Modhera Sun Temple: 1000 साल पुराने मंदिर की अद्भुत वास्तुकला, जिसकी नक्काशी आज भी करती है हैरान
Modhera Sun Temple: गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित मोढेरा सूर्य मंदिर करीब 1000 साल पुरानी भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम के काल में बने इस मंदिर की खासियत इसकी बारीक नक्काशी, सूर्य कुंड, 52 स्तंभ और सूर्य की किरणों से जुड़ी स्थापत्य योजना है।
प्रकाशित: 02 Oct 2026, 05:16 PM· 3 मिनट पढ़ने का समय
गुजरात
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Modhera Sun Temple: गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित मोढेरा का सूर्य मंदिर भारत की प्राचीन वास्तुकला और समृद्ध विरासत की बेहतरीन मिसाल है। अपनी अनूठी बनावट और खगोलीय महत्व के कारण यह मंदिर करीब 1000 सालों से लोगों को हैरान करता आ रहा है। इतिहास, आस्था और बेजोड़ इंजीनियरिंग के अद्भुत संगम वाले इस मंदिर की कई ऐसी खास बातें हैं, जो इसे बेहद खास बनाती हैं।इस मंदिर के निर्माण से जुड़ा सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पूरे ढांचे को जोड़ने के लिए किसी भी तरह के चूने, गारे या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। पत्थरों को आपस में इस तरह तराशकर जोड़ा गया है कि सदियों बाद भी यह मंदिर मजबूती से खड़ा है। मरु-गुर्जर स्थापत्य शैली में बने इस परिसर के तीन मुख्य भाग हैं—सूर्य कुंड, सभा मंडप और गर्भगृह। ये तीनों हिस्से पूर्व से पश्चिम दिशा में एक दम सीधी रेखा में बने हैं।
1000 साल पुरानी भारतीय वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण खगोलशास्त्र और समय का अद्भुत तालमेल
मंदिर की वास्तुकला में धार्मिक आस्था के साथ-साथ गणित और खगोलीय गणनाओं का ध्यान रखा गया है:
52 स्तंभ और 52 हफ्ते: सभा मंडप में 52 नक्काशीदार खंभे हैं, जिन्हें साल के 52 हफ्तों का प्रतीक माना जाता है। इन स्तंभों पर रामायण और महाभारत के प्रसंगों को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है।
24 खंभे और 24 घंटे: मंदिर के गर्भगृह में 24 स्तंभ बने हैं, जो दिन के 24 घंटों को दर्शाते हैं।
108 छोटे मंदिर: परिसर में बने विशाल सूर्य कुंड (रामकुंड) के चारों तरफ छोटे-बड़े कुल 108 मंदिर बने हुए हैं।
गर्भगृह में पहुंचती है सूर्य की पहली किरण
प्राचीन कारीगरों ने मंदिर का नक्शा इस तरह तैयार किया था कि साल के विशेष दिनों में सुबह सूर्य की पहली किरण सीधे मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचती थी और वहां स्थापित प्रतिमा को आलोकित करती थी।
राजा भीमदेव प्रथम ने कराया था निर्माण
इतिहास के पन्नों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 1026-27 ईस्वी के आसपास सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम ने करवाया था। सूर्य देव सोलंकी राजवंश के कुलदेवता थे, इसलिए उन्होंने अपने कुलदेवता के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए इस भव्य मंदिर की नींव रखी थी। पौराणिक मान्यताओं की बात करें तो ब्रह्म पुराण और स्कंद पुराण में भी इस क्षेत्र का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि लंकापति रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए इस पवित्र स्थान पर आए थे।
1026-27 इस्वी की अद्भुत नक्काशीआज भी जीवंत है सांस्कृतिक विरासत
भारत में मुख्य रूप से तीन प्रसिद्ध सूर्य मंदिर हैं—ओडिशा का कोणार्क मंदिर, जम्मू का मार्तंड मंदिर और गुजरात का मोढेरा सूर्य मंदिर। मोढेरा का यह मंदिर केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि आज भी जीवंत कला का केंद्र है:
उत्तरार्ध महोत्सव: गुजरात सरकार हर साल जनवरी के महीने में मंदिर परिसर में तीन दिवसीय 'उत्तरार्ध महोत्सव' आयोजित करती है, जिसमें देशभर के कलाकार शास्त्रीय नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां देते हैं।
यूनेस्को की सूची में शामिल: दिसंबर 2022 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची (Tentative List) में जगह दी थी। फिलहाल इस ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख और संरक्षण का जिम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पास है। मकर संक्रांति और प्रमुख त्योहारों पर आज भी हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस अजूबे को देखने और सूर्य कुंड के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं।