Raipur Child Death: राजधानी के बोरियाखुर्द इलाके से एक बेहद हृदयविदारक खबर सामने आई है। शनिवार को यहां पूजा सामग्री विसर्जित करने गए एक परिवार का सात वर्षीय मासूम नाले के तेज बहाव में बह गया। पिता और बहन की आंखों के सामने हुए इस हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया है। पुलिस और रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद बच्चे को ढूंढ निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के मुताबिक, बोरियाखुर्द के श्रद्धा विहार में रहने वाले लक्ष्मीनारायण पवार शनिवार को अपने जुड़वां बच्चों—बेटा त्रिवेंद्र और एक बेटी—के साथ पास के तालाब में पूजा सामग्री विसर्जित करने गए थे। विसर्जन के बाद तीनों पैदल ही घर लौट रहे थे। रास्ते में तालाब के पास से गुजर रहे एक गहरे नाले को देखकर त्रिवेंद्र पैर धोने के लिए उसके किनारे रुका। जैसे ही वह पानी के पास पहुंचा, अचानक उसका पैर फिसल गया। बारिश के कारण नाले में पानी का बहाव बेहद तेज था, जिससे मासूम संभल नहीं पाया और देखते ही देखते पानी की तेज धार में ओझल हो गया।
पिता के सामने बह गया मासूम
बेटे को बहता देख पिता लक्ष्मीनारायण ने जान की बाजी लगाकर उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन पानी के थपेड़े इतने तेज थे कि मासूम उनकी पकड़ में नहीं आया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर दौड़े और अपने स्तर पर तलाश शुरू की, पर तब तक बच्चा काफी दूर बह चुका था। घटना की सूचना मिलते ही टिकरापारा थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर मासूम त्रिवेंद्र को पानी से बाहर निकाला गया। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।CCTV में कैद हुई पूरी घटना
यह दर्दनाक हादसा पास ही लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि पिता दोनों बच्चों को लेकर लौट रहे थे। नाले के पास रुककर पिता खुद त्रिवेंद्र का पैर धुलाने की कोशिश कर रहे थे, तभी अचानक बच्चे का संतुलन बिगड़ा और वह गहरे पानी में समा गया। सीसीटीवी में पिता का बेबस होकर चिल्लाना और लोगों का मदद के लिए दौड़ना साफ नजर आ रहा है।
बारिश में फिर जागे 'मौत के नाले'
इस हादसे ने एक बार फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के मौसम में शहर के खुले नाले और बिना घेराबंदी वाले जलस्रोत लोगों के लिए काल साबित हो रहे हैं। पानी भरने के कारण अक्सर सड़कों और खुले नालों का अंतर खत्म हो जाता है, जिससे जरा सी चूक जान पर भारी पड़ जाती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर नाले के किनारे लोहे की जाली या सुरक्षा घेरा होता, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

