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सेहत
कैंसर : लगातार खांसी और सांस फूलना हो सकता है लंग कैंसर का संकेत
लंग कैंसर दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में से एक है, जिसकी पहचान अक्सर देर से होती है। लगातार खांसी, खून आना, सांस फूलना, वजन घटना, कमजोरी और सीने में दर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं। धूम्रपान, वायु प्रदूषण और कुछ आनुवंशिक कारण इसके जोखिम को बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस गंभीर बीमारी से बचाव और सफल उपचार संभव है।
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जागरूकता : धूम्रपान निषेध दिवस पर छात्र-छात्राओं ने निकाली रैली, चित्रकला प्रतियोगिता में दिखी रचनात्मकता
महासमुंद में अंतर्राष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस के अवसर पर समाज कल्याण विभाग, शासकीय जी.एन.एम. महाविद्यालय एवं शांति मैत्री ग्रामीण विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम के तहत सेमीनार, नशामुक्ति रैली, चित्रकला प्रतियोगिता एवं शपथ ग्रहण जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया।
सेहत
रजोनिवृत्ति : मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग है खतरे की घंटी, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
पीरियड्स के समय के अलावा होने वाली ब्लीडिंग को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना महिलाओं के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, संबंध बनाने के बाद रक्तस्राव, अत्यधिक मासिक धर्म या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग जैसी स्थितियां कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती हैं। खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद इस तरह के लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
सेहत
कोन्जैक : वजन घटाने और ब्लड शुगर कंट्रोल में कारगर हो सकता है कोन्जैक
दुनियाभर में मोटापा और मधुमेह तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं बन चुकी हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों का ध्यान अब प्राकृतिक खाद्य पदार्थों और पौधों पर केंद्रित हो रहा है। हाल ही में प्रकाशित शोधों में दक्षिण-पूर्व एशिया में सदियों से उपयोग किए जाने वाले पौधे ‘कोन्जैक’ (Konjac) सूरन /जिमीकंद/ओल वजन नियंत्रण, ब्लड शुगर प्रबंधन और कोलेस्ट्रॉल कम करने में संभावित रूप से लाभकारी बताया गया है।
सेहत
औषधीय गुण : तनाव से नींद तक, केसर दूध के कई फायदे, ज्यादा पीना हो सकता है नुकसान
केसर वाला दूध स्वास्थ्य के लिए कई तरह से फायदेमंद माना जाता है। यह इम्यूनिटी बढ़ाने, तनाव कम करने, बेहतर नींद लाने, पाचन सुधारने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद कर सकता है। वहीं इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि केसर का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि अधिक सेवन से एलर्जी, पेट संबंधी समस्याएं, ब्लड प्रेशर में बदलाव और शरीर में अत्यधिक गर्मी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
सेहत
स्वास्थ्य : भीषण गर्मी और गलत लाइफस्टाइल बढ़ा रही किडनी स्टोन का खतरा
देशभर में युवाओं के बीच किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार अत्यधिक गर्मी, डिहाइड्रेशन, कम पानी पीना, जंक फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स और अनियमित लाइफस्टाइल इसके बड़े कारण बन रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 20 से 40 साल की उम्र के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। पेट और कमर में दर्द, पेशाब में जलन और यूरिन इंफेक्शन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टरों ने लोगों को पर्याप्त पानी पीने, संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है।
सेहत
अनियमित खानपान : बढ़ रहीं बीमारियां, हेल्दी डाइट अपनाने की सलाह
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों का डेली फूड रूटीन तेजी से बिगड़ रहा है। देर रात खाना, सुबह नाश्ता छोड़ना, जंक फूड का अधिक सेवन और पर्याप्त पानी नहीं पीने जैसी आदतें लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अनियमित खानपान की वजह से मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और पेट संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सुबह पौष्टिक नाश्ता, संतुलित दोपहर का भोजन और रात में हल्का खाना शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने लोगों को जंक फूड कम खाने, पर्याप्त पानी पीने, नियमित व्यायाम करने और घर का बना भोजन प्राथमिकता देने की सलाह दी है।
सफलता के लिए मेहनत : विद्यार्थियों की भविष्य की आकांक्षाओं पर मुख्यमंत्री की सराहना
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में कक्षा 10वीं और 12वीं की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों से मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके सपनों, पढ़ाई की दिनचर्या और भविष्य की योजनाओं के बारे में जाना तथा उन्हें मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है और सफलता के लिए नियमित अभ्यास, समय प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी हैं। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और समर्पण से आगे बढ़कर सफलता हासिल की जा सकती है।
सेहत
याददाश्त : कमजोर होने के पीछे क्या हैं कारण? जानिए बचाव के तरीके
भारत में भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया और अल्जाइमर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में लाखों बुजुर्ग इससे प्रभावित हैं। बढ़ती उम्र, तनाव, खराब जीवनशैली, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और नींद की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, नियमित व्यायाम, मानसिक गतिविधियां और संतुलित आहार से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बादाम, अखरोट, हरी सब्जियां, फल, दूध, मछली और ओमेगा-3 युक्त भोजन दिमाग को स्वस्थ रखने में मददगार माना जाता है।
सेहत
किडनी रोग का खतरा : 40 की उम्र के बाद इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
40 की उम्र के बाद किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं देती, इसलिए अक्सर देर से पता चलती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, कम पानी पीना, ज्यादा नमक और दर्द निवारक दवाओं का अधिक उपयोग इसके प्रमुख कारण हैं। शुरुआती संकेतों में थकान, सूजन, पेशाब में बदलाव और रात में बार-बार पेशाब आना शामिल हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 40 के बाद नियमित किडनी जांच करानी चाहिए और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है।
सेहत
हृदय रोग : सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती, हार्ट अटैक और दिल की बीमारियां, जानें कारण और बचाव
हृदय रोग आज के समय में एक तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या है, जिसका मुख्य कारण खराब जीवनशैली, असंतुलित आहार, तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और मोटापा है। यह अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके प्रमुख प्रकारों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, अरिदमिया और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं, जो दिल की कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में सीने में दर्द, सांस फूलना, थकान, चक्कर आना और अनियमित धड़कन शामिल हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
छत्तीसगढ़
8वें पोषण पखवाड़ा के तहत आयुष विभाग द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य व मस्तिष्क विकास पर केंद्रित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
छत्तीसगढ़ के जिला आयुष विभाग द्वारा 9 से 23 अप्रैल 2026 तक 8वें पोषण पखवाड़ा के तहत जनजागरूकता और स्वास्थ्य संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस वर्ष का मुख्य विषय जीवन के पहले 6 वर्षों में बच्चों के मस्तिष्क विकास को अधिकतम करना है। इसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयुष संस्थानों के माध्यम से सुवर्णप्राशन, गर्भिणी परिचर्या, योग, आहार-जीवनशैली मार्गदर्शन और स्वास्थ्य परामर्श जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य कुपोषण कम करना और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।