महासमुंद शहर की एक सदी से भी अधिक पुरानी ऐतिहासिक शिक्षण संस्था बृजराज पाठशाला को सामाजिक एवं राजनीतिक संगठन क्रांतिकारी संगठन (काका) की ओर से तत्कालीन महाराजा बृजराज सिंहदेव का छायाचित्र और उनके जीवन व उपलब्धियों से जुड़ा जीवन-वृतांत फ्रेम भेंट किया गया।
इस अवसर पर संगठन ने पाठशाला की प्रधान पाठिका श्रीमती गोमती साहू को महाराजा बृजराज सिंहदेव की तस्वीर और उनके जीवन से संबंधित जानकारी वाला प्रिंट फ्रेम सौंपा। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को क्षेत्र के इतिहास और शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तित्व से परिचित कराना है।
1909 में हुई थी पाठशाला की स्थापना
बताया गया कि आजादी से पहले खरीयार रियासत के राजा महाराजा बृजराज सिंहदेव की 1 नवंबर 1906 को महासमुंद में मृत्यु हुई थी। इसके बाद उनके वंश के तत्कालीन राजा ने उस समय के तहसील परिसर, जिसे खरीयार बाड़ा के नाम से जाना जाता था, को क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार के लिए पाठशाला के रूप में समर्पित किया था। इसके बाद वर्ष 1909 में बृजराज पाठशाला की स्थापना हुई। पिछले ग्यारह दशकों से अधिक समय में इस ऐतिहासिक संस्था ने कई राजनेताओं, नौकरशाहों, उद्योगपतियों और बुद्धिजीवियों को शिक्षा प्रदान की है।
बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी रहे मौजूद
फ्रेम भेंट कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी हुकूम चंद्राकर, पिटियाझर सोसाइटी के अध्यक्ष रमेश साहू, कृषक अनिरुद्ध चंद्राकर, ओम प्रकाश डोंगरे, काका संगठन के अध्यक्ष डॉ. उमेश सहित पाठशाला के शिक्षकगण और विद्यार्थी मौजूद रहे।
इस दौरान श्रीमती मनीषा साहू, सुरेंद्र चंद्राकर, देवेंद्र ठाकुर, श्रीमती स्वाति सिन्हा और श्रीमती बिमलेश्वरी दुबे समेत अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ऐतिहासिक संस्था और महाराजा बृजराज सिंहदेव के योगदान को याद किया गया।