US Iran Conflict: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के साथ ही यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी तेल बाजार में हलचल
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े पांच कच्चे तेल के टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाए जाने के जवाब में की गई। अमेरिकी कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी देखने को मिली। सोमवार के मुकाबले इसमें करीब 2.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और कीमत 99 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई।
भारत के आयात बिल पर बढ़ेगा दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। तेल महंगा होने से भारत को समान मात्रा में कच्चा तेल खरीदने के लिए अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। इससे व्यापार घाटा बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आने की संभावना रहती है। इसके अलावा महंगे कच्चे तेल का असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन खर्च और उद्योगों की उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है। इसका प्रभाव धीरे-धीरे आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है और महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है।पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नजर
भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में पिछले तीन महीने से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। पिछली बार मई में कीमतों में संशोधन किया गया था, जब पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए थे। हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों के मार्जिन पर इसका असर पड़ सकता है।हूती हमलों से बढ़ा आपूर्ति संकट
मध्य-पूर्व में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने भी तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है। हूतियों ने सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया है, जिससे क्षेत्र में तेल परिवहन और सुरक्षा को लेकर जोखिम बढ़ गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक बाजारों में तेल की आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।तेल कीमतें 100 डॉलर के पार जाने की आशंका
विश्लेषकों ने आने वाले समय के लिए कच्चे तेल की कीमतों के अनुमान बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि अगर मध्य-पूर्व में संघर्ष जारी रहा और तेल आपूर्ति प्रभावित हुई तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। यूरेशिया ग्रुप समेत कई विशेषज्ञ संस्थानों का मानना है कि चीन की तेल मांग में सुधार और पश्चिम एशिया में जारी तनाव आने वाले महीनों में बाजार पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

