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सिवान की आस्था बनीं BPSC अफसर
सिवान की आस्था बनीं BPSC अफसर
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आस्था ने लिखी सफलता की नई कहानी, अब संभालेंगी ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी

आस्था ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर अफसर बनने का सपना पूरा किया। परिवार की इच्छा डॉक्टर बनने की थी, लेकिन उन्होंने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। UPSC में असफलता के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और सेल्फ स्टडी के जरिए BPSC परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
08 Aug 2026, 11:28 AM
नई दिल्ली

सफलता अक्सर अपने रास्ते पर चलने की हिम्मत से मिलती है, भले ही दूसरों की उम्मीदें कुछ और हों। बिहार के सिवान की आस्था की कहानी दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और लगातार मेहनत की मिसाल है। परिवार चाहता था कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन आस्था ने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया। UPSC में असफलता के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और BPSC में सफलता हासिल कर अफसर बनने का सपना पूरा किया। आस्था बिहार के सिवान जिले की रहने वाली हैं। शुरुआती पढ़ाई उन्होंने सिवान से पूरी की, इसके बाद सातवीं कक्षा में दिल्ली-NCR आ गईं। उन्होंने 10वीं में 98 प्रतिशत और 12वीं में 93 प्रतिशत अंक हासिल किए। 

सिवान से दिल्ली तक का सफर

आगे उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के गार्गी कॉलेज से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। कोविड काल में एक साल बिहार लौटने के बाद वह दोबारा दिल्ली आकर अपनी पढ़ाई जारी रखीं। आस्था के परिवार की इच्छा थी कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन उन्होंने अपनी रुचि और लक्ष्य के अनुसार सिविल सेवा को चुना। जामिया मिलिया इस्लामिया से मास्टर्स की पढ़ाई के दौरान उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की।

बिहार के सिवान की हैं आस्था, दिल्ली यूनिवर्सिटी के गार्गी काॅलेज से की पढ़ाई
सिवान की बेटी आस्था की सफलता की कहानी

UPSC और BPSC की तैयारी

स्कूल के प्रिंसिपल और इकोनॉमिक्स व हिस्ट्री के शिक्षकों से मिले प्रोत्साहन ने उन्हें अधिकारी बनने के सपने की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आस्था ने साल 2022 में अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के UPSC और BPSC दोनों परीक्षाओं की तैयारी की। करीब दो साल तक उन्होंने UPSC के पूरे सिलेबस को कवर किया और लगातार मेहनत जारी रखी।

BPSC को बनाया सफलता का रास्ता

साल 2023 में आस्था ने UPSC परीक्षा का गंभीर प्रयास किया, लेकिन वह प्रारंभिक परीक्षा में सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय BPSC की तैयारी पर फोकस किया। करीब 4-5 महीने की रणनीतिक तैयारी के बाद उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में BPSC परीक्षा पास कर ली। आस्था ने अपनी तैयारी के दौरान रोजाना 8-9 घंटे पढ़ाई की। उन्होंने किताबों के साथ टेस्ट सीरीज, अखबार पढ़ने और करेंट अफेयर्स पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कोचिंग के बजाय सेल्फ स्टडी को प्राथमिकता दी और अपनी तैयारी को लगातार बेहतर बनाया।

आस्था ने बच्चों को पढ़ाया और खुद 8-9 घंटे की पढ़ाई
असफलता के बाद भी नहीं टूटा हौसला

तैयारी की खास सलाह

आस्था का मानना है कि सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को शुरुआती डेढ़ साल में सिलेबस और बेस मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने स्टैंडर्ड किताबों, नियमित अखबार पढ़ने और मेन्स परीक्षा की तैयारी को जरूरी बताया। साथ ही उन्होंने बदलते समय में प्लान बी रखने और अपनी कोई हॉबी विकसित करने की सलाह दी।

BPSC में सफलता के बाद 

आस्था ने BPSC परीक्षा के तीनों चरणों प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में सफलता हासिल की। उनकी विभागीय रैंक 259 रही। उन्हें बिहार ग्रामीण विकास सेवा (BRDS) के लिए चुना गया है और शुरुआत में वह ग्रामीण विकास अधिकारी (RDO) के पद पर कार्य करेंगी। आस्था की सफलता से उनका पूरा परिवार गौरवान्वित है। उनके दादा और पिता ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अब वह ग्रामीण विकास अधिकारी के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगी। 

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