथ नमक तथा शक्कर जैसी अन्य सामग्री वितरित नहीं किए जाने जैसी समस्याएं लोगों ने साझा की । कुछ शिकायतों में दुकानें महीने में केवल चार-पांच दिन खुलने या दिन के कुछ घंटों के लिए ही संचालित होने की बात कही जा रही है।सवाल यह है कि हितग्राहियों को कब मिलेगा उनका पूरा राशन?
कांपा का मामला केवल एक महीने के राशन वितरण तक सीमित नहीं है। यह ऑनलाइन रिकॉर्ड, वास्तविक स्टॉक और हितग्राहियों को राशन मिलने की स्थिति के बीच तालमेल पर भी सवाल खड़ा करता है। अब खाद्य विभाग के निर्देशों के बाद यह देखना होगा कि कांपा के प्रभावित हितग्राहियों को अगस्त महीने का राशन निर्धारित समय में मिलता है या नहीं। साथ ही, जिले की अन्य उचित मूल्य दुकानों से मिल रही शिकायतों पर भी विभाग किस तरह कार्रवाई करता है।







