"रोजगार गारंटी" के लिए 18 परिणाम मिले
गरियाबंद
नई रफ्तार : 7 पंचायतों में आधुनिक बकरी शेड से बढ़ेगी पशुपालकों की आय
जिला प्रशासन ने मनरेगा के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए 7 ग्राम पंचायतों में लगभग 3 लाख रुपये प्रति इकाई लागत से आधुनिक बकरी पालन शेड स्वीकृत किए हैं। इन शेडों का निर्माण वैज्ञानिक मॉडल पर किया जाएगा, जिससे पशुओं को मौसम और बीमारियों से सुरक्षा मिलेगी तथा उत्पादन और आय में वृद्धि होगी। योजना में बकरी पालन के साथ देशी मुर्गी पालन को भी एकीकृत किया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे। साथ ही पशुपालकों को चारा, स्वास्थ्य सेवाएं और तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह पहल रोजगार सृजन, स्थायी परिसंपत्ति निर्माण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
राज्य सरकार
सफलता : बासीन में 99% पौधे जीवित, ग्रामीण विकास को नई उड़ान
नारायणपुर जिले के ओरछा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदला के आश्रित ग्राम बासीन में मनरेगा योजना के तहत फलदार पौधों का सफल रोपण किया गया है। उद्यान विभाग द्वारा लगाए गए उच्च गुणवत्ता वाले आम के पौधों में लगभग 99 प्रतिशत पौधे स्वस्थ और जीवित पाए गए हैं।
राज्य सरकार
समीक्षा बैठक : सीईओ मंडावी ने मनरेगा, आवास और स्वच्छता कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश
जनपद पंचायत महासमुंद के सीईओ श्री बी.एस. मंडावी ने झलप क्लस्टर की पंचायतों के सचिवों, ग्राम रोजगार सहायकों और आवास मित्रों की समीक्षा बैठक लेकर मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मुख्यमंत्री आवास योजना एवं स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। साथ ही पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने पर जोर दिया।
राज्य सरकार
विकास को नई दिशा : मनरेगा की आजीविका डबरी से बदली किसान की किस्मत
सरगुजा जिले के ग्राम अडची में मनरेगा के तहत बनी आजीविका डबरी किसान देवानंद के लिए आय और सिंचाई का मजबूत साधन बन गई है। लगभग 2 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस डबरी से वे खेती की सिंचाई के साथ-साथ मत्स्य पालन भी कर रहे हैं, जिससे उनकी अतिरिक्त आय बढ़ रही है।
छत्तीसगढ़
बलरामपुर : धंधापुर में भ्रष्टाचार की रोपणी, 15 लाख स्वाहा और 90% पौधे मृत
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के धंधापुर गांव में उद्यान विभाग और मनरेगा के तहत हुए पौधरोपण कार्य पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। करीब 15 लाख रुपये की लागत से लगाए गए 1125 फलदार पौधों में से लगभग 90% देखरेख, सिंचाई और उचित व्यवस्था के अभाव में सूख गए। ग्रामीणों का आरोप है कि काम केवल कागजों पर पूरा दिखाया गया, जबकि मौके पर न तो पर्याप्त खाद-कीटनाशक का उपयोग हुआ और न ही बोरवेल की मरम्मत कर सिंचाई की व्यवस्था की गई। फेंसिंग निर्माण में भी घटिया सामग्री और गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।
शिक्षा का नया रूप : छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र बने ‘पहली पाठशाला’ के सशक्त उदाहरण
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में आंगनबाड़ी केंद्र अब पारंपरिक पोषण केंद्रों से आगे बढ़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित हो रहे हैं। ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड (BALA)’ पहल के तहत बनाए गए आधुनिक भवनों में दीवारों, फर्श और सीढ़ियों को शिक्षण सामग्री में बदल दिया गया है, जिससे बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं। मनरेगा के माध्यम से इन केंद्रों के निर्माण ने ग्रामीणों को रोजगार भी दिया है, जिससे आर्थिक सशक्तिकरण और पलायन में कमी आई है।