संसद के उच्च सदन राज्यसभा में गुरुवार को सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त नोकझोंक देखने को मिली। बात तब बढ़ गई जब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की एक टिप्पणी पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भड़क गए। खरगे ने तल्ख तेवर अपनाते हुए साफ कहा कि रिजिजू उन्हें संसदीय परंपराएं और नियम न समझाएं, क्योंकि वे खुद नियमों से भली-भांति परिचित हैं। सदन के भीतर माहौल उस वक्त गर्मा गया जब रिजिजू के बयानों का जवाब देने के लिए खरगे खड़े हुए।
मेरे बोलने का क्रम मेरा अधिकार
खरगे ने कहा, "क्या अब मुझे रिजिजू से नियम-कायदे सीखने की जरूरत है? नियम मैं भी अच्छी तरह जानता हूं। जब आप लोग सभापति के चैंबर में जाते हैं, तब भी नियमों की ही बात करते हैं।" उन्होंने आगे सवाल दागा कि अगर वे सदन में अपनी बात पढ़कर नहीं रखेंगे तो क्या करेंगे? "क्या मैं वह पढूं जो आपकी तरफ से मुझे लिखकर दिया जाएगा? मैं क्या बोलूं, कब बोलूं और कैसे बोलूं—यह पूरी तरह मेरा अधिकार है।" हाल ही में संसद पहुंचे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पर रिजिजू की टिप्पणी का भी खरगे ने करारा जवाब दिया।
गृह मंत्री को सदन में आकर देना चाहिए बयान
रिजिजू ने कहा था कि नए सदस्यों को पहले संसदीय नियमों को ढंग से पढ़ना चाहिए। इस पर खरगे ने पवन खेड़ा का पक्ष लेते हुए उन्हें पढ़ा-लिखा और समझदार नेता बताया। उन्होंने सरकार पर विपक्ष के सांसदों का अनादर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्तापक्ष इस मुगालते में न रहे कि सारा ज्ञान सिर्फ उन्हीं के पास है। राज्यसभा में मचे इस घमासान के बीच खरगे ने मांग रखी कि संबंधित गृह मंत्री को खुद सदन में आकर बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष देश और जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दे उठा रहा है, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय भागने की फिराक में रहती है।
अरूण जेटली के बयान का जिक्र
खरगे ने कहा, "मंत्री जी आएं और अपनी बात रखें, उसके बाद हम पूरी बहस के लिए तैयार हैं।" अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए खरगे ने राज्यसभा के नियमों का हवाला दिया और कहा कि बिना पूर्व सूचना दिए किसी भी सदस्य पर आपराधिक या मानहानिकारक आरोप नहीं लगाए जा सकते। इसी दौरान उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. अरुण जेटली के एक चर्चित बयान का भी जिक्र किया।विपक्ष का काम सवाल पूछना
खरगे ने याद दिलाया कि लोकतंत्र में सदन के भीतर विरोध और व्यवधान पैदा करना भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का ही एक हिस्सा माना गया है। सदन में लगातार होते हंगामे और नारेबाजी के बीच खरगे ने दोहराया कि विपक्ष का काम सवाल पूछना है और सरकार को देश के सामने जवाबदेह होना ही पड़ेगा।