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धर्म
प्रदोष व्रत : जुलाई में दो बार रखा जाएगा प्रदोष व्रत, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व
जुलाई 2026 में प्रदोष व्रत 12 और 26 जुलाई को रखा जाएगा। भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है। जानें दोनों व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और संपूर्ण पूजा विधि।
धर्म
Jagannath Rath Yatra : यात्रा शुरू होने से पहले जानें इसकी प्रमुख परंपराएं
16 जुलाई 2026 को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आस्था और परंपरा का भव्य उत्सव है। रथ निर्माण, छेरा पहरा, गुंडिचा मार्जन, बहुड़ा यात्रा और तीनों रथों के धार्मिक महत्व को जानकर श्रद्धालु इस यात्रा का महत्व और बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
धर्म
आषाढ़ मास का शुभारंभ : भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की आराधना का पावन समय शुरू
पूर्णिमा तिथि के समापन के साथ हिंदू पंचांग का पवित्र आषाढ़ मास शुरू हो गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा, दान-पुण्य, जप-तप और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व रखता है। आषाढ़ मास में आने वाली देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का भी आरंभ होता है, जिसे सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान देशभर के विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों का क्रम शुरू हो गया है।
धर्म
गंगा दशहरा : आस्था का संगम, सरयू से गंगा घाटों में भीड़
गंगा दशहरा के अवसर पर देशभर के प्रमुख गंगा घाटों और अयोध्या की सरयू नदी में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। वाराणसी, हरिद्वार, प्रयागराज, ऋषिकेश और पटना सहित कई धार्मिक स्थलों पर लोगों ने पवित्र स्नान कर मां गंगा की पूजा-अर्चना की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला यह पर्व मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस के रूप में माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और पूजा करने से पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होने की मान्यता है। घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, वहीं कई संगठनों ने गंगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
विदेश
सूर्यग्रहण : NASA ने बताया 2027 का सूर्यग्रहण बेहद दुर्लभ
NASA के अनुसार 2 अगस्त 2027 को होने वाला पूर्ण सूर्यग्रहण सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण होगा। यह 6 मिनट से ज्यादा समय तक दिखाई देगा और यूरोप, अफ्रीका व मध्य पूर्व के कई देशों में इसका शानदार नजारा देखने को मिलेगा।
धर्म
पद्मिनी एकादशी : हजारों वर्षों की तपस्या के बाद पूरी हुई मनोकामना
पद्मिनी एकादशी की पौराणिक कथा के अनुसार राजा कृतवीर्य और रानी पद्मिनी ने संतान प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की। माता अनुसूया की सलाह पर रानी ने पद्मिनी एकादशी व्रत रखा, जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पराक्रमी पुत्र कार्तवीर्य अर्जुन का वरदान दिया।
धर्म
अधिक मास : आध्यात्मिक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का पर्व है पद्मिनी एकादशी
पद्मिनी एकादशी को भगवान विष्णु और भगवान पुरुषोत्तम को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में आने वाली इस एकादशी पर विधि-विधान से पूजा, उपवास, दीपदान और मंत्र जाप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक संकट दूर होते हैं।
धर्म
यात्रा : कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर बड़ा ऐलान, कंप्यूटरीकृत ड्रॉ से चुने गए श्रद्धालु
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए 1000 श्रद्धालुओं का चयन कंप्यूटरीकृत ड्रॉ प्रक्रिया के जरिए किया गया है। विदेश मंत्री एस जयसंकर ने चयन प्रक्रिया पूरी की, जिसे पूरी तरह पारदर्शी, रैंडम और जेंडर-बैलेंस्ड बताया गया। जून से अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा में श्रद्धालु लिपुलेख पास और नाथू ला मार्ग से माउंट कैलाश और लेक मानसरोवर के दर्शन के लिए जाएंगे। इस बार यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और मोटरेबल रूट के जरिए आसान बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
धर्म
पुरुषोत्तम मास शुरू : भक्ति और पुण्य का पावन महीना शुरू, पुरुषोत्तम मास में दान-पुण्य का बढ़ा महत्व
नवापारा-राजिम में 17 मई से 15 जून तक चलने वाले पुरुषोत्तम मास को लेकर धार्मिक उत्साह बढ़ गया है। ज्योतिष भूषण पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि सूर्य और चंद्र की गति में अंतर के समायोजन के लिए अधिक मास की व्यवस्था की गई है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने “पुरुषोत्तम मास” नाम दिया। इस दौरान जप, तप, दान और भगवान की भक्ति का फल हजार गुना अधिक मिलने की मान्यता है। नगर और चंपारण धाम में कथा, भजन, झांकियां और विभिन्न धार्मिक आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
रायपुर संभाग
उमड़ी आस्था : वट सावित्री व्रत पर सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर मांगी पति की लंबी उम्र
नवापारा-राजिम में ज्येष्ठ अमावस्या पर वट सावित्री व्रत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। श्रीराम जानकी मंदिर में सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पुजारी परमेश्वर मिश्रा ने सावित्री-सत्यवान की कथा सुनाई। इस वर्ष शनिश्चरी अमावस्या और शनि जयंती के दुर्लभ संयोग ने पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ा दिया।
वट वृक्ष की पूजा कर पति और परिवार की सुख-समृद्धि की मांगी कामना
आरंग क्षेत्र के विभिन्न गांवों में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
धर्म
अखंड सौभाग्य की कामना : महासमुंद में श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया वट सावित्री व्रत
महासमुंद में वट सावित्री व्रत, शनि अमावस्या और शनि जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना की, वहीं श्रद्धालुओं ने शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना की।