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यात्रा
Modhera Sun Temple: 1000 साल पुराने मंदिर की अद्भुत वास्तुकला, जिसकी नक्काशी आज भी करती है हैरान
Modhera Sun Temple: गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित मोढेरा सूर्य मंदिर करीब 1000 साल पुरानी भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम के काल में बने इस मंदिर की खासियत इसकी बारीक नक्काशी, सूर्य कुंड, 52 स्तंभ और सूर्य की किरणों से जुड़ी स्थापत्य योजना है।
धर्म
Ramayan Facts: रामायण की ऐसी रहस्यमयी बातें जिनसे आज भी जुड़े हैं कई सवाल, जानिए अनसुने प्रसंग
Ramayan Facts: रामायण से जुड़े कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। शांता, उर्मिला, लक्ष्मण, शूर्पणखा और रावण से जुड़े 5 रहस्यमयी प्रसंग आज भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ाते हैं।
धर्म
Onam: महाबली ने दिया वचन, विष्णु ने दिया वरदान, जाने ऐसे शुरू हुई ओणम की परंपरा
Onam: ओणम 2026 का त्योहार राजा महाबली और भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी पौराणिक कथा के लिए खास माना जाता है। मान्यता है कि वामन अवतार ने तीन पग भूमि मांगकर महाबली को पाताल लोक भेजा था। महाबली की प्रजा के प्रति प्रेम और समर्पण से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें हर साल धरती पर लौटकर अपनी प्रजा से मिलने का वरदान दिया।
धर्म
सावन में रुद्राक्ष धारण करने से पहले जान लें ये नियम, विधि-विधान से पहनने पर मिलेगा फल
सावन में रुद्राक्ष धारण करना भगवान शिव की कृपा पाने का एक शुभ उपाय माना जाता है। जानिए रुद्राक्ष पहनने की सही विधि, मंत्र और जरूरी नियम, जिनका पालन करने से इसकी पवित्रता बनी रहती है।
धर्म
सावन में क्यों निकाली जाती है कांवड़ यात्रा ? जानिए पहला कांवड़िया कौन था और क्या है पौराणिक मान्यता
सावन में कांवड़ यात्रा निकालने की परंपरा समुद्र मंथन की कथा से जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम को पहला कांवड़िया माना जाता है, हालांकि इसको लेकर अलग-अलग कथाएं प्रचलित हैं।
धर्म
आस्था और भक्ति : जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा बसना, बहुड़ा रथ यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी पर बसना अंचल में भगवान श्री जगन्नाथ की बहुड़ा रथ यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। बसना, बरबसपुर और गोरटेक में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने पूजा-अर्चना कर रथ खींचा तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। हजारों श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के जयघोष के बीच रथ यात्रा में भाग लेकर महाप्रसाद ग्रहण किया।
धर्म
हिंदू धर्म के प्रमुख देवी-देवताओं की अर्धांगिनी कौन हैं, जानिए धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में प्रत्येक देवता के साथ उनकी शक्ति का विशेष महत्व माना गया है। इस लेख में भगवान शिव-पार्वती, विष्णु-लक्ष्मी, राम-सीता, कृष्ण-रुक्मिणी, गणेश-रिद्धि-सिद्धि से लेकर कामदेव-रति सहित प्रमुख देवताओं की पत्नियों के नाम और उनके धार्मिक महत्व को सरल भाषा में बताया गया है।
यात्रा
आध्यात्मिक सफर : तिरुमला दर्शन के साथ करें इन खूबसूरत जगहों की सैर, यादगार बन जाएगी यात्रा
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित तिरुपति न केवल भारत का अपितु वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति का एक मूर्धन्य केंद्र है। भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के पावन धाम तिरुमला के दर्शनार्थ प्रतिवर्ष करोड़ों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। वर्तमान में तिरुपति देवस्थानम (TTD) द्वारा दर्शन व्यवस्था को और अधिक सुगम तथा आधुनिक बनाया गया है, जिसमें स्लॉटेड सर्व दर्शनम (SSD) और विशेष प्रवेश दर्शनम (SED) जैसी डिजिटल प्रणालियाँ प्रभावी हैं।
यात्रा
छत्तीसगढ़ यात्रा : धमतरी के वॉटर स्पोर्ट्स से लेकर वाइल्डलाइफ तक, वीकेंड पर घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 5 जगहें
धमतरी जिला इन दिनों छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। गैंगरेल बांध में एडवेंचर वॉटर स्पोर्ट्स, सीतानदी वन्यजीव अभयारण्य में जंगल सफारी, सिहावा हिल्स में महानदी का उद्गम स्थल और धार्मिक आस्था, माँ अंगारमोती मंदिर की आध्यात्मिक शांति तथा रुद्री के प्राकृतिक पिकनिक स्पॉट पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
यात्रा
तुंगनाथ धाम : बादलों के बीच बसा वह दिव्य स्थान जहाँ प्रकट हुई थीं महादेव की भुजाएं
Tungnath Temple उत्तराखंड के हिमालय में स्थित भगवान शिव का एक अत्यंत पवित्र और ऊँचाई पर स्थित मंदिर है, जो लगभग 3,680 मीटर की ऊँचाई पर है। इसे पंच केदार में तीसरा केदार माना जाता है और यह विश्व के सबसे ऊँचे शिव मंदिरों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की खोज की थी। शिवजी ने बैल का रूप धारण किया और उनके शरीर के विभिन्न भाग पाँच स्थानों पर प्रकट हुए, जिनमें तुंगनाथ में उनकी भुजाएँ (हाथ) प्रकट हुई थीं। इसके साथ ही इस स्थान का संबंध रामायण काल की मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है और पास स्थित Chandrashila को भगवान राम के ध्यान स्थल के रूप में भी माना जाता है।
धर्म
सीता नवमी : दांपत्य सुख, संतान प्राप्ति और पारिवारिक समृद्धि के लिए क्या करें, पढ़िए यहां
वैशाख कृष्ण नवमी को मनाई जाने वाली सीता नवमी माता सीता के प्राकट्य का पावन पर्व है। यह दिन विशेष रूप से दांपत्य सुख, संतान प्राप्ति और पारिवारिक समृद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मिथिला के राजा जनक जब खेत में हल चला रहे थे, तब धरती से एक दिव्य कलश प्रकट हुआ, जिसमें से एक कन्या का जन्म हुआ वही कन्या थीं माता सीता।