Chhattisgarh Illegal Liquor: दूसरे राज्यों की बोतलों पर छत्तीसगढ़ का होलोग्राम लगा कर बेचने का बड़ा खुलासा
Chhattisgarh Illegal Liquor: छत्तीसगढ़ में अवैध शराब तस्करी का संगठित नेटवर्क सामने आया है। तस्कर दूसरे राज्यों की शराब लाकर उस पर स्थानीय लेबल, ढक्कन और नकली होलोग्राम लगाकर बेच रहे थे। राजनांदगांव, महासमुंद, कांकेर, कबीरधाम और सूरजपुर समेत कई जिलों में कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में शराब और पैकिंग सामग्री बरामद हुई।
Chhattisgarh Illegal Liquor: छत्तीसगढ़ में अवैध शराब का कारोबार अब सिर्फ एक सीमा से शराब लाकर बेचने तक सीमित नहीं रह गया है। साल 2026 में आबकारी और पुलिस कार्रवाई में इस
काले धंधे का एक बेहद संगठित और नया तरीका सामने आया है। अब तस्कर सिर्फ दूसरे राज्यों से शराब ला नहीं रहे, बल्कि राज्य में लाकर उसकी पूरी पहचान ही बदल दे रहे हैं। जनवरी से सितंबर के बीच राजनांदगांव, डोंगरगढ़, कबीरधाम, महासमुंद, कांकेर, मोहला और सूरजपुर जैसे जिलों में हुई सिलसिलेवार छापेमारी में इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ। मौके से न सिर्फ मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड की शराब जब्त की गई, बल्कि भारी मात्रा में खाली बोतलें, ढक्कन, नकली लेबल और फर्जी होलोग्राम भी बरामद किए गए।
पैकिंग बदलकर पहचान मिटाने का खेल: क्या है होलोग्राम का रोल?
सरकारी आबकारी व्यवस्था में शराब की बोतलों पर लगा 'होलोग्राम' एक तरह का सिक्योरिटी फीचर होता है, जो उसकी प्रामाणिकता तय करता है। यदि दूसरे राज्य की शराब को उसी पैकिंग में बेचा जाए तो पकड़े जाने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। इसी से बचने के लिए तस्करों ने नया रास्ता निकाला। वे बाहरी राज्यों से सस्ती शराब लाकर उस पर छत्तीसगढ़ का लोकल लेबल, ढक्कन और
नकली होलोग्राम चिपका देते हैं, ताकि देखने में वह यहीं की लाइसेंसी दुकानों की शराब लगे।
अंतरराज्यीय नेटवर्क: शराब कहीं से, पैकिंग सामग्री कहीं और से
जून में डोंगरगढ़ में हुई कार्रवाई ने इस अंतरराज्यीय नेटवर्क की परतें खोल दीं। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि इस धंधे की कोई एक फिक्स लैब या यूनिट नहीं है:
शराब की आवक: मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों से।
पैकिंग मटेरियल: दिल्ली, पुणे और नागपुर से फर्जी होलोग्राम, ढक्कन और स्टिकर मंगवाए जाते थे।
असेंबली: किसी सुनसान ठिकाने पर बाहरी शराब को छत्तीसगढ़ की बोतल और होलोग्राम का रूप देकर आगे सप्लाई के लिए तैयार किया जाता था।
अंतरप्रांतीय तस्करों का गढ़ क्यों बना डोंगरगढ़?
डोंगरगढ़ की भौगोलिक स्थिति छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमाओं से सटी हुई है। छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट से शराब लाकर डोंगरगढ़ के रास्ते खपाना तस्करों के लिए आसान होता है। सीमा पास होने की वजह से शराब को ज्यादा दूर ले जाने का जोखिम नहीं रहता और री-बॉटलिंग कर मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है।
कार्रवाई की प्रमुख कड़ियां: कहां-कहां क्या मिला?
महासमुंद (सरायपाली): अगस्त में एक कार से 25 पेटियों में 1,192 पौवा 'गोवा' शराब पकड़ी गई। 25 सितंबर तक चली विस्तृत जांच में कुल 3,229 लीटर शराब (कीमत करीब 22.15 लाख रुपए) जब्त कर 7 आरोपियों को दबोचा गया।
भानुप्रतापपुर (कांकेर): सितंबर में हुई कार्रवाई में 4,409 खाली पौवे, 3,380 ढक्कन, 105 पत्ते स्टिकर-होलोग्राम और जम्मू स्पेशल शराब के भरे पौवे मिले। इतनी बड़ी मात्रा में पैकिंग मटेरियल मिलने से साफ है कि री-बॉटलिंग का नेटवर्क काफी गहरा है।
राजनांदगांव-डोंगरगढ़: सितंबर के अंतिम सप्ताह में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाकर 9,600 बोतल शराब जब्त की गई। इस पूरे मामले में कुल 14 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
सूरजपुर: यहां का पैटर्न थोड़ा अलग मिला। सितंबर अंत में एक घर से 12 लीटर मिलावटी शराब, 2,500 नकली ढक्कन और 200 रैपर मिले। यहां बाहरी शराब की री-बॉटलिंग के बजाय सीधे मिलावट का खेल चल रहा था।
उपभोक्ताओं के लिए बड़ा खतरा
बदली हुई पैकिंग और नकली होलोग्राम का नुकसान सिर्फ सरकार के राजस्व (Tax) तक सीमित नहीं है। जब बोतल की पहचान और ब्रांड बदल दिए जाते हैं, तो आम ग्राहक को कभी पता नहीं चलता कि वह असली शराब पी रहा है या जानलेवा रसायन। मिलावटी और अवैध शराब सीधे तौर पर लोगों की सेहत और जान के साथ खिलवाड़ है।