30 दिनों में मांगे गए सुझाव और आपत्तियां
कैसा होगा परिषद का ढांचा?
सरकार द्वारा तैयार प्रारूप के अनुसार यह उच्चस्तरीय परिषद राज्य के कई प्रमुख मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों का एक साझा मंच होगी:
अध्यक्ष: मुख्यमंत्री स्वयं इस परिषद के अध्यक्ष होंगे।
उपाध्यक्ष: पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाएगी।
सदस्य (मंत्री वर्ग): लोक निर्माण (PWD), राजस्व, वन, वित्त और कृषि विभाग सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्रियों को इसमें सदस्य बनाया जाएगा।
सदस्य (प्रशासनिक वर्ग): राज्य के मुख्य सचिव, पंचायत विभाग के सचिव, राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष और योजना के आयुक्त भी इस परिषद का हिस्सा रहेंगे।
धरातल पर क्या काम करेगी यह परिषद?
ग्रामीण इलाकों में रोजगार और विकास कार्यों को गति देने के लिए यह परिषद कई अहम जिम्मेदारियां संभालेगी:
कार्यों की सीधी समीक्षा: जिलों में चल रहे ग्रामीण रोजगार कार्यों की प्रगति और जमीनी स्थिति का आकलन करना।
समय पर भुगतान: मनरेगा मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान बिना किसी देरी के समय पर मिले, इसकी निगरानी करना।
गुणवत्ता जांच: गांवों में बनने वाली सड़कों, तालाबों और अन्य परिसंपत्तियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
बजट और समन्वय: केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और बजट आवंटन से जुड़े नीतिगत फैसले लेना।
सरकार के इस कदम से राज्य में ग्रामीण रोजगार योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आने और प्रशासनिक फैसलों में तेजी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

