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Prescription Drugs Advertisement Rules in India (Image Source: AI Photo)
Prescription Drugs Advertisement Rules in India (Image Source: AI Photo)
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Prescription Drugs: दवाओं के विज्ञापन पर केंद्र सरकार सख्त, नए नियम लागू करने की तैयारी 

Prescription Drugs: केंद्र सरकार डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं के विज्ञापन से जुड़े नियमों को और सख्त करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। प्रस्ताव के तहत शेड्यूल H, H1 और X में शामिल दवाओं के विज्ञापन संबंधी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया जाएगा।

रोशनी पटेल | कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 09 Oct 2026, 03:51 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
 Prescription Drugs: केंद्र सरकार डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं के विज्ञापन से जुड़े नियमों को और सख्त करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। प्रस्ताव के तहत शेड्यूल H, H1 और X में शामिल दवाओं के विज्ञापन संबंधी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया जाएगा। 
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, शेड्यूल H, H1 और X की दवाओं का विज्ञापन करने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होगी। वर्तमान नियमों में विज्ञापन संबंधी प्रतिबंध मुख्य रूप से दवा बनाने वाली कंपनियों पर लागू हैं। अब सरकार दवाओं की बिक्री, भंडारण और वितरण का लाइसेंस रखने वाले कारोबारियों को भी स्पष्ट रूप से इन प्रतिबंधों के दायरे में लाना चाहती है। 

ड्रग्स रूल्स, 1945 में क्या बदलाव करना चाहती है सरकार?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 28 सितंबर 2026 को गजट अधिसूचना G.S.R. 861(E) के जरिए संशोधन का मसौदा जारी किया है। यह प्रस्ताव ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 65 में उप-नियम (22) जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। इस बदलाव के जरिए उन लाइसेंसधारकों पर भी विज्ञापन संबंधी पाबंदियां लागू करने की तैयारी है, जिन्हें दवाओं की बिक्री, स्टॉक रखने, बिक्री के लिए प्रदर्शित करने, बिक्री की पेशकश करने या वितरण करने की अनुमति मिली है।   

किन दवाओं पर लागू होंगे नए प्रस्तावित नियम?

प्रस्तावित संशोधन शेड्यूल H, H1 और X में शामिल दवाओं पर लागू होगा। इन श्रेणियों में ऐसी दवाएं आती हैं, जिन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार डॉक्टर के पर्चे पर ही दिया जाना चाहिए। इनमें कुछ एंटीबायोटिक्स और अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाएं शामिल हैं। इनका इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह और उचित निगरानी में करना जरूरी होता है। सरकार का मानना है कि इन दवाओं के विज्ञापन पर नियंत्रण मजबूत होने से अनधिकृत प्रचार पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।  

दवा बिक्री और वितरण से जुड़े कारोबारियों पर भी लागू होंगी पाबंदियां

मंत्रालय के प्रस्ताव का एक प्रमुख उद्देश्य दवा आपूर्ति से जुड़ी पूरी व्यवस्था में विज्ञापन संबंधी नियमों की निगरानी बढ़ाना है। अभी तक दवा निर्माता कंपनियों पर लागू प्रतिबंधों और दवाओं की बिक्री या वितरण करने वाले लाइसेंसधारकों से जुड़े प्रावधानों के बीच अंतर था। नए प्रस्ताव के जरिए इस अंतर को दूर करने की कोशिश की जा रही है, ताकि दवाओं के प्रचार और बिक्री से जुड़े विभिन्न स्तरों पर नियामक व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सके। 

DTAB की 93वीं बैठक में हुई थी चर्चा

दवाओं के विज्ञापन को लेकर नियमों में बदलाव का मुद्दा ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की 93वीं बैठक में भी उठाया गया था। यह बैठक 16 फरवरी 2026 को आयोजित हुई थी। इसमें दवाओं की बिक्री और वितरण का लाइसेंस रखने वाले व्यक्तियों एवं संस्थानों के विज्ञापनों को नियंत्रित करने के लिए उचित प्रावधान बनाने की जरूरत पर चर्चा हुई थी। इसी विचार-विमर्श के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियमों में संशोधन का मसौदा तैयार किया।  

आम लोगों और संबंधित पक्षों से मांगे सुझाव

स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधन पर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव तथा आपत्तियां आमंत्रित की हैं। गजट में मसौदा नियमों की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध कराए जाने की तारीख से 30 दिनों के भीतर अपनी राय भेजी जा सकती है। निर्धारित अवधि में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर केंद्र सरकार विचार करेगी। इसके बाद नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल यह संशोधन प्रस्ताव के स्तर पर है।  
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