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नर्मदापुर पंचायत में वित्तीय अनियमितता
नर्मदापुर पंचायत में वित्तीय अनियमितता
अंबिकापुर (सरगुजा)

सरकारी योजनाओं की राशि में गड़बड़ी, नर्मदापुर पंचायत के सरपंच-सचिवों को अंतिम नोटिस

मैनपाट की ग्राम पंचायत नर्मदापुर में विकास कार्यों की राशि के आहरण में करीब 2.07 करोड़ रुपए की अनियमितता सामने आई है। जांच के बाद संबंधित सरपंचों और सचिवों को अंतिम नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 13 Aug 2026, 01:28 PM · अपडेट: 13 Sep 2026, 11:27 PM
सरगुजा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
जनपद पंचायत मैनपाट की ग्राम पंचायत नर्मदापुर में विकास और निर्माण कार्यों के लिए जारी सरकारी राशि के आहरण में गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन की ओर से कराई गई जांच में करीब 2 करोड़ 7 लाख 16 हजार रुपए के आहरण में नियमों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित सरपंचों, सचिवों और वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने मामले से जुड़े सरपंचों और सचिवों को अंतिम नोटिस जारी किया है।
उनसे तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 के प्रावधानों के तहत संबंधित राशि की वसूली के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल ने चार सदस्यीय जांच दल गठित किया था।

कलेक्टर के निर्देश पर बनी चार सदस्यीय जांच टीम

इसकी अध्यक्षता अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सीतापुर को सौंपी गई। टीम ने ग्राम पंचायत नर्मदापुर में मूलभूत सुविधाओं, 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन और अन्य निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेजों तथा भुगतान के रिकॉर्ड की जांच की। जांच में पाया गया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं की राशि के आहरण के दौरान कई मामलों में पर्याप्त प्रमाणक, मूल्यांकन, सत्यापन और नस्ती फाइल उपलब्ध नहीं थी। रिपोर्ट में कुछ ऐसे मामलों का भी उल्लेख है, जिनमें मौके पर संबंधित निर्माण कार्य नहीं मिलने के बावजूद राशि निकाली गई। वहीं, कुछ खर्च ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना किए जाने की बात सामने आई है। 

अलग-अलग कार्यकाल में मिली अनियमितता जांच

रिपोर्ट के मुताबिक सचिव सिकंदर प्रजापति के कार्यकाल में 60 लाख 64 हजार रुपए, चंद्रपाल सिंह के कार्यकाल में 8 लाख 13 हजार रुपए और अनिल यादव के कार्यकाल में 5 लाख 11 हजार रुपए के आहरण में अनियमितता पाई गई। इसी तरह सरपंच गणेश नाग से संबंधित 5 लाख 11 हजार रुपए, राजनाथ भैंसा से संबंधित 60 लाख 66 हजार रुपए और ललिता भैंसा से संबंधित 7 लाख 89 हजार रुपए की राशि का उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया है। जांच के दायरे में विभिन्न वेंडरों और फर्मों को किया गया करीब 40 लाख 78 हजार रुपए का भुगतान भी आया है। इनमें धनंजय सिंह, यादव इलेक्ट्रिकल्स, मां बंजारी ट्रांसपोर्ट, प्रकाश कुमार अंबष्ट और जय पहाड़ी माता फ्लाइ ऐश ब्रिक्स जैसी फर्मों के नाम शामिल हैं।

 अलग-अलग वित्तीय वर्षों में निकाली गई राशि

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इन भुगतानों से संबंधित कई निर्माण कार्य मौके पर नहीं पाए गए। वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 में कुल 10 लाख 22 हजार रुपए के आहरण को जांच के दायरे में रखा गया है। वहीं, 2021-22 से 2024-25 के बीच 1 करोड़ 76 लाख 28 हजार 823 रुपए और वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20 लाख 65 हजार 218 रुपए के आहरण में अनियमितता सामने आने की बात रिपोर्ट में कही गई है। फिलहाल प्रशासन ने संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया है। नोटिस का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में राशि की वसूली के साथ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
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